• Sanskriti IAS - अखिल मूर्ति के निर्देशन में

शॉर्ट न्यूज़

शॉर्ट न्यूज़: 18 जनवरी, 2022


कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन

वैश्विक जोखिम रिपोर्ट -2022

राजनीतिक दलों को चुनाव चिह्न का आवंटन

हेनले पासपोर्ट इंडेक्स, 2022

भारत की वृद्धि-दर का पूर्वानुमान

क्रीमीलेयर की आय सीमा का पुनर्निधारण


कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन

चर्चा में क्यों?

हाल ही में, दो-दिवसीय कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन (CSC) कार्यशाला का आयोजन किया गया। 

मुख्य बिंदु

  • यह सम्मलेन राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद्, राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय, गांधीनगर और कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव के सहयोग से संपन्न हुआ।
  • सी.एस.सी. कार्यशाला में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों में श्रीलंका, मालदीव, भारत, मॉरीशस, सेशेल्स और बांग्लादेश शामिल थे।

कार्यशाला में चर्चा के प्रमुख क्षेत्र

  • डीप वेब एवं डार्क नेट जाँच तथा चुनौतियाँ
  • डिजिटल फोरेंसिक
  • साइबर खतरे से संबंधित खुफिया सूचना
  • साइबर डोमेन में रक्षात्मक संचालन

सहयोग के चार क्षेत्रों पर सहमति 

राष्ट्रों ने सहयोग के चार क्षेत्रों पर सहमति व्यक्त की है, ये हैं-

  • समुद्री संरक्षा एवं सुरक्षा
  • आतंकवाद और कट्टरता
  • अवैध व्यापार तथा संगठित अपराध और साइबर सुरक्षा
  • महत्त्वपूर्ण अवसंरचना का संरक्षण

वैश्विक जोखिम रिपोर्ट -2022

चर्चा में क्यों?

हाल ही में, विश्व आर्थिक मंच (WEF) द्वारा वैश्विक जोखिम रिपोर्ट -2022 का 17वा संस्करण जारी किया गया। रिपोर्ट में व्यक्तिगत और सामूहिक उन्नति के लिये महत्त्वपूर्ण अल्पकालिक जोखिमों की पहचान की गई है। 

मुख्य बिंदु

  • डब्ल्यू.ई.एफ. के सर्वेक्षण में वैश्विक सुधार के लिये निराशाजनक दृष्टिकोण देखा गया है। यह वैश्विक जी.डी.पी. में गिरावट का मुख्य कारण हो सकता है। 
  • जलवायु परिवर्तन को पुनः वैश्विक जोखिम के मुख्य कारण के रूप में दर्ज किया गया है। जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई करने में विफलता वैश्विक जी.डी.पी. के आकार को 1/6  तक कम कर सकती है। कॉप-26 में की गई प्रतिबद्धताएँ अभी भी 1.5 डिग्री सेल्सियस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये पर्याप्त नहीं हैं।
  • रिपोर्ट में शामिल किये जाने वाले अन्य कारक निम्नलिखित हैं :
    • जल संकट
    • अकाल के कारण सूखा
    • देशों के मध्य संघर्ष
    • सामूहिक विनाश के हथियारों का संभावित उपयोग
    • विश्व अर्थव्यवस्था की महामारी के बाद की स्थिति
  • अन्य मुख्य कारणों में सामाजिक सामंजस्य में कमी, आजीविका संकट और मानसिक स्वास्थ्य में गिरावट को जोखिमों के रूप में पहचाना गया, जो कि कोविड​​-19 महामारी की शुरुआत के बाद से सबसे अधिक बढ़ गया है। ऐसा माना जा रहा है कि अगले तीन वर्षों में वैश्विक सुधार अस्थिर और असमान होगा।

      राजनीतिक दलों को चुनाव चिह्न का आवंटन

      चर्चा में क्यों?

      हाल ही में, चुनाव आयोग द्वारा पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा गठित राजनीतिक दल को ‘हॉकी स्टिक और गेंद’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है।

      क्या है चुनाव चिह्न?

      • यह प्रत्येक राजनीतिक दल को आवंटित एक मानकीकृत प्रतीक है। इसका उपयोग पार्टियों द्वारा अपने चुनाव प्रचार अभियान के दौरान किया जाता है।
      • राजनीतिक दलों के चुनाव चिह्न इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में प्रदर्शित किये जाते हैं। यह निरक्षर मतदाताओं को उस पार्टी की पहचान करने में मदद करता है, जिसे वे वोट देना चाहते हैं।

      चुनाव चिह्न आवंटन की प्रक्रिया

      • चुनाव आयोग द्वारा चुनाव चिह्न (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश, 1968 के तहत राजनीतिक दलों को चुनाव चिह्न का आवंटन किया जाता है।
      • वर्तमान में भारतीय चुनाव आयोग चुनाव चिह्नों की एक विस्तृत सूची रखता है, जो दैनिक जीवन के विभिन्न पहलुओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।
      • राजनीतिक दलों को वरीयता क्रम में तीन प्रतीकों का चयन करना होता है, उनमें से एक प्रतीक को चुनाव आयोग द्वारा राजनीतिक दल को आवंटित किया जाता है।
      • एक बार एक प्रतीक आवंटित हो जाने के पश्चात् किसी अन्य दल द्वारा इसका उपयोग नहीं किया जा सकता है।
      • चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सभी दलों के प्रतीक पूरे भारत में एक ही होना चाहिये।
      • राज्य स्तरीय दल के मामले में आवंटित प्रतीक का उपयोग संबंधित राज्य में किसी अन्य दल द्वारा नहीं किया जा सकता, परंतु किसी अन्य राज्य में किया जा सकता है।

      हेनले पासपोर्ट इंडेक्स, 2022

      चर्चा में क्यों ?

      हाल ही में, ‘हेनले पासपोर्ट इंडेक्स, 2022’ को जारी किया गया है। 

      प्रमुख बिंदु

      • वर्ष 2022 की सूची में जापान और सिंगापुर शीर्ष पर हैं। इन देशों के पासपोर्ट धारकों को 192 देशों में वीजा-मुक्त यात्रा करने की अनुमति है। विदित है कि चार वर्षों से जापान शीर्ष स्थान पर है।
      • इस सूचकांक में जर्मनी और दक्षिण कोरिया दूसरे तथा भारत 83वें स्थान पर है। 
      • भारत के पासपोर्ट धारक ओमान और आर्मेनिया के नवीनतम परिवर्धन के साथ विश्व के 60 गंतव्यों में वीजा-मुक्त यात्रा कर सकते हैं।

      हेनले पासपोर्ट इंडेक्स

      • यह सूचकांक ‘हेनले एंड पार्टनर्स’ द्वारा तैयार किया गया है, जो लंदन स्थित वैश्विक नागरिकता और निवास सलाहकार फर्म है।
      • इसमें कुल 227 गंतव्य और 199 देशों के पासपोर्ट शामिल हैं।
      • यह सूचकांक राष्ट्रों के पासपोर्ट को उन गंतव्यों की संख्या के अनुसार रैंकिंग प्रदान करता है, जहाँ उनके धारक वीजा-मुक्त यात्रा कर सकते हैं। इसमें रैंकिंग का आधार ‘इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन’ द्वारा उपलब्ध कराए गए आँकड़े होते हैं।

      भारत की वृद्धि-दर का पूर्वानुमान

      चर्चा में क्यों?

      विश्व बैंक ने वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिये भारत की वृद्धि-दर के 8.3% होने का अनुमान व्यक्त किया है।

      विश्व बैंक द्वारा जारी जी. डी. पी. पूर्वानुमान

      देश



      वृद्धि-दर

      2021-22

      2022-23

      2023-24

      भारत

      8.3%

      8.7%

      6.8%

      यू.एस.ए

      5.6%

      3.7%

      2.6%

      जापान

      1.7%

      2.9%

      1.2%

      चीन

      8.0%

      5.1%

      5.3%

      अर्जेंटीना

      10.0%

      2.6%

      2.1%

      बांग्लादेश

      5.0%

      6.4%

      6.9%

      प्रमुख बिंदु

      • विश्व बैंक ने जून 2021 में भारत की वृद्धि-दर के संदर्भ में किये गए पूर्वानुमान को अपरिवर्तित रखा है।
      • वर्तमान और आगामी वित्त वर्ष में भारत की वृद्धि-दर अपने निकटतम भौगोलिक पड़ोसियों की तुलना में अधिक मजबूत रहेगी।
      • वित्तीय वर्ष 2022-23 और 2023-24 के लिये भारत की आर्थिक वृद्धि-दर क्रमशः 8.7% और 6.8% रहने का पूर्वानुमान है। 
      • वैश्विक आर्थिक वृद्धि-दर में भी गिरावट का अनुमान है। इसे वर्ष 2022 में 4.1% और वर्ष 2023 में 3.2% रहने का पूर्वानुमान व्यक्त किया गया है।
      • विश्व बैंक की रिपोर्ट में बढ़ती असमानता और मुद्रास्फीति से उत्पन्न जोखिम के प्रति भी चिंता व्यक्त की गई है।

      क्रीमीलेयर की आय सीमा का पुनर्निधारण

      चर्चा में क्यों?

      केंद्र सरकार द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग के संदर्भ में क्रीमीलेयर की आय सीमा को बढ़ाने हेतु पुनर्परीक्षण किया जा रहा है।

      प्रमुख बिंदु

      • सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय इसके लिये परामर्श प्रारंभ करेगा और अधिकतम आय सीमा को मौजूदा 8 लाख रुपए से बढ़ाकर प्रस्तावित 12 लाख रुपए करने के मुद्दे की जाँच करेगा।
      • साथ ही, मंत्रालय पुनः यह जाँच करेगा कि वार्षिक आय गणना में कृषि आय को शामिल किया जाना चाहिये या नहीं। वर्तमान में सकल वार्षिक आय में कृषि से प्राप्त आय को शामिल नहीं किया जाता।
      • सामान्यतः आय मानदंडों की प्रत्येक तीन साल में समीक्षा की जाती है। पिछली समीक्षा वर्ष 2017 में की गई थी, जिसके पश्चात् आय सीमा को 6 लाख से बढ़ाकर 8 लाख कर दिया गया था।
      • विदित है कि मंत्रालय ने मार्च 2019 में सकल वार्षिक आय सीमा की समीक्षा करने तथा क्रीमीलेयर के मानदंडों पर पुनः विचार करने (जिन्हें वर्ष 1993 में निर्धारित किया गया था) के लिये एक पैनल का गठन किया था।

      वर्तमान स्थिति

      वर्तमान में, ओ.बी.सी. उच्च शिक्षण संस्थानों और सार्वजनिक क्षेत्र के रोज़गार में 27% आरक्षण के हकदार हैं, यदि उनके माता-पिता की सकल वार्षिक आय 8 लाख रुपए से अधिक नहीं है।


      CONNECT WITH US!