संदर्भ
क्यूबा इस समय गंभीर ऊर्जा और आर्थिक संकट से गुजर रहा है। अमेरिकी प्रतिबंधों, तेल आपूर्ति पर बढ़ते दबाव और ईंधन की कमी ने देश की बिजली व्यवस्था, परिवहन, स्वास्थ्य सेवाओं और उद्योगों को प्रभावित किया है। इस संकट का असर अब केवल अमेरिका और क्यूबा के द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें चीन, रूस, वेनेजुएला और पूरे लैटिन अमेरिकी क्षेत्र के भू-राजनीतिक हित भी जुड़ गए हैं।
छह दशक पुराना अमेरिका-क्यूबा विवाद
- क्यूबा और अमेरिका के बीच तनाव की शुरुआत वर्ष 1959 की क्यूबा क्रांति के बाद हुई। फिदेल कास्त्रो के नेतृत्व वाली सरकार ने 1959-60 के दौरान अमेरिकी स्वामित्व वाली संपत्तियों का राष्ट्रीयकरण किया। इसके जवाब में अमेरिका ने अक्टूबर 1960 में क्यूबा पर आंशिक व्यापार प्रतिबंध लगाया, जिसे वर्ष 1962 में व्यापक आर्थिक प्रतिबंध में बदल दिया गया।
- क्यूबा इन प्रतिबंधों को “एल ब्लोकेओ” यानी नाकेबंदी कहता है। हवाना का तर्क है कि अमेरिकी नीतियां केवल दोनों देशों के व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि क्यूबा के तीसरे देशों के साथ व्यापार और वित्तीय संबंधों को भी प्रभावित करती हैं।
- वर्ष 1992 के क्यूबन डेमोक्रेसी एक्ट और वर्ष 1996 के हेल्म्स-बर्टन एक्ट ने इन प्रतिबंधों को और मजबूत किया। इसके चलते क्यूबा के साथ कारोबार करने वाली विदेशी कंपनियों पर भी अप्रत्यक्ष दबाव बढ़ा।
|
क्यूबा के बारे में
- क्यूबा कैरेबियन सागर में स्थित एक द्वीप देश है। इसकी राजधानी हवाना है। अन्य प्रमुख शहरों में सैंटियागो डी क्यूबा, कामागुए, होल्गुइन और सांता क्लारा शामिल हैं।
जलवायु:
- क्यूबा की जलवायु उष्णकटिबंधीय है, जिसमें नवंबर से अप्रैल तक शुष्क मौसम और मई से अक्टूबर तक वर्षा ऋतु रहती है, जिसमें उच्च तापमान और आर्द्रता पाई जाती है।
क्षेत्रफल:
- क्यूबा का कुल क्षेत्रफल लगभग 109,880 वर्ग किलोमीटर है। इस क्षेत्रफल में मुख्य भूमि और क्यूबा द्वीपसमूह के आस-पास के द्वीप दोनों शामिल हैं।
जनसंख्या:
- 2025 में क्यूबा की अनुमानित जनसंख्या लगभग 9,748,007 लोग है। यह पिछले वर्षों की तुलना में कमी को दर्शाता है, जो कम जन्म दर, बढ़ती उम्र की आबादी और उच्च प्रवासन दर के कारण जनसंख्या में गिरावट की प्रवृत्ति को इंगित करता है।
मुद्रा:
- 2025 में क्यूबा की आधिकारिक मुद्रा क्यूबा पेसो (CUP) है।
आधिकारिक भाषा:
- क्यूबा की आधिकारिक भाषा स्पेनिश है।
|
ट्रंप प्रशासन में बढ़ा दबाव
- डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में क्यूबा पर अमेरिकी दबाव और बढ़ गया है। क्यूबा को दोबारा आतंकवाद प्रायोजित करने वाले देशों की सूची में शामिल किए जाने से उसके लिए अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग और वित्तीय लेन-देन मुश्किल हुए हैं।
- अमेरिका ने क्यूबा की सरकार और उसके सैन्य कारोबारी समूह गेसा के साथ कारोबार करने वाली विदेशी कंपनियों पर भी प्रतिबंध लगाए हैं। इसके अलावा क्यूबा को तेल उपलब्ध कराने वाले देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की नीति ने उसकी ऊर्जा सुरक्षा को सीधे प्रभावित किया है।
- जुलाई 2026 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में क्यूबा की नाकेबंदी के मुद्दे पर चर्चा के पक्ष में 136 देशों ने मतदान किया, जबकि 9 देशों ने विरोध किया और 30 देशों ने मतदान से दूरी बनाई। इससे पता चलता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के एक बड़े हिस्से में अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर असहमति बनी हुई है।
वेनेजुएला से तेल आपूर्ति बनी थी जीवनरेखा
- क्यूबा की ऊर्जा व्यवस्था में वेनेजुएला की भूमिका लंबे समय से महत्वपूर्ण रही है। सोवियत संघ के पतन के बाद क्यूबा गंभीर आर्थिक संकट में चला गया था। इसी दौरान 2000 में फिदेल कास्त्रो और ह्यूगो शावेज के बीच “तेल के बदले सेवाएं” समझौता हुआ।
- इस समझौते के तहत क्यूबा ने वेनेजुएला को डॉक्टर, शिक्षक और अन्य पेशेवर उपलब्ध कराए, जबकि वेनेजुएला ने क्यूबा को आसान शर्तों पर प्रतिदिन करीब एक लाख बैरल तेल उपलब्ध कराया।
- यद्यपि वेनेजुएला के तेल उत्पादन में गिरावट, सरकारी तेल कंपनी पीडीवीएसए की समस्याओं और अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण क्यूबा को मिलने वाली तेल आपूर्ति धीरे-धीरे कम होती गई। 2026 में यह संकट और गहरा गया।
- इसके अलावा मेक्सिको से मिलने वाली तेल आपूर्ति में कमी और रूस की सीमित आपूर्ति ने क्यूबा के लिए विकल्प और कम कर दिए।
ईंधन संकट से बिगड़ी स्थिति
- ईंधन की कमी का असर केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं रहा। परिवहन, खाद्य वितरण, स्वास्थ्य सेवाओं, जल आपूर्ति और संचार व्यवस्था भी प्रभावित हुई है।
- कई क्षेत्रों में बिजली कटौती 12 घंटे से अधिक समय तक चल रही है। कुछ प्रांतों में यह अवधि करीब 20 घंटे तक पहुंचने की बात सामने आई है। अस्पतालों तक पहुंच में मुश्किल, सर्जरी में देरी और बच्चों के टीकाकरण पर असर जैसी समस्याएं भी सामने आई हैं।
- क्यूबा पहुंचने वाले जहाजों की संख्या में भी कमी आई है। इससे व्यापार, पर्यटन, खनन और जहाजरानी जैसे क्षेत्रों पर दबाव बढ़ा है। कमजोर अर्थव्यवस्था के कारण बड़ी संख्या में क्यूबाई नागरिक देश छोड़ चुके हैं।
चीन बना वैकल्पिक सहयोगी
- इस संकट के बीच चीन क्यूबा के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक और ऊर्जा साझेदार बनकर उभरा है। चीन ने क्यूबा में सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए उपकरण उपलब्ध कराने के साथ-साथ सौर ऊर्जा प्रणालियां भी उपलब्ध कराई हैं।
- क्यूबा ने 144 सौर पार्कों में 1,418 मेगावाट सौर क्षमता स्थापित करने की जानकारी दी है। वर्ष 2026 के अंत तक इसे 1,500 मेगावाट से अधिक करने का लक्ष्य रखा गया है।
- चीन द्वारा भेजे गए हजारों सौर ऊर्जा संयंत्रों का इस्तेमाल सार्वजनिक इमारतों और दूरदराज के घरों में किया जा रहा है। इससे क्यूबा की अमेरिकी तेल पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
- हालांकि, सौर ऊर्जा फिलहाल पूरी समस्या का समाधान नहीं है। रात में सौर बिजली का उत्पादन नहीं होता और क्यूबा में पर्याप्त बैटरी भंडारण क्षमता भी नहीं है। देश का बिजली तंत्र पुराने तेल आधारित बिजली संयंत्रों पर भी निर्भर है।
बदलते भू-राजनीतिक समीकरण
- क्यूबा संकट अब केवल अमेरिका और क्यूबा का विवाद नहीं रह गया है। चीन की बढ़ती आर्थिक और ऊर्जा भागीदारी ने इसे अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा के व्यापक संदर्भ से जोड़ दिया है।
- क्यूबा सरकार ने निजी कारोबार और विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए 176 सुधारों को मंजूरी दी है। लेकिन अमेरिकी प्रतिबंध और वित्तीय बाधाएं इन सुधारों की गति को प्रभावित कर सकती हैं।
- आने वाले समय में क्यूबा के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी ऊर्जा व्यवस्था को स्थिर करने, अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में संतुलन बनाए रखने की होगी। वहीं अमेरिका के लिए भी क्यूबा नीति केवल एक द्विपक्षीय मुद्दा नहीं रह गई है। इसमें चीन, रूस, वेनेजुएला और पूरे लैटिन अमेरिकी क्षेत्र के रणनीतिक हित जुड़े हुए हैं। इस लिहाज से क्यूबा का मौजूदा संकट कैरेबियाई क्षेत्र में बदलते शक्ति-संतुलन और वैश्विक राजनीति में बढ़ती प्रतिस्पर्धा का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है।