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शॉर्ट न्यूज़

शॉर्ट न्यूज़: 4 जनवरी, 2022


सूर्य मंदिर का जीर्णोद्धार

नीति आयोग स्वास्थ्य सूचकांक-2021

गैर-सरकारी संगठनों के विदेशी कोष के लिये एफ.सी.आर.ए. के प्रावधान

यू.एन.एस. सी. की आतंकवाद रोधी समिति

कावी कला 

आर्मी सिक्योर इंडीजीनियस मैसेजिंग एप्लीकेशन


सूर्य मंदिर का जीर्णोद्धार

चर्चा में क्यों?

भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा ओडिशा के सूर्य मंदिर के अंदरूनी हिस्सों से रेत को सुरक्षित रूप से हटाने के लिये प्रारंभिक रोडमैप पर कार्य प्रारंभ किया गया। यह रेत 118 साल पहले अंग्रेजों ने मंदिर के हिस्से (जगमोहन हॉल) को एकाएक गिरने से बचाने के लिये भरी थी।

प्रमुख बिंदु

  • फरवरी 2020 में सूर्य मंदिर के संरक्षण पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में तत्कालीन केंद्रीय संस्कृति मंत्री द्वारा ए.एस.आई. को रेत हटाने के तौर-तरीकों पर रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश जारी किये गये थे।
  • एक अध्ययन से ज्ञात हुआ है कि रेत की परत के कारण 17 फीट तक का एक गर्त बनने की संभावना है।

सूर्य मंदिर

sun-temple

  • 13वीं सदी के दौरान उड़ीसा के पूर्वी गंग वंश के राजा नरसिम्हादेव प्रथम (1238-1264 ई.) के शासनकाल में इस मंदिर का निर्माण किया गया। 
  • यह कलिंग शैली में निर्मित कला का एक उत्कृष्ट नमूना है। इसे उड़ीसा के स्वर्ण त्रिभुज (सूर्य मंदिर, जगन्नाथ पुरी और भुवनेश्वर) का हिस्सा माना जाता है।

नीति आयोग स्वास्थ्य सूचकांक-2021

चर्चा में क्यों?

नीति आयोग ने 2019-20 के लिये राज्य स्वास्थ्य सूचकांक का चौथा संस्करण जारी किया। इस रिपोर्ट को विश्व बैंक की तकनीकी सहायता व स्वास्थ्य मंत्रालय के परामर्श में तैयार किया जाता है

मुख्य बिंदु

  • इस रिपोर्ट का शीर्षक 'स्वस्थ राज्य, प्रगतिशील भारत' है। यह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्वास्थ्य में उनके साल-दर-साल वृद्धिशील प्रदर्शन व उनकी समग्र स्थिति के आधार पर रैंकिंग प्रदान करती है।
  • स्वास्थ्य सूचकांक राज्यों को एक समग्र स्कोर प्रदान करता है, जिसमें स्वास्थ्य प्रदर्शन के प्रमुख पहलुओं को कवर करने वाले 24 संकेतकों को शामिल किया गया है।
  • 24 संकेतकों को 'स्वास्थ्य परिणामों', 'शासन एवं सूचना' और 'प्रमुख आदान/प्रक्रिया' के अंतर्गत वर्गीकृत किया जाता है। प्रत्येक वर्ग का एक आवंटित भार होता है, जिस आधार पर राज्यों को रैंकिंग प्रदान की जाती है।
  • स्वास्थ्य सूचकांक रैंकिंग को तीन भागों में वर्गीकृत किया गया है - बड़े राज्य, छोटे राज्य और केंद्र शासित प्रदेश।

रैंकिंग

श्रेणी

समग्र प्रदर्शन (उच्च रैंक)

वार्षिक वृद्धिशील प्रदर्शन

बड़े राज्य

केरल व तमिलनाडु

उत्तर प्रदेश, असम और तेलंगाना 

छोटे राज्य

मिज़ोरम और त्रिपुरा

मिज़ोरम और मेघालय

केंद्र शासित प्रदेश

दादरा व नगर हवेली और दमन व दीव तथा चंडीगढ़

दिल्ली तथा जम्मू और कश्मीर


गैर-सरकारी संगठनों के विदेशी कोष के लिये एफ.सी.आर.ए. के प्रावधान

चर्चा में क्यों?

पश्चिम बंगाल के गैर-सरकारी संगठन मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी के ‘लेखांकन में  अनियमितताओं’ के कारण, विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) के तहत संगठन के विदेशी अंशदान की प्राप्ति पर रोक लगा दी गई।

मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी

  • इसकी स्थापना मदर टेरेसा द्वारा वर्ष 1950 में की गई थी।
  • इसका उद्देश्य शरणार्थी, वृद्ध वेश्याओं, मानसिक रोगियों, बीमार बच्चे, परित्यक्त बच्चे, एड्स रोगियों, वृद्ध व्यक्तियो की देखभाल करना हैं।

विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA)

  • विदेशी अंशदान को नियंत्रित करने के लिये भारत सरकार द्वारा वर्ष 1976 में एफ.सी.आर.ए. अधिनियमित किया गया। इसे वर्ष 2010 में संशोधित भी किया गया। 
  • यह उन सभी संघों, समूहों और गैर-सरकारी संगठनों पर लागू होता है जो विदेशी अंशदान प्राप्त करना चाहते हैं। ऐसे सभी एन.जी.ओ. के लिये एफ.सी.आर.ए. के तहत पंजीकरण अनिवार्य है।
  • पंजीकरण की वैधता पाँच वर्ष होती है और इसे पुनः नवीनीकृत किया जा सकता है। पंजीकृत संगठन ही सामाजिक,  शैक्षिक, धार्मिक, आर्थिक और सांस्कृतिक उद्देश्यों के लिये विदेशी योगदान प्राप्त कर सकते हैं।

विदेशी अंशदान के लिये गैर-अधिकृत व्यक्ति

  • संसदीय सदस्य
  • सरकारी अधिकारी
  • न्यायाधीश
  • मीडियाकर्मी

पंजीकरण निलंबन का आधार

  • खातों के निरीक्षण और किसी एसोसिएशन की कार्यप्रणाली के विरुद्ध कोई प्रतिकूल तथ्य मिलने पर गृह मंत्रालय एफ.सी.आर.ए. पंजीकरण को प्रारंभ में 180 दिनों के लिये निलंबित कर सकता है। 
  • कोई निर्णय न होने तक, एसोसिएशन कोई नया दान प्राप्त नहीं कर सकता और न ही गृह मंत्रालय की अनुमति के बिना नामित बैंक खाते में उपलब्ध राशि का 25% से अधिक का उपयोग ही कर सकता है। 

राजनीतिक दलों के लिये प्रावधान

वर्ष 2017 में एफ.सी.आर.ए. अधिनियम, 1976 में संशोधन किया गया। इस संशोधन के अनुसार, राजनीतिक दल विदेशी कंपनियों (जिसमें किसी भारतीय का 50% या अधिक शेयर हो) से अंशदान प्राप्त कर सकते हैं।


यू.एन.एस. सी. की आतंकवाद रोधी समिति

चर्चा में क्यों?

भारत जनवरी, 2022 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् (UNSC) की आतंकवाद रोधी समिति की अध्यक्षता करेगा।

प्रमुख बिंदु 

  • यू.एन.एस.सी. की आतंकवाद रोधी समिति की स्थापना सुरक्षा परिषद् के प्रस्ताव 1373 के तहत की गई थी।
  • प्रस्ताव 1373 को सुरक्षा परिषद् द्वारा सर्वसम्मति से अमेरिका में 9/11 आतंकी हमलों के पश्चात् अपनाया गया था।
  • इस समिति के प्रमुख कार्य आंतकवाद के वित्तपोषण को अपराध की श्रेणी में शामिल करना, आतंकवादी गतिविधियों में शामिल व्यक्तियों की संपत्ति को ज़ब्त करना तथा आतंकवादी समूहों को किसी भी प्रकार की वित्तीय सहायता से इंकार करना शामिल है।
  • इसके अलावा, यह समिति आतंकवादी कृत्यों में शामिल लोगों की जाँच, पता लगाने, गिरफ्तारी, प्रत्यर्पण और मुकदमा चलाने में अन्य सरकारों के साथ सहयोग करने के लिये उठाए गए कदमों की निगरानी भी करती है। 

कावी कला 

चर्चा में क्यों

हाल ही में, प्रधानमंत्री ने कावी कला के संरक्षण में महत्त्वपूर्ण योगदान देने के लिये गोवा के सागर मुले के प्रयासों की सराहना की।

प्रमुख बिंदु

  • कावी चमकदार लाल और सफेद रंगों से निर्मित भित्ति-कला का एक रूप है। यह  मुख्यतः कोंकण क्षेत्र (गोवा, महाराष्ट्र तथा कर्नाटक) के मंदिरों में प्रचलित है। इस कला को सर्वप्रथम पुर्तगालियों द्वारा प्रारंभ किया था। 
  • इस कला का नाम लेटेराईट मृदा में पाए जाने वाले ‘काव’ नामक लाल रंगद्रव्य के नाम पर रखा गया है। 
  • काव का उपयोग सफ़ेद प्लास्टर पर जीवंत चित्र बनाने के लिये प्रयोग किया जाता है। कावी कला में केवल लाल रंग का ही प्रयोग किया जाता है।
  • इस कला हेतु प्लास्टर सीपियों को जलाकर, इसे नदी के तल से धुली हुई रेत और गुड़ के साथ मिलाकर प्राप्त किया जाता है।

आर्मी सिक्योर इंडीजीनियस मैसेजिंग एप्लीकेशन

चर्चा में क्यों?

हाल ही में, भारतीय सेना ने आर्मी सिक्योर इंडीजीनियस मैसेजिंग एप्लीकेशन (ASIGMA)

नामक एक मैसेजिंग ऐप लॅान्च किया है।

प्रमुख बिंदु 

  • यह नई पीढ़ी का एक अत्याधुनिक वेब आधारित एप्लीकेशन है, जिसे कोर ऑफ सिग्नल्स के अधिकारियों द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है।
  • इस ऐप को आर्मी वाइड एरिया नेटवर्क (AWAN) मैसेजिंग एप्लीकेशन के प्रतिस्थापन के रूप में सेना के आंतरिक नेटवर्क पर तैनात किया जा रहा है।
  • यह ऐप सभी भावी उपयोगकर्ता आवश्यकताओं को पूरा करेगा। साथ ही, यह एक उन्नत उपयोगकर्ता अनुभव का भी दावा करता है। यह भारत सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ पहल के अनुरूप है।
  • यह बहु-स्तरीय सुरक्षा, संदेश प्राथमिकता और ट्रैकिंग, गतिशील वैश्विक पता पुस्तिका तथा सेना की विभिन्न आवश्यकताओं को पूरा करने जैसी विशेषताओं से युक्त है। 
  • यह ऐप वर्तमान भू-राजनीतिक सुरक्षा वातावरण की पृष्ठभूमि में, सेना की वास्तविक समय पर आधारित डाटा ट्रांसफर और मैसेजिंग आवश्यकताओं को पूरा करेगा।

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