• Sanskriti IAS - अखिल मूर्ति के निर्देशन में

अल्फाफोल्ड 

  • 8th August, 2022

(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नप्रत्र-3 : विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग)

संदर्भ  

हाल ही में, लंदन स्थित गूगल के स्वामित्व वाली कंपनी डीपमाइंड के अनुसार उसने अल्फाफोल्ड का उपयोग करके 200 मिलियन से अधिक प्रोटीनों की त्रि-आयामी संरचनाओं का अनुमान लगाया है।  

क्या है अल्फाफोल्ड 

  • अल्फाफोल्ड एक कृत्रिम बुद्धिमता (AI) आधारित प्रोटीन संरचना भविष्यवाणी उपकरण है, जो ‘डीप न्यूरल नेटवर्क’ नामक कंप्यूटर सिस्टम पर आधारित है। 
  • मानव मस्तिष्क से प्रेरित होकर न्यूरल नेटवर्क बड़ी मात्रा में इनपुट डाटा का उपयोग करते हैं और मानव मस्तिष्क की तरह ही वांछित आउटपुट प्रदान करते हैं। 
  • इनपुट और आउटपुट परतों के बीच वास्तविक कार्य ब्लैक बॉक्स द्वारा किया जाता है, जिसे ‘हिडेन नेटवर्क’ कहते हैं। 
  • अल्फाफोल्ड को इनपुट के रूप में प्रोटीन अनुक्रमों के साथ रखा जाता है। जब प्रोटीन अनुक्रम एक छोर से प्रवेश करते हैं तो अनुमानित त्रि-आयामी संरचनाएँ दूसरे छोर के माध्यम से बाहर आती हैं। 

कार्यप्रणाली 

  • यह प्रशिक्षण, अधिगम (सीखने), पुन: प्रशिक्षण और पुनः सीखने के आधार पर प्रक्रियाओं का उपयोग करता है। 
  • पहला कदम कंप्यूटर मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिये प्रोटीन डाटा बैंक (PDB) में 1,70,000 प्रोटीन की उपलब्ध संरचनाओं का उपयोग करना है। फिर यह उस प्रशिक्षण के परिणामों का उपयोग प्रोटीन की संरचनात्मक अनुमानों को जानने के लिये करता है। 
  • उसके बाद पुन: प्रशिक्षण और पुनः सीखने के माध्यम से पहले चरण से उच्च सटीक अनुमानों का उपयोग करता है ताकि और अधिक सटीकता प्राप्त की जा सके। 
  • इस पद्धति का उपयोग करके अल्फाफोल्ड ने यूनिवर्सल प्रोटीन रिसोर्स (UniProt) डाटाबेस में एकत्रित कुल 214 मिलियन अद्वितीय प्रोटीन अनुक्रमों की संरचनाओं की भविष्यवाणी की है। 

विकास के निहितार्थ 

  • प्रोटीन किसी जीवित कोशिका के भीतर सभी कार्यों को पूरा करते हैं। इसलिये, मानव रोगों को समझने के लिये प्रोटीन संरचना और उसके कार्य को जानना आवश्यक है। 
  • वैज्ञानिक एक्स-रे क्रिस्टलोग्राफी, परमाणु चुंबकीय अनुनाद स्पेक्ट्रोस्कोपी या क्रायोजेनिक इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी का उपयोग करके प्रोटीन संरचनाओं का अनुमान लगाते हैं। 
  • उपरोक्त तकनीकें परीक्षण और त्रुटि विधियों पर आधारित हैं जिनमें प्राय: वर्षों लग जाते हैं। अल्फाफोल्ड के विकास से इनमें अद्वितीय परिवर्तन आया है। 
  • लगभग एक वर्ष पूर्व पहली बार डाटाबेस को सार्वजनिक करने के बाद से अल्फाफोल्ड ने वैज्ञानिकों को टीका और दवा विकास से संबंधित खोजों में तेजी लाने में मदद की है। 

भारत के लिये मायने 

  • प्रोटीन संरचनाओं को समझने में जी.एन. रामचंद्रन का योगदान उल्लेखनीय है। साथ ही, यह संरचनात्मक जीव विज्ञान के क्षेत्र में भारतीय पक्ष की मजबूती और कुशलता को प्रदर्शित करता है। 
  • अल्फाफोल्ड डाटाबेस का लाभ उठाने और बेहतर वैक्सीन एवं दवाओं का विकास करने के लिये प्रोटीन संरचनाओं को बेहत्तर तरीके से जानने की आवश्यकता होती है, जिससे कम समय में इनका विकास किया जा सके। 
  • भारत को विज्ञान के क्षेत्र में सार्वजनिक-निजी भागीदारी के कार्यान्वयन में तेजी लाने की आवश्यकता होगी।
CONNECT WITH US!

X