एशियाई खेल, जिन्हें आमतौर पर एशियाड के नाम से जाना जाता है, एशिया की सबसे बड़ी बहु-खेल प्रतियोगिता है। हर चार साल में आयोजित होने वाले इन खेलों का आयोजन एशिया ओलंपिक परिषद (OCA) करती है। वर्तमान में इसमें 45 देश और क्षेत्र हिस्सा लेते हैं।
एशियाई खेल 2026 का विवरण
20वें एशियाई खेलों का आयोजन 19 सितंबर से 4 अक्टूबर 2026 तक जापान के आइची-नागोया में हुआ। इन खेलों का आधिकारिक नारा “एक एशिया की कल्पना” था। जापान इससे पहले 1958 में टोक्यो और 1994 में हिरोशिमा में एशियाई खेलों की मेजबानी कर चुका है। इस तरह आइची-नागोया आयोजन के साथ जापान तीसरी बार मेजबान बना।
16 दिनों तक चले इस खेल महाकुंभ में 43 खेलों की 71 विधाओं में कुल 469 स्पर्धाएं हुईं, जिनमें 1,407 पदकों के लिए खिलाड़ियों ने प्रतिस्पर्धा की।
एशियाई खेलों की शुरुआत और भारत की भूमिका
एशियाई खेलों से भारत का जुड़ाव शुरुआत से ही रहा है। पहले एशियाई खेल 1951 में नई दिल्ली में आयोजित हुए थे। इसका उद्देश्य एशियाई देशों के बीच एकता, सहयोग और मित्रता को बढ़ावा देना था।
एशियाई खेलों की अवधारणा भारत के IOC सदस्य प्रो. जी.डी. सोंधी से जुड़ी रही है। 1947 में नई दिल्ली में आयोजित एशियाई देशों के सम्मेलन में इसके आयोजन का विचार सामने आया था।
मार्च 1951 में आयोजित पहले खेलों में 11 देशों के 489 खिलाड़ियों ने छह खेलों में हिस्सा लिया। भारत पदक तालिका में जापान के बाद दूसरे स्थान पर रहा। इसके बाद से एशियाई खेल एशियाई देशों के बीच खेल और सहयोग का महत्वपूर्ण मंच बन गए।
आइची-नागोया 2026 में भारत का दल
भारत ने 2026 एशियाई खेलों में 501 एथलीटों का दल उतारा, जिसने 36 खेल विधाओं में हिस्सा लिया। इनमें 300 से अधिक खिलाड़ी पहली बार एशियाई खेलों में शामिल हुए।
जापान रवाना होने से पहले 8 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में भारतीय दल का विदाई समारोह आयोजित किया गया। केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, IOA अध्यक्ष डॉ. पी.टी. उषा और शेफ डी मिशन सहदेव यादव की मौजूदगी में दल की आधिकारिक जर्सी का अनावरण किया गया।
19 सितंबर को उद्घाटन समारोह में ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर और कबड्डी खिलाड़ी पवन सेहरावत ने भारतीय दल की परेड का नेतृत्व किया।
भारत ने जीते 21 स्वर्ण समेत 85 पदक
आइची-नागोया एशियाई खेलों में भारत का प्रदर्शन शानदार रहा। भारतीय दल ने कुल 85 पदक जीते, जिनमें 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य पदक शामिल रहे।
स्वर्ण पदकों के मामले में तीरंदाजी भारत का सबसे सफल खेल रहा, जहां खिलाड़ियों ने पांच स्वर्ण पदक जीते। शूटिंग और बॉक्सिंग ने तीन-तीन स्वर्ण पदकों के साथ भारत के प्रदर्शन को मजबूती दी।
टीम खेलों में भी भारत का दबदबा देखने को मिला। क्रिकेट, हॉकी और कबड्डी में भारत ने दो-दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए।
पुरुष क्रिकेट टीम ने फाइनल में पाकिस्तान को 19 रन से हराकर स्वर्ण पदक जीता। वहीं पुरुष हॉकी टीम ने मलेशिया को 5-1 से हराकर अपना महाद्वीपीय खिताब बरकरार रखा।
कबड्डी में भारत ने पुरुष और महिला दोनों वर्गों में स्वर्ण पदक जीतकर दोहरी सफलता हासिल की।
कुश्ती से भारत को दो, जबकि एथलेटिक्स और गोल्फ से एक-एक स्वर्ण पदक मिला।
एशियाई खेल 2026 में भारत की पदक तालिका
एशियाई पैरा खेलों में भी भारत की नजरें
एशियाई खेलों के बाद जापान में 18 से 24 अक्टूबर 2026 तक आइची-नागोया में 5वें एशियाई पैरा खेल आयोजित होंगे। जापान पहली बार इन खेलों की मेजबानी कर रहा है। इसमें 45 राष्ट्रीय पैरालंपिक समितियों के करीब 3,000 खिलाड़ियों के 18 पैरा खेलों में हिस्सा लेने की उम्मीद है।
भारत की यह एशियाई पैरा खेलों में पांचवीं भागीदारी होगी। हांग्जो 2022 में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 111 पदक, जिनमें 29 स्वर्ण शामिल थे, जीते थे। इनमें महिला खिलाड़ियों का योगदान 40 पदकों का रहा।
जमीनी स्तर से वैश्विक मंच तक भारत की खेल नीति
भारत में खेल विकास पर अब अंतरराष्ट्रीय पदकों के साथ-साथ जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान और उन्हें तैयार करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
खेलो भारत नीति:
सरकार ने 1 जुलाई 2025 को राष्ट्रीय खेल नीति—खेलो भारत नीति शुरू की। इसका उद्देश्य एक मजबूत, समावेशी और प्रदर्शन आधारित खेल व्यवस्था तैयार करना है। नीति के तहत ग्रामीण-शहरी अंतर कम करने, खेल सुविधाओं का विस्तार करने और महिलाओं, आदिवासी समुदायों तथा दिव्यांग खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया है। इसका एक प्रमुख लक्ष्य 2036 ओलंपिक के लिए भारत की तैयारी मजबूत करना भी है।
खेलों के लिए बढ़ा बजट:
केंद्रीय बजट 2026-27 में युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय को 4,479.88 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। वहीं 2026-27 से 2030-31 के लिए संशोधित खेलो इंडिया योजना को मंजूरी दी गई है, जिसके तहत राष्ट्रीय खेल संघों सहित कुल 36,441 करोड़ रुपये का परिव्यय प्रस्तावित है।
खेलो इंडिया के लिए 2026-27 में 924.35 करोड़ रुपये और खेल सामग्री निर्माण के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान:
जुलाई 2026 तक देश में 1,067 खेलो इंडिया केंद्र स्थापित किए जा चुके थे। 3,176 करोड़ रुपये की 349 नई खेल बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जबकि 2,745 खेलो इंडिया एथलीटों को प्रशिक्षण, उपकरण, चिकित्सा सुविधाएं और आर्थिक सहायता दी जा रही है।
KIRTI पहल के तहत 9 से 18 वर्ष के बच्चों में खेल प्रतिभाओं की पहचान की जा रही है। इसके 174 प्रतिभा मूल्यांकन केंद्र डेटा आधारित और योग्यता आधारित चयन पर काम करते हैं।
TOPS से शीर्ष खिलाड़ियों को सहायता:
टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) के जरिए शीर्ष खिलाड़ियों को विदेशी प्रशिक्षण, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं, कोचिंग कैंप और विशेष उपकरणों के लिए सहायता दी जाती है। खिलाड़ियों को 50,000 रुपये और विकास श्रेणी के जूनियर खिलाड़ियों को 25,000 रुपये का मासिक वजीफा दिया जाता है।
अप्रैल 2026 तक TOPS के तहत 55 कोर, 62 पैरा कोर और 140 विकास श्रेणी के एथलीटों को समर्थन दिया जा रहा था।
खेल शिक्षा और फिटनेस पर जोर:
2018 में इंफाल में स्थापित राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय खेल विज्ञान, प्रौद्योगिकी, प्रबंधन और कोचिंग के क्षेत्र में शिक्षा प्रदान करता है। वहीं फिट इंडिया मूवमेंट के जरिए देश में फिटनेस को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
आइची-नागोया से लॉस एंजिल्स 2028 तक
आइची-नागोया 2026 में भारत का प्रदर्शन लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक और 2036 की दीर्घकालिक खेल तैयारियों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है। भारतीय दल में 300 से अधिक खिलाड़ियों का एशियाई खेलों में पदार्पण देश में उभरती खेल प्रतिभाओं के बढ़ते आधार को दर्शाता है।
खेल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 36,000 करोड़ रुपये से अधिक के दीर्घकालिक निवेश की योजना भी तैयार की गई है। इसका उद्देश्य देश में प्रतिभाओं को बेहतर सुविधाएं और प्रशिक्षण उपलब्ध कराकर भारत को वैश्विक खेल मंच पर और मजबूत बनाना है।