चर्चा में क्यों?
- एनसीईआरटी की नई कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक ‘Understanding Society and Beyond – Part 2’ में सेंगोल (Sengol) का उल्लेख किया गया है।
- पुस्तक में कहा गया है कि 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता के अवसर पर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को तमिलनाडु के शैव परंपरा से जुड़े अधीनम संतों द्वारा सेंगोल प्रदान किया गया था।
- पुस्तक में सेंगोल को न्यायपूर्ण शासन और सुशासन का सांस्कृतिक प्रतीक बताया गया है।
- वर्ष -1947 में सेंगोल को औपचारिक रूप से ब्रिटिश सत्ता से भारतीय सत्ता के ‘हस्तांतरण का प्रतीक’ माना गया था या नहीं, इस पर इतिहासकारों के बीच मतभेद हैं।

सेंगोल क्या है?
- सेंगोल तमिल परंपरा से जुड़ा एक राजदंड है। ‘सेंगोल’ शब्द तमिल शब्द ‘सेम्मई’ से संबंधित माना जाता है, जिसका अर्थ धर्मनिष्ठा, न्याय और निष्पक्षता से है।
- तमिल राजनीतिक एवं साहित्यिक परंपरा में सेंगोल केवल सत्ता का प्रतीक नहीं, बल्कि शासक के न्यायपूर्ण शासन और प्रजा के प्रति उत्तरदायित्व का प्रतीक माना जाता रहा है।
- इसकी अवधारणा का संबंध ‘कोडुंगोल’ से भी जोड़ा जाता है, जिसका अर्थ अन्यायपूर्ण या निरंकुश शासन से है।
तमिल परंपरा में सेंगोल का महत्व
- तमिल साहित्य में न्यायपूर्ण शासन की अवधारणा को सेंगोल से जोड़ा गया है।
- तिरुक्कुरल में ‘सेन्गोनमै’ अर्थात Right Sceptre नामक अध्याय मिलता है, जिसमें शासक द्वारा न्यायपूर्ण शासन करने के महत्व पर बल दिया गया है।
- इसी प्रकार शिलप्पदिकारम् जैसे तमिल साहित्यिक ग्रंथों में भी राजा के न्याय और शासन की अवधारणा का उल्लेख मिलता है।
- इस प्रकार तमिल परंपरा में सेंगोल को एक भौतिक राजदंड के साथ-साथ न्यायपूर्ण शासन के आदर्श के रूप में भी देखा गया है।
1947 में नेहरू को सेंगोल दिए जाने की घटना
- 14 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता की पूर्व संध्या पर तिरुवावडुतुरै अधीनम से जुड़े प्रतिनिधियों ने जवाहरलाल नेहरू को एक सेंगोल प्रदान किया था।
- उपलब्ध विवरणों के अनुसार, यह लगभग पाँच फीट लंबा, सोने की परत से युक्त चाँदी का राजदंड था, जिसके शीर्ष पर नंदी की आकृति बनी थी।
- अधीनम से जुड़े प्रतिनिधियों ने इसे धार्मिक अनुष्ठानों और तेवरम के भजनों के साथ नेहरू को सौंपा था।
- इस घटना को लेकर यह भी कहा जाता है कि सी. राजगोपालाचारी (राजाजी) ने इस प्रकार के प्रतीकात्मक समारोह का सुझाव दिया था।
- 1947 में इसे औपचारिक रूप से ब्रिटिश शासन से भारतीय शासन में सत्ता हस्तांतरण का प्रतीक माना गया था या नहीं, इस दावे के समर्थन में उपलब्ध दस्तावेजी प्रमाणों की व्याख्या को लेकर विवाद है।
‘सत्ता हस्तांतरण’ के दावे पर विवाद
- केंद्र सरकार की ओर से सेंगोल को 1947 में सत्ता हस्तांतरण का प्रतीक बताया गया है। संस्कृति मंत्रालय से जुड़े विवरणों में भी इसे औपनिवेशिक शासन से स्वतंत्र भारतीय राज्य को सत्ता हस्तांतरण के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
- दूसरी ओर, कुछ इतिहासकारों ने इस दावे पर सवाल उठाए हैं।
- इतिहासकार राजमोहन गांधी ने कहा है कि जवाहरलाल नेहरू या सी. राजगोपालाचारी के निजी पत्रों, दस्तावेजों और आत्मकथात्मक सामग्री में सेंगोल को सत्ता हस्तांतरण के औपचारिक प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किए जाने का स्पष्ट प्रमाण नहीं मिलता।
- इसी प्रकार, उपलब्ध समकालीन समाचार रिपोर्टों में सेंगोल को नेहरू को सौंपे जाने की घटना का उल्लेख मिलता है, लेकिन उनमें इसे ब्रिटिश सत्ता से भारतीय सत्ता के औपचारिक हस्तांतरण का प्रतीक बताए जाने का स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता।
- इसलिए दो बातों को अलग-अलग समझना आवश्यक है—
- पहला, 1947 में नेहरू को सेंगोल प्रदान किए जाने की घटना के प्रमाण मिलते हैं।
- दूसरा, उस घटना को उस समय औपचारिक रूप से ‘सत्ता हस्तांतरण’ का प्रतीक माना गया था या नहीं, इस पर ऐतिहासिक बहस है।
2023 में नए संसद भवन में सेंगोल की स्थापना
- 28 मई 2023 को नए संसद भवन के उद्घाटन के अवसर पर सेंगोल को संसद भवन में स्थापित किया गया।
- केंद्र सरकार ने इसे भारतीय परंपरा में न्यायपूर्ण शासन, उत्तरदायित्व और सत्ता के नैतिक प्रयोग के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया।
- इससे सेंगोल एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना और इसके ऐतिहासिक महत्व तथा 1947 की घटना की व्याख्या को लेकर बहस शुरू हुई।
NCERT पाठ्यपुस्तक में सेंगोल का उल्लेख
- नई कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में सेंगोल को शासन और सुशासन की सांस्कृतिक अवधारणा से जोड़ा गया है।
- पुस्तक के अनुसार, सेंगोल का प्रयोग न्यायपूर्ण शासन के प्रतीक के रूप में एक हजार वर्ष से अधिक पुरानी चोल परंपरा से जुड़ा है। इसमें 1947 में नेहरू को सेंगोल दिए जाने और 2023 में नए संसद भवन में इसकी स्थापना का भी उल्लेख है।
- यह उल्लेख इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पाठ्यपुस्तक में सेंगोल से संबंधित उस ऐतिहासिक व्याख्या को स्थान दिया गया है, जिस पर कुछ इतिहासकारों ने प्रश्न उठाए हैं।
राष्ट्रीय आदर्श वाक्य और भारतीय परंपरा
- इसी अध्याय में NCERT ने भारत के राष्ट्रीय आदर्श वाक्य ‘सत्यमेव जयते’ को मुंडक उपनिषद से जोड़ा है।
- ‘सत्यमेव जयते’ का अर्थ है-सत्य की ही विजय होती है।
- पुस्तक में सर्वोच्च न्यायालय के आदर्श वाक्य ‘यतो धर्मस्ततो जयः’ का भी उल्लेख किया गया है, जिसका अर्थ है-जहाँ धर्म/न्याय है, वहीं विजय है। इसे महाभारत की परंपरा से जोड़ा गया है।
राम राज्य की अवधारणा
- पुस्तक में महात्मा गांधी द्वारा प्रयुक्त ‘राम राज्य’ की अवधारणा का भी उल्लेख किया गया है।
- इसे नैतिकता, पारदर्शिता, करुणा, जनकल्याण और उत्तरदायी शासन जैसी विशेषताओं से जोड़ा गया है।
- इसके संदर्भ में रामायण और रामचरितमानस को भारतीय परंपरा में आदर्श शासन और सामूहिक जीवन की अवधारणाओं के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
शासन को ‘पवित्र जिम्मेदारी’ के रूप में देखना
- NCERT की पुस्तक के अनुसार, वैदिक काल से लेकर रामायण और महाभारत तक भारतीय परंपराओं में शासन को केवल सत्ता प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि ‘पवित्र जिम्मेदारी’ के रूप में देखा गया।
- पुस्तक में यह भी कहा गया है कि औपनिवेशिक शक्तियों ने भारतीय समाजों पर अपने शासन मॉडल लागू किए और स्वतंत्रता के बाद भी कई औपनिवेशिक संस्थाएँ बनी रहीं।
राजाओं और देवी-देवताओं से जुड़ी परंपराएँ
पुस्तक के ‘Resistance and Resilience’ अध्याय में ऐसी परंपरागत मान्यताओं का भी उल्लेख है, जिनके अनुसार कुछ राजाओं को आक्रमणों का प्रतिरोध करने के लिए देवी-देवताओं से तलवार प्राप्त हुई थी।
इस संदर्भ में-
- बस्तर के शासक अन्नमाराजा को मानिक्यदेवी/दंतेश्वरी से तलवार मिलने की मान्यता का उल्लेख है।
- विजयनगर के कुमार कम्पण से जुड़ी परंपरा में देवी द्वारा दी गई तलवार का उल्लेख मिलता है।
- छत्रपति शिवाजी महाराज के संदर्भ में भी तुलजा भवानी से तलवार प्राप्त करने की पारंपरिक मान्यता का उल्लेख किया गया है।
इन घटनाओं को पाठ्यपुस्तक में परंपरागत मान्यता के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
निष्कर्ष
- सेंगोल भारतीय इतिहास, तमिल सांस्कृतिक परंपरा और आधुनिक शासन की अवधारणाओं के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी प्रस्तुत करता है।
- इसके माध्यम से न्यायपूर्ण शासन, शासक की जवाबदेही और सत्ता के नैतिक प्रयोग जैसे विचार सामने आते हैं।
FAQs
1. सेंगोल क्या है?
उत्तर :- सेंगोल तमिल परंपरा से जुड़ा एक राजदंड है। इसे न्याय, धर्मनिष्ठ शासन और शासक की जनता के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक माना जाता है।
2. ‘सेंगोल’ शब्द का क्या अर्थ है?
उत्तर :- ‘सेंगोल’ शब्द तमिल अवधारणा ‘सेम्मई’ (Semmai) से संबंधित माना जाता है, जिसका अर्थ धर्मनिष्ठा, न्याय और निष्पक्षता है।
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