संदर्भ
भारत और श्रीलंका अपनी साझा बौद्ध विरासत के संरक्षण के माध्यम से सांस्कृतिक सहयोग को मजबूत कर रहे हैं। इसी दिशा में श्रीलंका की राजधानी कोलंबो स्थित गंगारामया मंदिर में ‘सम्हिता’ परियोजना की शुरुआत की गई है। इस पहल का उद्देश्य प्राचीन पांडुलिपियों का संरक्षण करना और उनमें मौजूद ऐतिहासिक, धार्मिक तथा सांस्कृतिक ज्ञान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है।
सम्हिता (SAMHiTA) परियोजना के बारे में
- सम्हिता (साउथ एशियन मैन्युस्क्रिप्ट हिस्ट्रीज एंड टेक्स्टुअल आर्काइव) परियोजना एक ऐसी पहल है, जिसके तहत भारत और व्यापक दक्षिण एशियाई क्षेत्र की उन पांडुलिपियों का डिजिटल संग्रह और संबंधित डेटाबेस तैयार किया जाएगा, जो भारत के बाहर स्थित पुस्तकालयों, अभिलेखागारों तथा अन्य संस्थानों में संरक्षित हैं।
- इस परियोजना के माध्यम से विभिन्न संस्थानों में बिखरी हुई पांडुलिपियों से संबंधित जानकारी को एक साझा डिजिटल मंच पर एकत्रित किया जाएगा। इससे शोधकर्ताओं, इतिहासकारों और आम लोगों को इन ऐतिहासिक दस्तावेजों से जुड़ी जानकारी तक पहुंचने में मदद मिलेगी।
- संस्कृत में ‘सम्हिता’ शब्द का अर्थ संग्रह या संकलन होता है। परियोजना का नाम भी इसी अवधारणा पर आधारित है। इसका प्रमुख उद्देश्य अलग-अलग संस्थानों में उपलब्ध जानकारी को एक ऑनलाइन मंच पर एकीकृत करना है, ताकि इसे व्यापक स्तर पर उपयोग किया जा सके।
परियोजना के प्रमुख उद्देश्य:
सम्हिता परियोजना का मुख्य उद्देश्य भारत के बाहर संरक्षित भारतीय और दक्षिण एशियाई पांडुलिपियों से संबंधित जानकारी को एक साझा डिजिटल व्यवस्था में लाना है। इसके प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
- पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण: प्राचीन पांडुलिपियों से संबंधित जानकारी को डिजिटल स्वरूप में संरक्षित करना।
- साझा डिजिटल संग्रह तैयार करना: विभिन्न पुस्तकालयों और अभिलेखागारों में बिखरे दस्तावेजों की जानकारी को एक मंच पर उपलब्ध कराना।
- ऐतिहासिक ज्ञान का संरक्षण: पांडुलिपियों में मौजूद ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना।
- शोध को प्रोत्साहन: दक्षिण एशिया के बौद्धिक इतिहास, साहित्य और परंपराओं के अध्ययन को आसान बनाना।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना: भारत और अन्य दक्षिण एशियाई देशों के संस्थानों के बीच सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करना।
PANDiT डेटाबेस से जुड़ी होगी जानकारी:
- सम्हिता परियोजना के अंतर्गत एकत्र की गई जानकारी को प्रोसोफोग्राफिकल डेटाबेस ऑफ इंडिक टेक्स्ट्स एंड रिकॉर्ड्स (पैंडिट) पर साझा किया जाएगा। यह दक्षिण एशिया के बौद्धिक इतिहास से संबंधित एक डेटाबेस है।
- इस मंच के माध्यम से विभिन्न संस्थानों में उपलब्ध पांडुलिपियों और उनसे संबंधित अभिलेखों की जानकारी को व्यवस्थित रूप से एकत्रित करने में मदद मिलेगी। इससे शोधकर्ताओं को ऐतिहासिक ग्रंथों, बौद्धिक परंपराओं और सांस्कृतिक संबंधों का अध्ययन करने के लिए उपयोगी सामग्री प्राप्त हो सकती है।
परियोजना का संचालन और सहयोग:
- सम्हिता परियोजना को नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर द्वारा संचालित किया जा रहा है। इसे भारत सरकार की अनुदान सहायता प्राप्त है और विदेश मंत्रालय इसका समर्थन कर रहा है।
- यह पहल भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ दक्षिण एशिया के देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सम्हिता परियोजना का महत्व:
- इस परियोजना की एक प्रमुख विशेषता यह है कि यह भारत और दक्षिण एशिया के बाहर स्थित विभिन्न संस्थानों के पांडुलिपि संग्रहों को एक साझा मंच पर लाने का पहला प्रयास है।
- वस्तुतः प्राचीन पांडुलिपियां केवल साहित्यिक दस्तावेज नहीं हैं, बल्कि वे किसी क्षेत्र के इतिहास, धर्म, दर्शन, भाषा और सामाजिक परंपराओं की महत्वपूर्ण जानकारी भी प्रदान करती हैं। समय के साथ इन दस्तावेजों के नष्ट होने या उनकी जानकारी तक पहुंच सीमित होने का खतरा रहता है। ऐसे में डिजिटल संग्रह तैयार करने से इनसे संबंधित जानकारी को सुरक्षित रखने और अधिक लोगों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
- भारत और श्रीलंका के बीच बौद्ध धर्म तथा साझा सांस्कृतिक परंपराओं के ऐतिहासिक संबंध रहे हैं। सम्हिता परियोजना जैसी पहल इन संबंधों को नई मजबूती देने के साथ-साथ दक्षिण एशिया की समृद्ध बौद्धिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भी योगदान दे सकती है।