| प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), भीड़ का दबाव, कम्प्रेसिव एस्फिक्सिया, भीड़ का घनत्व, घटना प्रतिक्रिया प्रणाली। मुख्य परीक्षा: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II—शासन एवं प्रशासनिक जवाबदेही; सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III—आपदा प्रबंधन, तैयारी एवं जोखिम न्यूनीकरण। प्रमुख शब्द: कोलकाता भगदड़, चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल, भीड़जनित आपदा, भीड़ प्रबंधन, NDMA दिशानिर्देश, कम्प्रेसिव एस्फिक्सिया, सार्वजनिक सुरक्षा। |
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शब्द |
अर्थ |
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भगदड़ (Stampede) |
सामान्यतः भीड़ की अचानक और तेज गति को दर्शाती है, जो भय, उत्साह या किसी अप्रत्याशित घटना के बाद उत्पन्न हो सकती है। |
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भीड़ का दबाव (Crowd Crush) |
ऐसी स्थिति, जिसमें लोग इतने सघन रूप से एकत्र हो जाते हैं कि अपनी गतिविधियों पर नियंत्रण खो देते हैं और खतरनाक दबाव का सामना करते हैं। |
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भीड़ का क्रमिक रूप से गिरना (Progressive Crowd Collapse) |
जब कुछ लोग संतुलन खोकर गिरते हैं और उनके गिरने से बने खाली स्थान में आसपास के अन्य लोग भी गिरने लगते हैं। |
घातक घटना होने के लिए भीड़ का दौड़ना आवश्यक नहीं है। अत्यधिक घनत्व की स्थिति में लोग स्वतंत्र रूप से हिलने-डुलने या दबाव से बाहर निकलने में असमर्थ हो सकते हैं।
भीड़जनित आपदाएँ सामान्यतः किसी एक कारण से नहीं, बल्कि कई परस्पर जुड़ी कमजोरियों के कारण उत्पन्न होती हैं।
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जोखिम कारक |
खतरा कैसे बढ़ता है? |
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भीड़ का अत्यधिक घनत्व |
व्यक्तिगत स्थान और स्वतंत्र रूप से चलने की क्षमता कम हो जाती है। |
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संकरे प्रवेश और निकास द्वार |
ऐसे अवरोधक बिंदु बनते हैं, जहाँ लोगों का जमाव बढ़ता जाता है। |
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विपरीत दिशाओं में पैदल आवागमन |
आने और जाने वाले समूह एक-दूसरे के रास्ते में बाधा बनते हैं। |
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अवरुद्ध मार्ग |
दुकानें, पार्किंग और गलत स्थानों पर लगाए गए बैरिकेड उपयोग योग्य स्थान कम कर देते हैं। |
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अप्रत्याशित घटनाएँ |
बारिश, बिजली की खराबी या सुरक्षा संबंधी आशंका से अचानक हलचल शुरू हो सकती है। |
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खराब संचार |
अस्पष्ट घोषणाएँ बड़ी संख्या में लोगों को एक ही स्थान की ओर भेज सकती हैं। |
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कमजोर समन्वय |
प्रवेश पर रोक, मार्ग परिवर्तन और आपातकालीन प्रतिक्रिया संबंधी निर्णयों में देरी होती है। |
जब आयोजन स्थल पहले से अत्यधिक भीड़ से भरा हो और आवागमन में बदलाव सँभालने की क्षमता सीमित हो, तब छोटी-सी हलचल भी अत्यंत खतरनाक बन सकती है।
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घटना |
तिथि/वर्ष |
दर्ज मृतक संख्या |
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नासिक कुंभ, महाराष्ट्र |
अगस्त 2003 |
29 |
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मांढरदेवी–कालूबाई यात्रा, महाराष्ट्र |
जनवरी 2005 |
293 |
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हाथरस धार्मिक समागम, उत्तर प्रदेश |
2 जुलाई, 2024 |
121 |
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नई दिल्ली रेलवे स्टेशन |
15 फरवरी, 2025 |
18 |
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RCB की जीत का जश्न, बेंगलुरु |
4 जून, 2025 |
11 |
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चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल, कोलकाता |
17 अक्टूबर, 2026 |
19 |
यह कुछ चुनिंदा घटनाओं की सूची है, संपूर्ण राष्ट्रीय आँकड़ा-संग्रह नहीं। ऐतिहासिक आँकड़े NDMA के विवरण तथा बाद की घटनाओं के आँकड़े मूल लेख में संदर्भित समाचार रिपोर्टों पर आधारित हैं।
NDMA की रूपरेखा संभावित भीड़ को आयोजन स्थल की क्षमता के अनुरूप रखने और संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय सुनिश्चित करने पर बल देती है।
प्रमुख उपायों में शामिल हैं:
प्रारंभिक परीक्षा हेतु बहुविकल्पीय प्रश्नभीड़जनित आपदाओं के संदर्भ में “कम्प्रेसिव एस्फिक्सिया” का क्या अर्थ है? A. अत्यधिक शोर के कारण सुनने की क्षमता का ह्रास मुख्य परीक्षा हेतु प्रश्न“भीड़जनित आपदाओं की प्रभावी रोकथाम के लिए क्षमता नियोजन, स्पष्ट संचार और प्रशासनिक समन्वय आवश्यक हैं।” भारत की प्रमुख भीड़जनित आपदाओं के संदर्भ में चर्चा कीजिए। |
1. कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में क्या हुआ था?17 अक्टूबर, 2026 को हुई भीड़जनित आपदा में 19 लोगों की मृत्यु हुई और लगभग 25 लोग घायल हुए। घटना की परिस्थितियों और जिम्मेदारी की जाँच जारी है। 2. क्या लोगों के दौड़े बिना भी भीड़ का घातक दबाव उत्पन्न हो सकता है?हाँ। अत्यधिक भीड़ घनत्व के कारण लोगों के खड़े रहने या धीरे-धीरे चलने की स्थिति में भी खतरनाक दबाव उत्पन्न हो सकता है। 3. कम्प्रेसिव एस्फिक्सिया क्या है?यह बाहरी दबाव के कारण साँस लेने में उत्पन्न बाधा है, जिसमें छाती का सामान्य फैलाव और श्वसन संबंधी गतिविधियाँ प्रभावित होती हैं। 4. भीड़ प्रबंधन का केंद्रीय सिद्धांत क्या है?प्रशासन को प्रवेश और आवागमन को आयोजन स्थल तथा उसके अलग-अलग मार्गों की क्षमता के अनुरूप रखना चाहिए और निकास मार्ग सुरक्षित बनाए रखने चाहिए। 5. भीड़जनित आपदाओं की रोकथाम में तकनीक कैसे सहायक हो सकती है?निगरानी उपकरण भीड़ के जमाव की पहचान करने में सहायक हो सकते हैं। हालाँकि, उनकी प्रभावशीलता प्रशिक्षित कर्मचारियों तथा आवागमन नियंत्रित करने या दिशा बदलने के लिए समय पर लिए गए निर्णयों पर निर्भर करती है। |
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