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अंतरराष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस 2026: महत्त्व और सतत कृषि में महिलाओं की भूमिका

मुख्य शब्द: अंतरराष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस 2026, ग्रामीण महिला किसान, यूएन वीमेन, सतत कृषि, महिलाओं के भूमि अधिकार, खाद्य सुरक्षा, जैव विविधता संरक्षण, अवैतनिक देखभाल कार्य।

चर्चा में क्यों?

  • 15 अक्टूबर 2026 को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस के अवसर पर यूएन वीमेन ने एक वक्तव्य जारी किया है। इसमें कृषि, आजीविका और पर्यावरण संरक्षण में ग्रामीण महिलाओं के योगदान को रेखांकित किया गया है।
  • “प्रकृति की देखभाल करती ग्रामीण महिला किसान” (Rural Women Farmers Caring for Mother Nature)।
  • यह थीम बीज संरक्षण, जैव विविधता की रक्षा, जल प्रबंधन और अवक्रमित भूमि की पुनर्बहाली में ग्रामीण महिलाओं की भूमिका को मान्यता देती है।

अंतरराष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस क्या है?

  • संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 18 दिसंबर 2007 को अपनाए गए संकल्प 62/136 के माध्यम से 15 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस के रूप में घोषित किया।
  • यह दिवस पहली बार 15 अक्टूबर 2008 को मनाया गया।
  • यह दिवस कृषि विकास, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण गरीबी में कमी लाने में ग्रामीण महिलाओं, जिनमें आदिवासी महिलाएँ भी शामिल हैं, के योगदान को मान्यता देता है।
  • संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2026 को ‘अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष’ भी घोषित किया है। इससे सतत कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं की भागीदारी पर विशेष ध्यान केंद्रित हुआ है।

प्रसंग: प्रकृति की देखभाल करती ग्रामीण महिला किसान

यह थीम महिलाओं के कृषि कार्यों को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जोड़ती है। वक्तव्य में उनके चार प्रमुख योगदानों को रेखांकित किया गया है:

  • बीज संरक्षण: बीजों और कृषि विविधता का संरक्षण करना।
  • जैव विविधता की रक्षा: प्रजातियों और पारिस्थितिकी तंत्रों के संरक्षण में योगदान देना।
  • जल प्रबंधन: खेती और घरेलू आवश्यकताओं के लिए महत्त्वपूर्ण जल संसाधनों का प्रबंधन करना।
  • भूमि की पुनर्बहाली: अवक्रमित भूमि को पुनः स्वस्थ बनाने और उसकी उत्पादक क्षमता बनाए रखने में सहयोग करना।

यह थीम ग्रामीण महिलाओं को ज्ञान की संवाहक और नेतृत्वकर्ता के रूप में प्रस्तुत करती है, जिनका कार्य समुदायों और पर्यावरण दोनों को सहारा देता है।

भूमि और प्राकृतिक संसाधनों पर सशक्त अधिकार

यूएन वीमेन भूमि, जल और अन्य प्राकृतिक संसाधनों पर महिलाओं के ऐसे अधिकारों की आवश्यकता पर बल देता है, जिन्हें कानूनी रूप से लागू कराया जा सके।

  • ग्रामीण महिलाओं को उन संसाधनों पर सुरक्षित अधिकार मिलने चाहिए, जिन पर उनकी आजीविका निर्भर है।
  • कृषि में उनके योगदान के अनुरूप संसाधन प्रबंधन संबंधी निर्णयों में उनकी प्रभावी भूमिका होनी चाहिए।
  • नीतियों के माध्यम से महिलाओं की जिम्मेदारियों और उनकी निर्णय लेने की शक्ति के बीच मौजूद अंतर को दूर किया जाना चाहिए।

आर्थिक अवसरों तक समान पहुँच

वक्तव्य में निम्नलिखित तक समान पहुँच सुनिश्चित करने का आह्वान किया गया है:

  • वित्त और वित्तीय सेवाएँ।
  • बाजार और व्यापार के अवसर।
  • कृषि प्रौद्योगिकी।
  • कृषि सेवाएँ, परामर्श और प्रशिक्षण।

इन उपायों से महिलाएँ अपनी उत्पादकता बढ़ा सकती हैं, आजीविका को मजबूत बना सकती हैं और आर्थिक निर्णयों पर अधिक नियंत्रण प्राप्त कर सकती हैं।

अवैतनिक देखभाल कार्य को मान्यता

यूएन वीमेन इस बात पर जोर देता है कि अवैतनिक देखभाल कार्य को मान्यता दी जाए, उसका बोझ कम किया जाए और जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण किया जाए।

प्राथमिकता

अर्थ

मान्यता देना

बिना पारिश्रमिक किए जाने वाले घरेलू और देखभाल संबंधी कार्यों के महत्त्व को स्वीकार करना।

बोझ कम करना

ऐसी सेवाओं और बुनियादी ढाँचे का विस्तार करना, जो इन कार्यों में लगने वाले समय और श्रम को कम करें।

जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण

परिवार के भीतर तथा सार्वजनिक और सामुदायिक सहयोग के माध्यम से जिम्मेदारियों का अधिक न्यायसंगत बँटवारा करना।

देखभाल संबंधी जिम्मेदारियों का बोझ कम होने से ग्रामीण महिलाओं को शिक्षा, सवेतन कार्य, कृषि प्रशिक्षण और सार्वजनिक गतिविधियों में भागीदारी के लिए अधिक समय मिल सकता है।

गरिमापूर्ण कार्य, सामाजिक सुरक्षा और बुनियादी ढाँचा

वक्तव्य में निम्नलिखित आवश्यकताओं को भी रेखांकित किया गया है:

  • गरिमापूर्ण कार्य और बेहतर कार्य परिस्थितियाँ।
  • आजीविका को प्रभावित करने वाले संकटों से बचाव के लिए सामाजिक सुरक्षा।
  • ग्रामीण समुदायों की सहायता करने वाला आपदा एवं जलवायु-सहनीय बुनियादी ढाँचा।
  • ऐसी सेवाएँ, जो आर्थिक गतिविधियों में महिलाओं की अधिक व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करें।

कृषि और पर्यावरण संबंधी निर्णयों में भागीदारी

ग्रामीण महिलाओं को कृषि नीतियों के निर्माण तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए उपलब्ध वित्तीय संसाधनों के आवंटन संबंधी निर्णयों में प्रभावी भूमिका मिलनी चाहिए।

वक्तव्य में तीन ऐसे क्षेत्रों की पहचान की गई है, जहाँ उनकी भागीदारी आवश्यक है:

  • जलवायु परिवर्तन से निपटना।
  • जैव विविधता का संरक्षण करना।
  • अवक्रमित भूमि की पुनर्बहाली करना।

उनके योगदान को मान्यता देने के साथ-साथ उनका नेतृत्व नीतिगत प्रतिबद्धताओं, बजट और क्रियान्वयन में भी दिखाई देना चाहिए।

तीन रियो अभिसमयों से संबंध

वक्तव्य में तीन रियो अभिसमयों के अंतर्गत होने वाली बैठकों को पर्यावरणीय कार्रवाई में महिलाओं की भागीदारी मजबूत करने के अवसर के रूप में चिह्नित किया गया है।

अभिसमय

मुख्य विषय

जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र रूपरेखा अभिसमय UNFCCC

जलवायु परिवर्तन

जैव विविधता अभिसमय CBD

जैव विविधता का संरक्षण, उसका सतत उपयोग तथा लाभों का न्यायसंगत बँटवारा

मरुस्थलीकरण से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र अभिसमय UNCCD

मरुस्थलीकरण, भूमि अवक्रमण और सूखा

ये अभिसमय परस्पर जुड़ी पर्यावरणीय चुनौतियों से संबंधित हैं। महिलाओं का ज्ञान और उनकी भागीदारी कृषि विकास को जलवायु कार्रवाई, जैव विविधता संरक्षण और भूमि की पुनर्बहाली के उद्देश्यों से जोड़ने में सहायक हो सकती है।

ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रत्यक्ष निवेश

  • यूएन वीमेन सरकारों, वित्तीय संस्थानों, व्यवसायों और विकास भागीदारों से ग्रामीण महिलाओं के लिए सीधे निवेश करने का आह्वान करता है।
  • इसका केंद्रीय संदेश है कि खाद्य प्रणालियों और पर्यावरण संरक्षण में महिलाओं के योगदान के अनुरूप उन्हें पर्याप्त अधिकार, संसाधन और निर्णय लेने की शक्ति मिलनी चाहिए।

महत्त्व

  • खाद्य सुरक्षा: महिला किसानों को सहयोग प्रदान करने से कृषि आधारित आजीविका और समुदायों की खाद्य आपूर्ति मजबूत हो सकती है।
  • पर्यावरणीय स्थिरता: उनका ज्ञान बीज संरक्षण, जैव विविधता की रक्षा और संसाधनों के जिम्मेदार प्रबंधन में योगदान दे सकता है।
  • जलवायु-सहनशीलता: वित्त, प्रौद्योगिकी और सेवाओं तक पहुँच पर्यावरणीय संकटों से निपटने की उनकी क्षमता बढ़ा सकती है।
  • लैंगिक समानता: संसाधनों पर अधिक नियंत्रण और निर्णयों में भागीदारी से संरचनात्मक असमानताओं को दूर करने में मदद मिल सकती है।
  • समावेशी विकास: ग्रामीण महिलाओं में निवेश से आजीविका में सुधार और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ आगे बढ़ाया जा सकता है।

भारत के लिए प्रासंगिकता

  • महिलाओं को किसान के रूप में मान्यता: यह वक्तव्य महिलाओं के कृषि कार्यों को बेहतर मान्यता देने के लिए एक उपयोगी रूपरेखा प्रस्तुत करता है। नीतिगत प्रयासों में उत्पादक संसाधनों, प्रशिक्षण, बाजारों और निर्णय प्रक्रिया तक उनकी पहुँच को भी प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
  • मौजूदा ग्रामीण आजीविका पहलों को मजबूत करना: भारत में महिला किसान सशक्तीकरण परियोजना (MKSP) को दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के एक उपघटक के रूप में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य कृषि में महिलाओं को सशक्त बनाना और कृषि आधारित आजीविका को मजबूत करना है।
  • महिला समूहों को सहयोग: स्वयं सहायता समूह और महिलाओं के नेतृत्व वाले उत्पादक संगठन सामूहिक खरीद, विपणन, प्रशिक्षण तथा स्थानीय विकास संबंधी निर्णयों में भागीदारी के मंच बन सकते हैं।
  • सशक्तीकरण को पर्यावरणीय नियोजन से जोड़ना: यह वक्तव्य भारत के लिए महिला किसानों को स्थानीय जल प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण और भूमि की पुनर्बहाली की योजनाओं में अधिक प्रत्यक्ष रूप से शामिल करने का नीतिगत अवसर प्रस्तुत करता है।

चुनौतियाँ

  • संसाधनों तक असमान पहुँच: भूमि, जल और उत्पादक परिसंपत्तियों पर सीमित नियंत्रण।
  • वित्तीय बाधाएँ: उपयुक्त वित्तीय सेवाओं और निवेश तक अपर्याप्त पहुँच।
  • प्रौद्योगिकी और सेवाओं में अंतर: कृषि परामर्श, उपकरणों और प्रशिक्षण तक असमान पहुँच।
  • अवैतनिक देखभाल की जिम्मेदारियाँ: महिलाओं के समय और श्रम पर कृषि, घरेलू कार्यों तथा देखभाल की एक साथ पड़ने वाली माँग।
  • सीमित प्रतिनिधित्व: नीतियों, संस्थाओं और वित्त आवंटन संबंधी निर्णयों में अपर्याप्त प्रभाव।
  • पर्यावरणीय दबाव: जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता की हानि और भूमि अवक्रमण से ग्रामीण आजीविका के आधारभूत संसाधनों को खतरा।

आगे की राह

  1. संसाधनों पर अधिकार मजबूत करना: भूमि, जल और प्राकृतिक संसाधनों पर महिलाओं के अधिकारों को कानूनी रूप से लागू करने योग्य बनाना तथा इन अधिकारों का लाभ प्राप्त करना सुगम बनाना।
  2. वित्तीय समावेशन बढ़ाना: महिला किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप वित्तीय सेवाएँ और निवेश तंत्र विकसित करना।
  3. कृषि सहायता का विस्तार करना: प्रौद्योगिकी, कृषि विस्तार सेवाओं, प्रशिक्षण और बाजारों तक पहुँच बेहतर बनाना।
  4. अवैतनिक देखभाल कार्य का बोझ कम करना: सेवाओं और बुनियादी ढाँचे में निवेश करने के साथ देखभाल संबंधी जिम्मेदारियों के साझा निर्वहन को बढ़ावा देना।
  5. सार्थक भागीदारी सुनिश्चित करना: कृषि नीतियों के निर्माण और पर्यावरण संबंधी वित्तीय निर्णयों में ग्रामीण महिलाओं को शामिल करना।
  6. सामूहिक संस्थाओं को सहयोग देना: महिला समूहों और उत्पादक संगठनों को मजबूत करना।
  7. मापनीय परिणामों की निगरानी करना: संसाधनों तक महिलाओं की पहुँच, आय पर उनके नियंत्रण और निर्णयों में उनके प्रभाव के आधार पर प्रगति का आकलन करना।

निष्कर्ष

अंतरराष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस 2026 लैंगिक समानता, सतत कृषि और पर्यावरण संरक्षण के बीच गहरे संबंध को रेखांकित करता है। ग्रामीण महिलाओं के योगदान को मान्यता देने के साथ उन्हें सुरक्षित अधिकार, पर्याप्त निवेश और निर्णय लेने की प्रभावी शक्ति प्रदान करना भी आवश्यक है।

प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न

निम्नलिखित में से कौन-सा तीन रियो अभिसमयों में शामिल नहीं है?

(a) जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र रूपरेखा अभिसमय
(b) जैव विविधता अभिसमय
(c) मरुस्थलीकरण से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र अभिसमय
(d) आर्द्रभूमियों पर रामसर अभिसमय 

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

“ग्रामीण महिलाओं का सशक्तीकरण सतत कृषि और पर्यावरणीय सहनशीलता के लिए आवश्यक है।” संसाधनों पर अधिकार, अवैतनिक देखभाल कार्य और निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी के संदर्भ में चर्चा कीजिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. अंतरराष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस कब मनाया जाता है?

यह दिवस प्रतिवर्ष 15 अक्टूबर को मनाया जाता है। इसे पहली बार वर्ष 2008 में मनाया गया था।

2. वर्ष 2026 के लिए यूएन वीमेन के वक्तव्य में किस थीम का उल्लेख किया गया है?

थीम है—“प्रकृति की देखभाल करती ग्रामीण महिला किसान” (Rural Women Farmers Caring for Mother Nature)।

3. पर्यावरण संरक्षण के लिए ग्रामीण महिलाएँ क्यों महत्त्वपूर्ण हैं?

वे बीज संरक्षण, जैव विविधता की रक्षा, जल प्रबंधन और अवक्रमित भूमि की पुनर्बहाली में योगदान देती हैं।

4. यूएन वीमेन के वक्तव्य की प्रमुख माँगें क्या हैं?

वक्तव्य में संसाधनों पर मजबूत अधिकार, समान आर्थिक अवसर, सामाजिक सुरक्षा, अवैतनिक देखभाल कार्य को मान्यता और निर्णयों में सार्थक भागीदारी की माँग की गई है।

5. महिला किसानों के लिए वर्ष 2026 विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण क्यों है?

संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2026 को ‘अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष’ घोषित किया है। यह कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं की पहचान और सशक्तीकरण को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है।

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