संदर्भ
हाल ही में भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने आज चक्रवात की चेतावनी और समुद्री मौसम सेवाओं संबंधी निर्णय लेने में समर्थन करने वाली प्रणाली ('साइक्लोन वार्निंग और मरीन वेदर सर्विसेज़ डिसीज़न सपोर्ट सिस्टम') देश को समर्पित की।
साइक्लोन वार्निंग और मरीन वेदर सर्विसेज़ डिसीज़न सपोर्ट सिस्टम के बारे में
- यह इंटरैक्टिव WebGIS-आधारित प्लेटफ़ॉर्म है।
- इसे मॉनसून के बाद के मौसम (अक्टूबर-दिसंबर) 2026 के लिए आयोजित छमाही 'प्री-साइक्लोन एक्सरसाइज़ मीटिंग' के दौरान आरंभ किया गया।
- यह निर्णय सहायक प्रणाली (डीएसएस) आमजन के लिए प्लेटफ़ॉर्म मौसम विभाग की वेबसाइट (www.mausam.imd.gov.in) और क्षेत्रीय विशिष्ट मौसम विज्ञान केंद्र (आरएसएमसी) की वेबसाइट (www.rsmcnewdelhi.imd.gov.in) पर उपलब्ध है।
उद्देश्य:
- इसका उद्देश्य मौसम के पूर्वानुमान और उनके व्यावहारिक इस्तेमाल के बीच की दूरी को कम करना है, ताकि चक्रवात और मौसम की अन्य गंभीर घटनाओं के दौरान बेहतर तैयारी, समय पर कार्रवाई और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
विशेषताएं:
- डीएसएस उपयोक्ता अनुकूल, संवादात्मक प्लेटफ़ॉर्म है जो चक्रवात और समुद्री मौसम से जुड़ी ज़रूरी जानकारी को एक ही जगह पर लाता है।
- इससे आपदा प्रबंधन अधिकारियों, सरकारी एजेंसियों और आम जनता जैसे उपयोक्ताओं के लिए खतरों की आशंका और उनके असर को समझना आसान हो जाता है।
- इंटरैक्टिव मैप और चक्रवात के ट्रैक, तीव्रता, हवा, बारिश, तूफ़ानी लहरों (स्टॉर्म सर्ज) और नदी के जलग्रहण क्षेत्रों के लिए बारिश के अनुमान के दृश्यीकरण (विज़ुअलाइज़ेशन) के ज़रिए, यह प्लेटफ़ॉर्म उपयोक्ताओं को ज़रूरी जानकारी पाने और सही फ़ैसले लेने में सहायता करता है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के बारे में
- वर्ष 1875 में भारत सरकार ने भारत मौसम विज्ञान विभाग की स्थापना की। इसकी स्थापना के साथ ही देश में सभी मौसम संबंधी कार्यों को एक केंद्रीय प्राधिकरण के तहत लाया गया।
- श्री एच. एफ. ब्लैनफोर्ड को भारत सरकार के लिए मौसम संबंधी रिपोर्टर नियुक्त किया गया। मई 1889 में कलकत्ता मुख्यालय में वेधशालाओं के प्रथम महानिदेशक सर जॉन एलियट कोनियुक्त किया गया।
- भारत मौसम विज्ञान विभाग का मुख्यालय बाद में शिमला, फिर पूना (अब पुणे) और अंत में नई दिल्ली स्थानांतरित किया गया।
- 1875 में एक सामान्य शुरुआत से, भारत मौसम विज्ञान विभाग ने मौसम संबंधी प्रेक्षणों, संचार, पूर्वानुमान और मौसम सेवाओं के लिए अपने बुनियादी ढांचे का उत्तरोत्तर विस्तार किया है और इसने एक समानांतर वैज्ञानिक प्रगति की है।