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पीएम गतिशक्ति के पाँच वर्ष: प्रमुख उपलब्धियाँ, अवसंरचना नियोजन और भारत के लिए महत्त्व

प्रारंभिक परीक्षा: पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान, बीआईएसएजी-एन (BISAG-N), नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप, भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी, एकीकृत भू-स्थानिक इंटरफेस, एकीकृत परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स प्राधिकरण।
मुख्य परीक्षा: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II शासन, अंतर-विभागीय समन्वय एवं सहकारी संघवाद; सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III अवसंरचना, परिवहन नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स एवं आर्थिक विकास।
मुख्य शब्द: पीएम गतिशक्ति के पाँच वर्ष, पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान, अवसंरचना नियोजन, बहु-माध्यमीय संपर्क, BISAG-N, नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप, लॉजिस्टिक्स दक्षता, जिला मास्टर प्लान, ITLA, विकसित भारत 2047।

चर्चा में क्यों?

  • अक्तूबर 2021 में शुरू किए गए पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान ने अक्तूबर 2026 में पाँच वर्ष पूरे किए।
  • वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, इस प्लेटफॉर्म पर 1,800 से अधिक डेटा परतें एकीकृत हैं। इसके दायरे में 58 केंद्रीय मंत्रालय/विभाग, 28 राज्य और 8 केंद्रशासित प्रदेश शामिल हैं।
  • नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (NPG) ने लगभग ₹20.23 लाख करोड़ मूल्य की 421 अवसंरचना परियोजनाओं का मूल्यांकन किया है।

पीएम गतिशक्ति क्या है?

  • पीएम गतिशक्ति, समन्वित अवसंरचना नियोजन के लिए विकसित एक प्रौद्योगिकी-आधारित राष्ट्रीय ढाँचा है। यह बेहतर निर्णय लेने में सहायता के लिए विभिन्न सरकारी विभागों की भू-स्थानिक सूचनाओं को एक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाता है।
  • इस प्लेटफॉर्म को आत्मनिर्भर भारत पहल के अंतर्गत भास्कराचार्य राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुप्रयोग एवं भू-सूचना विज्ञान संस्थान (BISAG-N) ने स्वदेशी रूप से विकसित किया है।
  • यह समग्र सरकारी दृष्टिकोण (Whole-of-Government Approach) पर आधारित है, जिसके अंतर्गत मंत्रालय, विभाग और राज्य सरकारें अपनी अवसंरचना योजनाओं में समन्वय स्थापित करते हैं।

पाँच वर्षों की प्रमुख उपलब्धियाँ

संकेतक

अक्तूबर 2026 में दर्ज प्रगति

भू-स्थानिक डेटा परतें

1,800 से अधिक

शामिल केंद्रीय मंत्रालय/विभाग

58

शामिल राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेश

सभी 36

NPG द्वारा मूल्यांकित अवसंरचना परियोजनाएँ

421

मूल्यांकित परियोजनाओं का कुल मूल्य

लगभग ₹20.23 लाख करोड़

सॉफ्टवेयर मॉड्यूल एवं उपकरण

65 से अधिक

मोबाइल एवं वेब एप्लिकेशन

100 से अधिक

एकीकृत नियोजन में भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी की भूमिका

यह प्लेटफॉर्म स्थान-आधारित सूचनाओं को एक साथ लाता है। इससे योजनाकारों को मौजूदा अवसंरचना, प्रस्तावित परियोजनाओं और संपर्क सुविधाओं की आवश्यकता वाले क्षेत्रों के बीच संबंध समझने में सहायता मिलती है। नियोजन में इसके प्रमुख उपयोग हैं:

  • अवसंरचना नेटवर्क की कमियों की पहचान करना।
  • परिवहन प्रणालियों और आर्थिक केंद्रों के बीच संपर्क का आकलन करना।
  • विभिन्न विभागों की अवसंरचना संबंधी आवश्यकताओं में समन्वय स्थापित करना।
  • मार्गों, परियोजना स्थलों और सेवाओं की पहुँच से संबंधित निर्णयों में सहायता देना।

नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप की भूमिका

नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप, पीएम गतिशक्ति के सिद्धांतों के आधार पर अवसंरचना प्रस्तावों का मूल्यांकन करता है। इसके मूल्यांकन ढाँचे में निम्नलिखित पहलुओं पर बल दिया जाता है:

  • एकीकृत नियोजन: परस्पर संबंधित अवसंरचना आवश्यकताओं पर एक साथ विचार करना।
  • बहु-माध्यमीय संपर्क (Multimodal Connectivity): परिवहन के विभिन्न साधनों को आपस में जोड़ना।
  • अंतर-माध्यमीय संपर्क (Intermodal Connectivity): परिवहन के एक साधन से दूसरे साधन तक आवाजाही अथवा माल के स्थानांतरण को सुगम बनाना।
  • अंतिम छोर तक संपर्क (Last-mile Connectivity): परिवहन नेटवर्क को आर्थिक एवं सामाजिक सुविधाओं से जोड़ना।
  • लॉजिस्टिक्स दक्षता: माल की आवाजाही को अधिक कुशल बनाना।
  • समन्वित क्रियान्वयन: संबंधित परियोजनाओं के क्रियान्वयन और समय-सारिणी में तालमेल स्थापित करना।

इस प्रकार, NPG अवसंरचना से जुड़ी विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय के लिए एक संस्थागत व्यवस्था उपलब्ध कराता है।

जिला-स्तरीय एवं सामाजिक क्षेत्र के नियोजन तक विस्तार

पीएम गतिशक्ति का दायरा प्रमुख परिवहन अवसंरचना से आगे बढ़कर स्थानीय सामाजिक-आर्थिक नियोजन तक विस्तृत हुआ है। जिला स्तर पर इसका उपयोग निम्नलिखित सुविधाओं की योजना बनाने में किया जा रहा है:

  • सड़कें एवं स्थानीय संपर्क सुविधाएँ।
  • विद्यालय एवं अन्य शैक्षणिक सुविधाएँ।
  • अस्पताल एवं स्वास्थ्य सेवाएँ।
  • जलापूर्ति पाइपलाइनें।
  • अन्य आवश्यक सार्वजनिक सेवाएँ।

इससे जिला प्रशासन यह आकलन कर सकता है कि संबंधित समुदायों तक सार्वजनिक सुविधाओं की पहुँच कितनी सुगम है।

सार्वजनिक प्लेटफॉर्म एवं डिजिटल उपकरण

एकीकृत भू-स्थानिक इंटरफेस (Unified Geospatial Interface—UGI) के माध्यम से पीएम गतिशक्ति का सार्वजनिक प्लेटफॉर्म सितंबर 2025 में शुरू किया गया। यह निजी संस्थाओं और आम जनता को चुनिंदा डेटा तथा विश्लेषण सुविधाएँ उपलब्ध कराता है। इस पहल को सहायता देने वाली अन्य डिजिटल प्रणालियाँ निम्नलिखित हैं:

प्रणाली

प्रमुख उद्देश्य

ज्ञान प्रबंधन प्रणाली (KMS)

ज्ञान एवं जानकारी साझा करना

विकेंद्रीकृत डेटा अपलोड एवं प्रबंधन प्रणाली (DUMS)

विकेंद्रीकृत तरीके से डेटा अपलोड करना और उसका प्रबंधन

पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान डैशबोर्ड

अवसंरचना की निगरानी

सार्वजनिक पहुँच केवल चुनिंदा सुविधाओं तक सीमित है। इसका अर्थ सभी सरकारी डेटा परतों तक निर्बाध पहुँच नहीं है।

पीएम गतिशक्ति की विकास यात्रा

अवधि

प्रमुख घटनाक्रम

2021–22

एकीकृत राष्ट्रीय नियोजन ढाँचे का शुभारंभ एवं स्थापना

2022–23

अवसंरचना से संबंधित आठ प्रमुख मंत्रालयों को जोड़ा गया; 71 परियोजनाओं का मूल्यांकन

2023–24

सामाजिक क्षेत्र का एकीकरण; 1,463 डेटा परतें तथा सभी 36 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों का समावेश

2024–25

आर्थिक क्षेत्रों का एकीकरण; जिला मास्टर प्लान का शुभारंभ; 121 परियोजनाओं का मूल्यांकन

2025–26

सार्वजनिक प्लेटफॉर्म/UGI, KMS, DUMS एवं डैशबोर्ड का शुभारंभ; फरवरी 2026 तक मूल्यांकित परियोजनाओं की संख्या 352 पहुँची

2026 की अद्यतन स्थिति

लगभग ₹20.23 लाख करोड़ मूल्य की 421 परियोजनाओं का मूल्यांकन; ITLA को मंजूरी

ये आँकड़े अलग-अलग अवधियों में दर्ज प्रगति को दर्शाते हैं। इन्हें अलग-अलग परियोजना समूह मानकर आपस में नहीं जोड़ना चाहिए।

एकीकृत परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स प्राधिकरण

  • सरकार ने दीर्घकालिक परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स नियोजन को सुदृढ़ बनाने के लिए एकीकृत परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स प्राधिकरण (Integrated Transport and Logistics Authority—ITLA) स्थापित करने का निर्णय लिया है।
  • इसका उद्देश्य बहु-माध्यमीय अवसंरचना संपर्क को मजबूत करना, अवसंरचना की दक्षता बढ़ाना, लॉजिस्टिक्स लागत घटाना और वैश्विक लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना है।

पीएम गतिशक्ति का महत्त्व

  1. शासन में बेहतर समन्वय: साझा नियोजन प्लेटफॉर्म मंत्रालयों को यह समझने में सहायता कर सकता है कि उनकी परियोजनाएँ किस प्रकार एक-दूसरे पर निर्भर हैं। इससे निर्णयों में बेहतर समन्वय संभव होता है।
  2. सार्वजनिक संसाधनों का बेहतर उपयोग: एकीकृत नियोजन से कार्यों के अनावश्यक दोहराव, बार-बार निर्माण और अवसंरचना निवेश में असंगतियों को कम किया जा सकता है।
  3. लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार: परिवहन नेटवर्क और उत्पादन केंद्रों के बीच मजबूत संपर्क से देरी कम हो सकती है तथा माल की आवाजाही अधिक विश्वसनीय बन सकती है।
  4. निवेश संबंधी निर्णयों में अधिक स्पष्टता: मौजूदा एवं प्रस्तावित अवसंरचना की बेहतर जानकारी निवेश और परियोजना स्थल के चयन से संबंधित निर्णयों को अधिक सूचित बना सकती है।
  5. सार्वजनिक सेवाओं के नियोजन में सुधार: परिवहन और सामाजिक क्षेत्र की सूचनाओं को एक साथ जोड़ने से सरकारों को विद्यालयों, स्वास्थ्य सुविधाओं तथा अन्य सेवाओं की पहुँच में मौजूद कमियाँ पहचानने में सहायता मिल सकती है।

भारत के लिए प्रासंगिकता

  • विनिर्माण की प्रतिस्पर्धात्मकता: विश्वसनीय संपर्क सुविधाएँ आपूर्तिकर्ताओं, बाजारों और निर्यात केंद्रों तक पहुँच बेहतर बना सकती हैं।
  • क्षेत्रीय विकास: जिला-स्तरीय नियोजन से सुविधाओं की कमी वाले क्षेत्रों में अवसंरचना संबंधी अंतराल की पहचान की जा सकती है।
  • सहकारी संघवाद: केंद्रीय मंत्रालयों और सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की भागीदारी, शासन के विभिन्न स्तरों पर समन्वित नियोजन का ढाँचा उपलब्ध कराती है।
  • आपूर्ति शृंखलाओं की मजबूती: बेहतर ढंग से जुड़े परिवहन नेटवर्क किसी मार्ग पर व्यवधान आने की स्थिति में वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध करा सकते हैं।
  • विकसित भारत 2047: एकीकृत अवसंरचना नियोजन, दीर्घकालिक आर्थिक विकास के व्यापक उद्देश्य को समर्थन देता है।

ये संभावित लाभ हैं। इनकी प्राप्ति परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और सेवा वितरण में मापनीय सुधार पर निर्भर करेगी।

प्रमुख चुनौतियाँ

निम्नलिखित बिंदु क्रियान्वयन से जुड़ी विश्लेषणात्मक चुनौतियाँ हैं। इन्हें पाँचवीं वर्षगाँठ की विज्ञप्ति में दर्ज विफलताओं के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

  1. डेटा की सटीकता एवं समय पर अद्यतन: नियोजन संबंधी निर्णय विश्वसनीय जानकारी पर निर्भर करते हैं। पुराने या अधूरे डेटा से प्लेटफॉर्म की उपयोगिता प्रभावित हो सकती है।
  2. प्रशासनिक क्षमता में असमानता: जिला एवं स्थानीय निकायों को अतिरिक्त भू-स्थानिक विशेषज्ञता, प्रशिक्षित कर्मियों और डिजिटल अवसंरचना की आवश्यकता हो सकती है।
  3. क्रियान्वयन के दौरान समन्वय: केवल साझा प्लेटफॉर्म उपलब्ध होने से विभागीय बजट, प्राथमिकताओं और क्रियान्वयन की समय-सारिणी में अंतर स्वतः समाप्त नहीं हो जाते।
  4. भूमि एवं पर्यावरण संबंधी बाधाएँ: भू-स्थानिक नियोजन से बाधाओं की शुरुआती पहचान में सहायता मिल सकती है। फिर भी भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय आकलन और समुदायों के साथ परामर्श के लिए प्रभावी संस्थागत प्रक्रियाएँ आवश्यक हैं।
  5. डेटा सुरक्षा एवं पहुँच का प्रबंधन: सार्वजनिक और निजी भागीदारी के विस्तार के साथ संवेदनशील अवसंरचना संबंधी सूचनाओं तक पहुँच के लिए स्पष्ट नियंत्रण आवश्यक हैं।
  6.  वास्तविक परिणामों का आकलन: केवल मूल्यांकित परियोजनाओं की संख्या और उनके मूल्य से यह सिद्ध नहीं होता कि लॉजिस्टिक्स लागत, देरी या क्षेत्रीय असमानताएँ कम हुई हैं।

आगे की राह

  • डेटा प्रबंधन मजबूत करना: डेटा के सत्यापन, अद्यतन और विभिन्न प्रणालियों के बीच उसके आदान-प्रदान के लिए स्पष्ट जिम्मेदारियाँ तय की जाएँ।
  • जिला-स्तरीय क्षमता बढ़ाना: अधिकारियों को भू-स्थानिक विश्लेषण और एकीकृत नियोजन का प्रशिक्षण दिया जाए।
  • परियोजनाओं की समय-सारिणी में तालमेल: निर्माण की समय-सीमा और सहायक अवसंरचना की आवश्यकताओं का समन्वय किया जाए।
  • मापनीय परिणामों की निगरानी: यात्रा समय, माल परिवहन की विश्वसनीयता, सेवाओं तक पहुँच, परियोजनाओं में देरी और लागत में वृद्धि जैसे संकेतकों को मापा जाए।
  • सततता को नियोजन का हिस्सा बनाना: पर्यावरणीय संवेदनशीलता, आपदा जोखिम और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने की क्षमता को योजनाओं में शामिल किया जाए।
  • ITLA का प्रभावी संचालन: इसके कार्यक्षेत्र, दायित्वों और समन्वय व्यवस्था को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाए।
  • उपयुक्त सार्वजनिक पहुँच बढ़ाना: संवेदनशील सूचनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उपयोगी विश्लेषण सेवाओं का विस्तार किया जाए।

निष्कर्ष

पीएम गतिशक्ति के शुरुआती पाँच वर्ष एक साझा डिजिटल नियोजन प्लेटफॉर्म के ऐसी व्यापक व्यवस्था में विस्तार को दर्शाते हैं, जो अवसंरचना, जिला-स्तरीय विकास और सामाजिक क्षेत्र के नियोजन को समर्थन देती है। इसकी दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि समन्वित नियोजन को समय पर पूरी होने वाली परियोजनाओं, कुशल लॉजिस्टिक्स और आवश्यक सेवाओं तक बेहतर पहुँच में किस हद तक बदला जाता है।

प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न

पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के भू-स्थानिक डिजिटल प्लेटफॉर्म का विकास किस संस्थान ने किया है?

(a) नीति आयोग
(b) भास्कराचार्य राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुप्रयोग एवं भू-सूचना विज्ञान संस्थान
(c) भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण
(d) राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय 

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

“एकीकृत अवसंरचना नियोजन जितना प्रौद्योगिकी-आधारित हस्तक्षेप है, उतना ही शासन संबंधी सुधार भी है।” पीएम गतिशक्ति की उपलब्धियों और इसके क्रियान्वयन से जुड़ी चुनौतियों को रेखांकित करते हुए इस कथन की विवेचना कीजिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान क्या है?

पीएम गतिशक्ति एक राष्ट्रीय ढाँचा है, जो मंत्रालयों, विभागों, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के बीच अवसंरचना नियोजन में समन्वय के लिए साझा भू-स्थानिक डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करता है।

2. पीएम गतिशक्ति की शुरुआत कब हुई थी?

इसकी शुरुआत अक्तूबर 2021 में हुई थी और अक्तूबर 2026 में इसके पाँच वर्ष पूरे हुए।

3. अक्तूबर 2026 तक इसकी प्रमुख उपलब्धियाँ क्या हैं?

इस प्लेटफॉर्म पर 58 केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों और सभी 36 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों से संबंधित 1,800 से अधिक डेटा परतें एकीकृत हैं। NPG ने लगभग ₹20.23 लाख करोड़ मूल्य की 421 परियोजनाओं का मूल्यांकन किया है।

4. नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप क्या कार्य करता है?

NPG एकीकृत नियोजन, बहु-माध्यमीय एवं अंतिम छोर तक संपर्क, लॉजिस्टिक्स दक्षता और समन्वित क्रियान्वयन के आधार पर अवसंरचना प्रस्तावों का मूल्यांकन करता है।

5. एकीकृत परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स प्राधिकरण का उद्देश्य क्या है?

ITLA का उद्देश्य परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स से संबंधित अनुसंधान, नियोजन, परियोजना आकलन, निगरानी और प्रभाव मूल्यांकन को मजबूत करना है, ताकि संपर्क सुविधाओं और अवसंरचना की दक्षता में सुधार हो सके।

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