संदर्भ
आधुनिक समय में ऑनलाइन सदस्यता लेना जितना आसान है, उसे रद्द करना कई बार उतना ही मुश्किल हो जाता है। जिम, मोबाइल प्लान, मनोरंजन सेवाओं और ऑनलाइन खरीदारी की सदस्यताओं में ग्राहकों को अक्सर ऐसी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है, जिनमें उनका समय और पैसा दोनों खर्च होते हैं। इसी समस्या से निपटने के लिए न्यूयॉर्क शहर ने ‘क्लिक टू कैंसल’ नियम लागू करने की पहल की है। इसका उद्देश्य ग्राहकों को सदस्यता शुरू करने जितनी ही आसानी से उसे रद्द करने का विकल्प देना है।
क्या है ‘क्लिक टू कैंसल’ नियम?
- न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी ने 1 अक्टूबर को इस नियम को लागू करने की घोषणा की। इसके तहत कंपनियों को सदस्यता रद्द करने की प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और ग्राहक-अनुकूल बनानी होगी।
- ममदानी ने कहा कि किसी ऐसी सेवा का भुगतान बंद करने के लिए, जिसे ग्राहक नहीं चाहता, उसे 45 मिनट तक फोन पर इंतजार नहीं करना चाहिए। यदि कंपनी एक क्लिक में पैसा ले सकती है, तो ग्राहक को भी एक क्लिक में सदस्यता रद्द करने की सुविधा मिलनी चाहिए।
- यह नियम उन कंपनियों पर लागू होता है, जो स्वचालित नवीनीकरण या निरंतर सेवा के तहत सदस्यताएं उपलब्ध कराती हैं। हालांकि, सरकारी संस्थाओं से जुड़े कुछ कारोबारों और चुनिंदा लाइसेंस प्राप्त वित्तीय संस्थानों को छूट दी गई है।
सदस्यता रद्द करना क्यों बन गया है चुनौती?
- कई कंपनियां डिजिटल माध्यमों पर ऐसी प्रक्रियाएं अपनाती हैं, जिनसे ग्राहक आसानी से सदस्यता रद्द नहीं कर पाते। इसे डिजिटल ‘डार्क पैटर्न’ कहा जाता है। इसमें रद्द करने का विकल्प छिपाना, कई पन्नों और मेनू से गुजरने के लिए मजबूर करना या फोन और ईमेल के जरिए लंबी प्रक्रिया पूरी करवाना शामिल है।
- कई मामलों में मुफ्त परीक्षण अवधि समाप्त होने के बाद ग्राहक की सदस्यता सशुल्क सेवा में बदल जाती है। यदि इसकी जानकारी स्पष्ट रूप से नहीं दी जाती, तो ग्राहक अनजाने में भुगतान करते रहते हैं।
- इसका सबसे अधिक असर बुजुर्गों, कम साक्षरता वाले लोगों और व्यस्त उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। कुछ मामलों में सदस्यता का भुगतान रोकने के लिए ग्राहकों को अपना क्रेडिट कार्ड तक बंद करवाना पड़ता है।
- न्यूयॉर्क शहर के मेयर कार्यालय के एक अनुमान के अनुसार, इस नियम से शहर के निवासियों को हर साल 16.25 करोड़ डॉलर तक की बचत हो सकती है।
नियम का उल्लंघन होना
- न्यूयॉर्क शहर का उपभोक्ता एवं श्रमिक संरक्षण विभाग इस नियम को लागू कराने के लिए अधिकृत है। नियम के अनुसार, सदस्यता रद्द करने का तरीका उसी माध्यम से उपलब्ध होना चाहिए, जिसका इस्तेमाल ग्राहक ने सदस्यता लेने के लिए किया था।
- उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यक्ति ने वेबसाइट के जरिए सदस्यता ली है, तो कंपनी उसे रद्द करने के लिए फोन करने या कार्यालय जाने के लिए बाध्य नहीं कर सकती। ग्राहक शिकायत दर्ज कराकर मध्यस्थता की मांग भी कर सकते हैं। नियम का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर 525 डॉलर से शुरू होने वाला नागरिक जुर्माना लगाया जा सकता है।
भारत में लागू नियम
- भारत में अभी अमेरिका के इस नियम जैसी व्यापक ‘क्लिक टू कैंसल’ व्यवस्था का उल्लेखित प्रावधान मौजूद नहीं है। हालांकि, डिजिटल भुगतान में ग्राहकों की सुरक्षा के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने ई-मैंडेट संबंधी नियम बनाए हैं।
- इन नियमों के तहत आवर्ती भुगतान से कम से कम 24 घंटे पहले ग्राहक को सूचना देना जरूरी है। इसमें व्यापारी का नाम, भुगतान की राशि, तारीख, समय, ई-मैंडेट का संदर्भ नंबर और भुगतान का कारण शामिल होना चाहिए। लेनदेन के बाद भी ग्राहक को सूचना भेजनी होती है। हालांकि, केवल भुगतान संबंधी सूचना मिलने से सदस्यता रद्द करने की समस्या दूर नहीं होती। इसके लिए आसान और पारदर्शी प्रक्रिया भी आवश्यक है।
भारतीय उपभोक्ताओं के सामने चुनौती
- जून 2026 में प्रकाशित डेटम इंटेलिजेंस के ‘डार्क पैटर्न उपभोक्ता धारणा अध्ययन’ में नायका, मिंत्रा, फ्लिपकार्ट और अमेजन जैसे ई-कॉमर्स मंचों के साथ बिग बास्केट, जेप्टो, स्विगी इंस्टामार्ट और ब्लिंकिट जैसे त्वरित वाणिज्य मंचों का उल्लेख किया गया। अध्ययन के अनुसार, इन मंचों पर मुफ्त परीक्षण अवधि के बाद भुगतान शुरू होने से पहले नवीनीकरण संबंधी सूचनाएं उपलब्ध नहीं थीं। अधिकांश सूचीबद्ध मंचों पर सदस्यता रद्द करने के लिए चार से अधिक चरणों से गुजरना पड़ता था।
निष्कर्ष
- क्लिक टू कैंसल नियम उपभोक्ताओं को अनचाहे भुगतान और जटिल प्रक्रियाओं से बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। भारत में भी डिजिटल भुगतान संबंधी सुरक्षा के साथ सदस्यता रद्द करने की प्रक्रिया को सरल बनाने पर ध्यान देने की जरूरत है। इससे ग्राहकों के समय और पैसे की बचत होगी तथा डिजिटल सेवाओं में पारदर्शिता और भरोसा बढ़ेगा।