AM Green–JERA समझौता: भारत से जापान को होगी हरित अमोनिया की आपूर्ति

चर्चा में क्यों?

  • भारत की कंपनी AM Green Ammonia (India) Private Ltd और जापान की ऊर्जा कंपनी JERA ने भारत से जापान को हरित अमोनिया की दीर्घकालिक आपूर्ति के लिए बाध्यकारी समझौता किया है। 
  • इसका उद्देश्य समुद्री परिवहन में कार्बन उत्सर्जन कम करना और जापान में कम-कार्बन अमोनिया के उपयोग के लिए आपूर्ति एवं वितरण व्यवस्था विकसित करना है। 
  • यह समझौता भारत के स्वच्छ ऊर्जा निर्यात और हरित हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था के विकास की दिशा में महत्त्वपूर्ण है।

समझौते के प्रमुख तथ्य

  • समझौते में शामिल कंपनियाँ: AM Green Ammonia (India) Private Ltd और जापान की JERA Co. Inc.
  • आपूर्ति की मात्रा: प्रतिवर्ष लगभग 70,000 टन हरित अमोनिया।
  • समझौते की अवधि: पाँच वर्ष, जिसे अतिरिक्त आपूर्ति के लिए बढ़ाया जा सकता है।
  • उत्पादन स्थल: आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में AM Green की प्रस्तावित उत्पादन इकाई।
  • संभावित परिचालन वर्ष: 2028–2029।
  • प्रमुख उपयोग: अमोनिया से चलने वाले जहाजों, विशेषकर वाहन परिवहन करने वाले जहाजों को ईंधन उपलब्ध कराना।
  • जापान में आपूर्ति व्यवस्था: JERA, आइची प्रांत में अपने हेकिनान ताप विद्युत संयंत्र के निकट प्राप्ति, भंडारण और वितरण सुविधाओं के विकास के माध्यम से इस आपूर्ति शृंखला को समर्थन देगी।

इस परियोजना को विश्व स्तर पर हरित अमोनिया के बड़े पैमाने पर समुद्री ईंधन के रूप में उपयोग की शुरुआती पहलों में से एक बताया गया है।

हरित अमोनिया क्या है?

  • हरित अमोनिया (Green Ammonia) अमोनिया (NH3)) का वह रूप है, जिसके उत्पादन में नवीकरणीय ऊर्जा से निर्मित हरित हाइड्रोजन का उपयोग किया जाता है। 
  • इसमें हाइड्रोजन को वायु से प्राप्त नाइट्रोजन के साथ मिलाकर अमोनिया बनाया जाता है।
  • हरित अमोनिया का उपयोग उर्वरक निर्माण, रासायनिक उद्योग, ऊर्जा भंडारण और संभावित रूप से समुद्री परिवहन में स्वच्छ ईंधन के रूप में किया जा सकता है। 
  • यह हाइड्रोजन की तुलना में भंडारण और परिवहन के लिए अधिक सुविधाजनक भी हो सकता है।

हरित अमोनिया का उत्पादन कैसे होता है?

हरित अमोनिया (NH3) का उत्पादन नवीकरणीय ऊर्जा से प्राप्त हरित हाइड्रोजन और वायु से अलग की गई नाइट्रोजन को मिलाकर किया जाता है।

  1. नवीकरणीय ऊर्जा: सौर एवं पवन ऊर्जा से बिजली प्राप्त की जाती है।
  2. जल का विद्युत अपघटन: बिजली की सहायता से पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित किया जाता है। इस प्रक्रिया में क्षारीय विद्युत अपघटन (Alkaline Electrolysis) तकनीक का उपयोग किया जा सकता है।
  3. नाइट्रोजन का पृथक्करण: वायुमंडलीय वायु से नाइट्रोजन को अलग किया जाता है।
  4. अमोनिया का निर्माण: हाइड्रोजन और नाइट्रोजन को नियंत्रित तापमान एवं दबाव में हैबर-बॉश प्रक्रिया (Haber–Bosch Process) द्वारा अभिक्रिया कराकर अमोनिया बनाया जाता है।
  5. भंडारण एवं परिवहन: उत्पादित हरित अमोनिया का उपयोग उर्वरक निर्माण, रासायनिक उद्योग और संभावित रूप से समुद्री ईंधन के रूप में किया जाता है।

AM Green की काकीनाडा परियोजना में क्षारीय विद्युत अपघटन तकनीक (Alkaline Electrolysis) और पंप्ड-हाइड्रो ऊर्जा भंडारण का उपयोग किया जाएगा। इससे नवीकरणीय ऊर्जा की उपलब्धता में उतार-चढ़ाव के बावजूद उत्पादन को अधिक स्थिर बनाए रखने में मदद मिल सकती है। 

भारत के लिए समझौते का महत्त्व

  1. स्वच्छ ऊर्जा निर्यात को बढ़ावा: भारत हरित अमोनिया जैसे कम-कार्बन ईंधनों का अंतरराष्ट्रीय आपूर्तिकर्ता बन सकता है। इससे ऊर्जा क्षेत्र में नए निर्यात अवसर विकसित होंगे।
  2. राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन को समर्थन: भारत के हरित हाइड्रोजन और उससे बनने वाले उत्पादों के उत्पादन, उपयोग तथा निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।
  3. ऊर्जा सुरक्षा: जापान को नवीकरणीय ऊर्जा आधारित अमोनिया का एक अतिरिक्त आपूर्ति स्रोत मिलेगा। भारत के लिए भी स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में दीर्घकालिक व्यापारिक साझेदारी के अवसर बढ़ेंगे।
  4. समुद्री परिवहन का कार्बन उत्सर्जन कम करना: अमोनिया से चलने वाले जहाज पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों का विकल्प बन सकते हैं। हालांकि, वास्तविक पर्यावरणीय लाभ उत्पादन की प्रक्रिया, जहाज की तकनीक और उत्सर्जन नियंत्रण पर निर्भर करेंगे।
  5. औद्योगिक विकास एवं रोजगार: हरित हाइड्रोजन, विद्युत अपघटक, नवीकरणीय ऊर्जा, भंडारण और बंदरगाह आधारित अवसंरचना में निवेश को प्रोत्साहन मिल सकता है।

भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन से संबंध

  • भारत सरकार ने जनवरी 2023 में राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन को मंजूरी दी थी।
  • इसका उद्देश्य भारत को हरित हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है।
  • मिशन के प्रमुख उद्देश्यों में घरेलू इलेक्ट्रोलाइजर निर्माण को प्रोत्साहित करना, हरित हाइड्रोजन उत्पादन बढ़ाना, जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करना और कठिन-से-कार्बन-मुक्त किए जाने वाले क्षेत्रों में उत्सर्जन घटाना शामिल है।
  • हरित अमोनिया इस मिशन का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि इसके माध्यम से हरित हाइड्रोजन को ऐसे उत्पाद में बदला जा सकता है जिसका उपयोग उर्वरक, रसायन और समुद्री परिवहन जैसे क्षेत्रों में किया जा सके।

प्रमुख चुनौतियाँ

  • उच्च उत्पादन लागत: हरित हाइड्रोजन और हरित अमोनिया का उत्पादन अभी पारंपरिक जीवाश्म ईंधन आधारित विकल्पों की तुलना में महँगा हो सकता है।
  • ऊर्जा की निरंतर उपलब्धता: विद्युत अपघटन के लिए बड़ी मात्रा में स्वच्छ बिजली की आवश्यकता होती है।
  • अवसंरचना की कमी: अमोनिया के सुरक्षित भंडारण, परिवहन, जहाजों में ईंधन भरने और वितरण के लिए विशेष सुविधाएँ विकसित करनी होंगी।
  • सुरक्षा संबंधी जोखिम: अमोनिया विषैला और संक्षारक पदार्थ है। इसके रिसाव से मानव स्वास्थ्य तथा पर्यावरण को नुकसान पहुँच सकता है।
  • जहाजों से होने वाला उत्सर्जन: अमोनिया के दहन से नाइट्रोजन ऑक्साइड और नाइट्रोजन-आधारित अन्य प्रदूषक उत्पन्न हो सकते हैं। इसलिए उचित दहन तकनीक और उत्सर्जन नियंत्रण आवश्यक हैं।
  • अंतरराष्ट्रीय मानक: निर्यात बाजारों में हरित अमोनिया की प्रमाणन व्यवस्था, कार्बन तीव्रता और जीवन-चक्र उत्सर्जन से संबंधित मानकों का अनुपालन जरूरी होगा।

आगे की राह

  • भारत को नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने, इलेक्ट्रोलाइजर निर्माण में घरेलू क्षमता विकसित करने और हरित अमोनिया के लिए स्पष्ट प्रमाणन मानक अपनाने पर ध्यान देना चाहिए। 
  • जापान जैसे देशों के साथ दीर्घकालिक आपूर्ति समझौते, बंदरगाह अवसंरचना का विकास, सुरक्षित बंकरिंग प्रणाली और समुद्री ईंधन तकनीक में अनुसंधान को बढ़ावा देना आवश्यक है।
  • परियोजनाओं का मूल्यांकन केवल उत्पादन क्षमता के आधार पर नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवन-चक्र में होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन, जल उपयोग और पर्यावरणीय प्रभावों के आधार पर भी किया जाना चाहिए।

निष्कर्ष

  • AM Green और JERA के बीच समझौता भारत के स्वच्छ ऊर्जा निर्यात तथा जापान के कम-कार्बन ईंधन विकल्पों के विकास की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। 
  • यदि उत्पादन, भंडारण, परिवहन और उपयोग की पूरी शृंखला में पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाता है, तो हरित अमोनिया भारत की ऊर्जा संक्रमण रणनीति और वैश्विक समुद्री परिवहन के डीकार्बनीकरण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

MCQ

प्रश्न 1. हरित अमोनिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. इसके उत्पादन में नवीकरणीय ऊर्जा से निर्मित हाइड्रोजन का उपयोग किया जा सकता है।
  2. इसका रासायनिक सूत्र (NH3) है।
  3. इसका उपयोग समुद्री परिवहन में संभावित वैकल्पिक ईंधन के रूप में किया जा सकता है।

उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

(A) केवल 1 और 2

(B) केवल 2 और 3

(C) केवल 1 और 3

(D) 1, 2 और 3

« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT