New
Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 21st Sept. 2026, 11:30 AM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 22nd Sept. 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 6th Aug 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 19th Aug 2026, 11:00 AM Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 21st Sept. 2026, 11:30 AM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 22nd Sept. 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 6th Aug 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 19th Aug 2026, 11:00 AM

दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना 2.0

संदर्भ 

  • भारत की युवा आबादी देश के आर्थिक विकास और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने का बड़ा अवसर प्रस्तुत करती है। वर्ष 2036 तक देश में युवाओं की संख्या लगभग 34.5 करोड़ पहुंचने का अनुमान है। इस जनसांख्यिकीय क्षमता को आर्थिक अवसरों में बदलने के लिए गुणवत्तापूर्ण कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और टिकाऊ आजीविका तक युवाओं की पहुंच बढ़ाना आवश्यक है। 
  • इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 25 सितंबर 2014 को दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना यानी डीडीयू-जीकेवाई की शुरुआत की थी। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत संचालित यह योजना गरीब ग्रामीण परिवारों के 15 से 35 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को रोजगार से जुड़े कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर केंद्रित है। 
  • एक दशक से अधिक की यात्रा के बाद योजना अब डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के माध्यम से प्रशिक्षण और रोजगार के साथ-साथ रोजगार में निरंतरता, कौशल उन्नयन, करियर प्रगति और प्रवासन सहायता पर भी जोर दे रही है। 

सामाजिक समावेशन पर विशेष जोर 

  • डीडीयू-जीकेवाई का उद्देश्य केवल ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षित करना ही नहीं, बल्कि सामाजिक रूप से वंचित वर्गों की रोजगार तक पहुंच सुनिश्चित करना भी है। योजना में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों के लिए 50 प्रतिशत, महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत और दिव्यांगजनों के लिए 5 प्रतिशत कवरेज का प्रावधान है।

विशेष पहल: संवेदनशील क्षेत्रों के लिए लक्षित उपाय

डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के तहत दो विशेष कार्यक्रम लागू किए जा रहे हैं:

  • रोशनी: यह गृह मंत्रालय द्वारा अधिसूचित वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) प्रभावित जिलों की विशिष्ट आवश्यकताओं पर ध्‍यान देता है। यह महिला उम्मीदवारों के लिए 40 प्रतिशत कवरेज के साथ आवासीय कौशल प्रशिक्षण को अधिदेशित करता है। इस पहल को स्थानीय बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य, प्राकृतिक संसाधनों और पारंपरिक कौशल पर ध्यान केंद्रित करते हुए आकांक्षी जिलों तक विस्तारित किया गया है।
  • हिमायत: यह जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए एक विशेष डीडीयू-जीकेवाई योजना है। यह बीपीएल और एपीएल व्यक्तियों सहित ग्रामीण और शहरी युवाओं को कवर करता है, और मजदूरी, स्वयं और गिग रोजगार का समर्थन करता है। यह योजना 100 प्रतिशत केंद्र द्वारा वित्त पोषित है और समर्पित मिशन प्रबंधन इकाइयों के माध्यम से राज्य के समर्थन से कार्यान्वित की गई है।
  • पूर्वोत्तर: सामाजिक-सांस्कृतिक अंतर और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए अद्वितीय स्थलाकृति के संदर्भ में चुनौतियों को स्वीकार करते हुए, डीडीयू-जीकेवाई के लिए कुल आवंटन में से 10 प्रतिशत पूर्वोत्तर राज्यों के लिए निर्धारित किया गया है।
  • दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंच: इसके अलावा विशेष क्षेत्र भत्ते का प्रावधान है जहां परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियां प्रति उम्मीदवार आधार प्रशिक्षण लागत के अतिरिक्त 10 प्रतिशत की दर से भुगतान के लिए पात्र होंगी।
  • इससे ग्रामीण युवाओं के विभिन्न वर्गों को कौशल विकास और रोजगार के अवसरों से जोड़ने में मदद मिलती है।  

प्रशिक्षण से रोजगार तक बदला दृष्टिकोण 

  • मई 2025 में अधिसूचित डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के दिशा-निर्देशों में प्रशिक्षण, प्लेसमेंट, रोजगार स्थिरता और प्रशिक्षण के बाद सहायता के ढांचे को मजबूत किया गया है। नए ढांचे में उद्योग की जरूरतों के अनुरूप एयरोस्पेस और विमानन, कृषि, सौंदर्य एवं स्वास्थ्य, हरित रोजगार, स्वास्थ्य सेवा, वस्त्र सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण का प्रावधान है। 
  • डीडीयू-जीकेवाई 2.0 में न्यूनतम 576 घंटे के प्रशिक्षण ढांचे को बरकरार रखा गया है। तीन महीने के पाठ्यक्रम में 396 घंटे का डोमेन प्रशिक्षण और 180 घंटे का अनिवार्य गैर-डोमेन प्रशिक्षण शामिल है। गैर-डोमेन प्रशिक्षण में अंग्रेजी संचार, रोजगारपरकता एवं जीवन कौशल, कंप्यूटर एवं डिजिटल साक्षरता तथा उद्यमिता को शामिल किया गया है। 
  • इस व्यवस्था का उद्देश्य युवाओं को तकनीकी दक्षता के साथ-साथ कार्यस्थल पर जरूरी संचार, डिजिटल और व्यावसायिक क्षमताओं से लैस करना है। 

प्लेसमेंट की अवधि बढ़कर छह महीने 

  • डीडीयू-जीकेवाई 2.0 में रोजगार की स्थिरता पर विशेष ध्यान दिया गया है। पहले जहां प्लेसमेंट के लिए कम से कम तीन महीने के निरंतर रोजगार को आधार माना जाता था, वहीं नए दिशा-निर्देशों के तहत न्यूनतम प्लेसमेंट अवधि बढ़ाकर छह महीने कर दी गई है।
  • संशोधित व्यवस्था में वेतन रोजगार के साथ स्वरोजगार और गिग रोजगार को भी शामिल किया गया है। इससे रोजगार के बदलते स्वरूपों को योजना के दायरे में लाने का प्रयास किया गया है। 

रोजगार मेलों से युवाओं को अवसर 

  • ग्रामीण युवाओं को संभावित नियोक्ताओं से जोड़ने के लिए राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों द्वारा ग्राम पंचायत और प्रखंड स्तर पर रोजगार मेलों का आयोजन किया जाता है। इन मेलों में युवाओं का पंजीकरण, परामर्श, नियोक्ताओं का सत्यापन और प्लेसमेंट के बाद एक वर्ष तक परिणामों की निगरानी जैसी गतिविधियां शामिल हैं। 
  • डीडीयू-जीकेवाई बजट से ग्राम पंचायत स्तर के रोजगार मेले के लिए 50 हजार रुपये और प्रखंड स्तर के मेले के लिए एक लाख रुपये तक वित्तीय सहायता का प्रावधान है।

रोजगार में बने रहने के लिए सहायता 

  • डीडीयू-जीकेवाई 2.0 में नौकरी मिलने के बाद उम्मीदवारों के रोजगार में बने रहने को भी महत्वपूर्ण माना गया है। प्लेसमेंट के बाद 12 महीने तक उम्मीदवारों की निगरानी और सहायता का प्रावधान किया गया है।
  • प्लेस किए गए उम्मीदवारों को छह महीने तक प्रतिमाह 1,270 रुपये की दर से कुल 7,620 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है। वहीं 365 दिनों तक रोजगार में बने रहने वाले उम्मीदवारों के लिए प्रति उम्मीदवार 5,000 रुपये की प्रतिधारण सहायता का प्रावधान है। साथ ही, 12 महीने बाद कौशल बढ़ाने और पुनर्कौशल के अवसर भी उपलब्ध कराए जाते हैं। 

प्रवासी युवाओं के लिए सहायता केंद्र 

  • ग्रामीण क्षेत्रों से रोजगार के लिए दूसरे शहरों और राज्यों में जाने वाले युवाओं की सहायता के लिए डीडीयू-जीकेवाई 2.0 में प्रवासन सहायता केंद्रों को मजबूत किया गया है। ये केंद्र आवास, परामर्श, रोजगार और प्लेसमेंट से जुड़ी सहायता उपलब्ध कराते हैं। 
  • केंद्र रोजगार संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने, पूर्व प्रशिक्षुओं का नेटवर्क बनाने और नियोक्ताओं से संपर्क मजबूत करने में भी मदद करते हैं। नए ढांचे में प्रत्येक प्रवासन सहायता केंद्र के लिए वार्षिक वित्तीय सहायता को बढ़ाकर 30 लाख रुपये तक किया गया है। 

तकनीक से मजबूत हो रही निगरानी 

  • डीडीयू-जीकेवाई में तकनीक के इस्तेमाल को भी बढ़ाया गया है। जियो-टैगिंग, समय-चिह्नित जैव-आधारित उपस्थिति, डिजिटल प्रशिक्षण और ई-लर्निंग जैसी व्यवस्थाओं के साथ डीडीयू-जीकेवाई 2.0 में पूरे कार्यक्रम के लिए एक समग्र डिजिटल व्यवस्था विकसित की गई है। 
  • इसमें प्रशिक्षण केंद्र और उम्मीदवार प्रबंधन, मूल्यांकन एवं प्रमाणन, वित्तीय प्रबंधन, परियोजना निगरानी और प्लेसमेंट की निगरानी शामिल है। वास्तविक समय के डैशबोर्ड, चेहरा प्रमाणीकरण और स्किल इंडिया डिजिटल हब के साथ एकीकरण से प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निगरानी योग्य बनाने का प्रयास किया गया है। 

अब तक की उपलब्धियां 

  • डीडीयू-जीकेवाई वर्तमान में 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है। योजना के तहत 455 से अधिक परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों के साथ 760 सक्रिय प्रशिक्षण केंद्र संचालित हैं और 749 परियोजनाएं स्वीकृत हैं। 
  • वर्ष 2014-15 में शुरुआत से अब तक योजना के तहत 18.47 लाख से अधिक उम्मीदवारों को प्रशिक्षण दिया गया है और 12.43 लाख से अधिक उम्मीदवारों का प्लेसमेंट हुआ है। प्रशिक्षण 36 क्षेत्रों और 800 से अधिक रोजगार भूमिकाओं में दिया गया है। इनमें 9.71 लाख से अधिक महिलाएं प्रशिक्षित हुई हैं और 6.34 लाख से अधिक महिलाओं का प्लेसमेंट हुआ है।  

स्वरोजगार के लिए आरएसईटीआई का सहारा 

  • ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसर बढ़ाने में ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान यानी आरएसईटीआई भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इनके माध्यम से 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग के ग्रामीण बेरोजगार युवाओं को नि:शुल्क आवासीय प्रशिक्षण दिया जाता है।
  • वर्तमान में 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 634 जिलों में 647 आरएसईटीआई संचालित हैं। वर्ष 2009 से अब तक 63.47 लाख उम्मीदवारों को प्रशिक्षण दिया गया है।

निष्कर्ष 

  • ग्रामीण भारत के युवाओं को कौशल, रोजगार और उद्यमिता के अवसरों से जोड़ना समावेशी आर्थिक विकास की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। डीडीयू-जीकेवाई 2.0 प्रशिक्षण से आगे बढ़कर रोजगार में स्थिरता, कौशल उन्नयन, प्रवासन सहायता और करियर प्रगति पर ध्यान केंद्रित करता है। 
  • केंद्रीय बजट 2026-27 में डीडीयू-जीकेवाई के लिए 750 करोड़ रुपये का आवंटन ग्रामीण कौशल विकास पर निरंतर ध्यान को दर्शाता है। गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, उद्योग से जुड़ाव और रोजगार के बाद सहायता के माध्यम से यह पहल ग्रामीण युवाओं की क्षमता को टिकाऊ आजीविका में बदलने में योगदान दे सकती है। 
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR