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NSAP का नाम बदलकर प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना: मंत्रिमंडल ने 2030–31 तक ₹53,428 करोड़ की मंजूरी दी

प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम, प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना, सामाजिक पेंशन, अनुच्छेद 41, राज्य के नीति निदेशक तत्त्व, दिव्यांगजन पेंशन।
मुख्य परीक्षा: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II – संवेदनशील वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ, सामाजिक न्याय, सरकारी नीतियाँ एवं हस्तक्षेप; सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III – समावेशी विकास एवं सार्वजनिक व्यय।
कीवर्ड्स: NSAP का नाम परिवर्तन 2026, प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना, ₹53,428 करोड़ का सामाजिक सहायता कार्यक्रम, वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, दिव्यांगजन पेंशन, सामाजिक सुरक्षा, पेंशन सुधार।

चर्चा में क्यों?

  • 14 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) को वित्त वर्ष 2026–27 से 2030–31 तक जारी रखने के लिए ₹53,428 करोड़ की मंजूरी दी।
  • इस कार्यक्रम का नाम बदलकर प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना किया जाएगा। साथ ही, तीन पेंशन योजनाओं के नामों से ‘इंदिरा गांधी’ उपसर्ग हटाया जाएगा।
  • इस निर्णय के तहत दिव्यांगजन पेंशन की पात्रता का दायरा बढ़ाया गया है और सहायता राशि में संशोधन किया गया है।

राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम क्या है?

  • 15 अगस्त 1995 को शुरू किया गया राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम वृद्धावस्था, विधवापन, दिव्यांगता और परिवार के कमाऊ सदस्य की मृत्यु जैसी परिस्थितियों से प्रभावित गरीब परिवारों को सहायता प्रदान करता है।
  • इसका संचालन ग्रामीण विकास मंत्रालय करता है। यह संविधान के अनुच्छेद 41 में निहित सामाजिक सहायता संबंधी उद्देश्यों को प्रतिबिंबित करता है।
  • कार्यक्रम के अंतर्गत केंद्रीय सहायता प्रदान की जाती है। राज्य सरकारें इसमें अतिरिक्त राशि जोड़ सकती हैं या अपनी योजनाओं के माध्यम से लाभार्थियों का दायरा बढ़ा सकती हैं। इसलिए लाभार्थियों को मिलने वाली कुल सहायता अलग-अलग राज्यों में भिन्न हो सकती है।

पाँच वर्षों के लिए वित्तीय मंजूरी

मानदंड

विवरण

स्वीकृत परिव्यय

₹53,428 करोड़

वित्तीय अवधि

2026–27 से 2030–31

अवधि

पाँच वर्ष

प्रमुख बदलाव

नाम परिवर्तन, दिव्यांगजन पेंशन के प्रावधानों में संशोधन और कार्यक्रम को जारी रखना

वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन एवं पारिवारिक लाभ

नाम परिवर्तन के अतिरिक्त मौजूदा स्वरूप में जारी रहेंगे

स्वीकृत राशि पाँच वर्षों के लिए कार्यक्रम का कुल परिव्यय है। यह न तो वार्षिक आवंटन है और न ही प्रत्येक लाभार्थी को सीधे मिलने वाली राशि।

कार्यक्रम और उप-योजनाओं के नए नाम

मौजूदा नाम

स्वीकृत नया नाम

राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम

प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना

प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना

प्रधानमंत्री विधवा पेंशन योजना

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांगता पेंशन योजना

प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना

राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना

प्रधानमंत्री परिवार लाभ योजना

इस प्रकार, नाम परिवर्तन में मुख्य कार्यक्रम और उसके अंतर्गत सूचीबद्ध उप-योजनाएँ, दोनों शामिल हैं।

दिव्यांगजन पेंशन में बदलाव

मानदंड

पूर्व प्रावधान

स्वीकृत नए प्रावधान

दिव्यांगता की न्यूनतम सीमा

80% या अधिक

घटाकर 40%; बेंचमार्क दिव्यांगता के अनुरूप

पात्रता की न्यूनतम आयु

18 वर्ष

जन्म से पात्रता; न्यूनतम आयु की शर्त समाप्त

80 वर्ष से कम आयु के पात्र लाभार्थियों के लिए सहायता

₹300 प्रतिमाह; पूर्व न्यूनतम आयु सीमा लागू थी

0–79 वर्ष के पात्र लाभार्थियों के लिए ₹375 प्रतिमाह

80 वर्ष एवं उससे अधिक आयु के लाभार्थियों के लिए सहायता

₹500 प्रतिमाह

₹625 प्रतिमाह

लाभार्थियों का दायरा: मौजूदा आँकड़े और नई घोषणा

ये आँकड़े अलग-अलग संदर्भों से संबंधित हैं, इसलिए इन्हें अलग-अलग समझना चाहिए:

  • केंद्रीय सहायता के अंतर्गत पूर्व निर्धारित सीमा: उपलब्ध समाचार रिपोर्ट के अनुसार, तीन पेंशन योजनाओं के अंतर्गत लाभार्थियों की अधिकतम सीमा 3.09 करोड़ थी।
  • राज्यों की सहायता से लाभान्वित लोग: रिपोर्ट में आर्थिक सर्वेक्षण 2024–25 के हवाले से बताया गया है कि राज्य सरकारें अतिरिक्त 5.86 करोड़ लाभार्थियों को सहायता प्रदान करती हैं। इस प्रकार संयुक्त संख्या 8.95 करोड़ होती है।
  • नई घोषणा: मंत्रिमंडल की विज्ञप्ति के अनुसार, इस मंजूरी से 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 3.20 करोड़ लोगों को लाभ मिलेगा।
    • नई घोषणा में दी गई संख्या को केंद्रीय और राज्यों के स्वतंत्र पेंशन कार्यक्रमों के सभी लाभार्थियों की संशोधित संयुक्त संख्या नहीं माना जाना चाहिए।

महत्त्व

  1. सामाजिक सहायता की निरंतरता: पाँच वर्षों की मंजूरी संवेदनशील परिवारों को सहायता जारी रखने के लिए नियोजन का आधार प्रदान करती है।
  2. अधिक दिव्यांगजनों का समावेशन: दिव्यांगता की न्यूनतम सीमा में कमी और जन्म से पात्रता का प्रावधान उन लोगों तक सहायता पहुँचाने में मदद कर सकता है, जो पहले दिव्यांगता के स्तर या आयु संबंधी शर्तों के कारण बाहर रह जाते थे।
  3. परिवारों की आय सुरक्षा: सामाजिक पेंशन लाभार्थियों को भोजन, परिवहन और स्वास्थ्य देखभाल जैसे बुनियादी खर्च पूरे करने में मदद कर सकती है। इससे रिश्तेदारों पर उनकी निर्भरता भी कम हो सकती है।
  4. गरिमा और स्वायत्तता में वृद्धि: नियमित सहायता वृद्धजनों, विधवाओं और दिव्यांगजनों की रोजमर्रा के वित्तीय निर्णय स्वयं लेने की क्षमता को मजबूत कर सकती है।

भारत के लिए प्रासंगिकता

  • वृद्धजन आबादी में वृद्धि: सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को वृद्धावस्था सहायता की बढ़ती माँग के अनुरूप विकसित करना आवश्यक है।
  • अनौपचारिक रोजगार: रोजगार से जुड़ी पेंशन से वंचित लोग पारिवारिक संसाधनों और सरकारी सहायता पर अधिक निर्भर रहते हैं।
  • महिलाओं की आर्थिक असुरक्षा: विधवा पेंशन आय संबंधी असुरक्षा का सामना कर रही महिलाओं को आर्थिक सहायता का स्वतंत्र स्रोत प्रदान कर सकती है।
  • समावेशी विकास: दिव्यांगजन सहायता अतिरिक्त जीवन-यापन लागत और सामाजिक-आर्थिक भागीदारी की बाधाओं को कम करने में मदद कर सकती है।
  • केंद्र–राज्य समन्वय: केंद्रीय सहायता और राज्यों की अतिरिक्त सहायता मिलकर सामाजिक पेंशन की पर्याप्तता और पहुँच निर्धारित करती हैं।

चुनौतियाँ

  1. महँगाई और अपर्याप्त लाभ: पेंशन राशि में बदलाव न होने पर बढ़ती कीमतें उसकी क्रय शक्ति कम कर देती हैं। किसी योजना को औपचारिक रूप से जारी रखना आवश्यक रूप से उसके लाभों का वास्तविक मूल्य बनाए रखना नहीं है।
  2. लाभार्थियों की अधिकतम सीमा: लाभार्थियों की निर्धारित अधिकतम सीमा के कारण पात्र आवेदक भी सहायता से वंचित रह सकते हैं। 
  3. जनसांख्यिकीय बदलाव: वित्तीय आवश्यकताएँ सहायता राशि और पात्र लोगों की संख्या, दोनों पर निर्भर करती हैं। पाँच वर्षीय ढाँचे में इन कारकों में होने वाले बदलावों के अनुरूप समायोजन की व्यवस्था आवश्यक है।
  4. राज्यों के बीच अंतर: राज्यों द्वारा दी जाने वाली अतिरिक्त राशि से सहायता बेहतर हो सकती है। हालाँकि, राज्यों की वित्तीय क्षमता और नीतिगत प्राथमिकताओं में अंतर के कारण विभिन्न क्षेत्रों में मिलने वाली सहायता असमान हो सकती है।

आगे की राह

  1. लाभों की समय-समय पर समीक्षा: महँगाई और जीवन-यापन की आवश्यक लागत के आधार पर पेंशन राशि का आकलन किया जाए।
  2. लाभार्थियों के अनुमान अद्यतन करना: सहायता से वंचित पात्र लोगों की पहचान के लिए नवीनतम जनसांख्यिकीय और पात्रता संबंधी जानकारी का उपयोग किया जाए।
  3. आवश्यकताओं के अनुरूप वित्तपोषण: पाँच वर्षीय अवधि के दौरान लाभार्थियों की संख्या में बदलाव के अनुसार व्यय संबंधी आवश्यकताओं की समीक्षा की जाए।
  4. योजना तक पहुँच बेहतर बनाना: आवेदन प्रक्रिया सरल की जाए और वृद्ध तथा दिव्यांग आवेदकों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए।
  5. समय पर भुगतान सुनिश्चित करना: भुगतान की निगरानी और शिकायत निवारण व्यवस्था को मजबूत किया जाए।
  6. कार्यान्वयन की स्पष्ट जानकारी देना: संशोधित पात्रता, सहायता राशि और लागू होने की तिथियों की जानकारी सरल एवं सुलभ भाषा में उपलब्ध कराई जाए।

निष्कर्ष

NSAP को जारी रखने और इसके पुनर्गठन का निर्णय सामाजिक सहायता को मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है, विशेषकर दिव्यांगजनों के लिए। इसकी प्रभावशीलता पर्याप्त सहायता राशि, समावेशी कवरेज और विश्वसनीय वितरण व्यवस्था पर निर्भर करेगी। नाम परिवर्तन के साथ लाभार्थियों की आर्थिक सुरक्षा और गरिमा में मापनीय सुधार भी सुनिश्चित किए जाने चाहिए।

प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न

राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम मुख्यतः भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के उद्देश्यों को प्रतिबिंबित करता है?

(a) अनुच्छेद 21A
(b) अनुच्छेद 32
(c) अनुच्छेद 41
(d) अनुच्छेद 280 

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

“सामाजिक पेंशन की प्रभावशीलता बजटीय निरंतरता के साथ-साथ सहायता राशि की पर्याप्तता और समावेशी कवरेज पर भी निर्भर करती है।” राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के हालिया पुनर्गठन के संदर्भ में चर्चा कीजिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. NSAP का नया नाम क्या है?

इसका स्वीकृत नया नाम प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना है।

2. मंत्रिमंडल ने कितनी धनराशि को मंजूरी दी है?

मंत्रिमंडल ने वित्त वर्ष 2026–27 से 2030–31 तक पाँच वर्षों के लिए ₹53,428 करोड़ की मंजूरी दी है।

3. क्या इस निर्णय के तहत वृद्धावस्था और विधवा पेंशन की राशि बढ़ाई गई है?

घोषणा के अनुसार, नाम परिवर्तन के अतिरिक्त ये योजनाएँ अपने मौजूदा स्वरूप में जारी रहेंगी। सहायता राशि में घोषित संशोधन दिव्यांगजन पेंशन से संबंधित हैं।

4. दिव्यांगजन पेंशन की पात्रता में प्रमुख बदलाव क्या है?

दिव्यांगता की न्यूनतम सीमा 80% से घटाकर 40% कर दी गई है। साथ ही, न्यूनतम आयु की शर्त हटाकर जन्म से पात्रता का प्रावधान किया गया है।

5. इस आवंटन की आलोचना क्यों हो रही है?

आलोचक सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह वित्तीय प्रावधान महँगाई, जनसांख्यिकीय बदलावों और मौजूदा लाभार्थी दायरे से बाहर रह गए पात्र लोगों की आवश्यकताओं को पर्याप्त रूप से ध्यान में रखता है।

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