संदर्भ
- वैश्वीकरण ने लोगों, विचारों, प्रौद्योगिकी और वित्तीय संसाधनों के सीमापार आवागमन को बढ़ावा दिया है। अंतरराष्ट्रीय परोपकार और विकास साझेदारियों से भारत सहित विश्वभर में शिक्षा, स्वास्थ्य, आपदा राहत, अनुसंधान और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों को लाभ मिला है।
- इसके साथ ही, विदेशी वित्तीय प्रवाह में पारदर्शिता, जवाबदेही और राष्ट्रीय संस्थाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी आवश्यक हो गया है। इसलिए अनेक देशों में विदेशी वित्तपोषण का विनियमन शासन का महत्त्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।
- इसी संदर्भ में, विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) एक कानूनी ढाँचा प्रदान करता है, जिसका उद्देश्य वैध अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सक्षम बनाते हुए विदेशी अंशदान की प्राप्ति, उपयोग, लेखांकन और जवाबदेही को भारतीय कानून के अनुरूप सुनिश्चित करना है।
विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) के बारे में
- विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) वह कानून है जो यह नियंत्रित करता है कि भारतीय व्यक्ति, संघ, गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ), ट्रस्ट और कंपनियां भारत से बाहर के किसी स्रोत से भेजे गए धन, प्रतिभूतियों या वस्तुओं को किस प्रकार प्राप्त और उपयोग कर सकते हैं। इसका प्रशासन गृह मंत्रालय द्वारा किया जाता है। सरल शब्दों में, एफसीआरए तीन कार्य करता है:
- यह निर्धारित करता है कि कौन विदेशी अंशदान स्वीकार कर सकता है और किन शर्तों के तहत।
- यह निर्धारित करता है कि उस धन को किस प्रकार प्राप्त किया जाना चाहिए, उसका लेखा-जोखा कैसे रखा जाना चाहिए और उसकी जानकारी कैसे दी जानी चाहिए।
- यह विदेशी वित्तपोषित उन सीमित और स्पष्ट रूप से परिभाषित गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाता है, जो भारत की संप्रभुता, सुरक्षा या लोक व्यवस्था को प्रभावित कर सकती हैं।
एफसीआरए के मुख्य उद्देश्य:
एफसीआरए का उद्देश्य विदेशी अंशदान के नियमन में पारदर्शिता, जवाबदेही और राष्ट्रीय हितों की रक्षा सुनिश्चित करना है। 1976 से अधिनियम में संशोधन होते रहे हैं, इसलिए इसके सभी सिद्धांतों को अपरिवर्तित बताने के बजाय इसके प्रमुख उद्देश्यों के रूप में प्रस्तुत करना अधिक उचित है।
- पारदर्शिता: विदेशी अंशदान प्राप्त करने वाले संगठनों के लिए निर्धारित पंजीकरण, बैंकिंग माध्यमों तथा धन की प्राप्ति और उपयोग का विवरण देने संबंधी नियमों का पालन आवश्यक है।
- जवाबदेही: संगठनों को निर्धारित अवधि में रिटर्न दाखिल करने, लेखा-जोखा रखने और विदेशी अंशदान के स्रोत तथा उपयोग का रिकॉर्ड बनाए रखने की जिम्मेदारी होती है।
- राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा: विदेशी अंशदान का विनियमन राष्ट्रीय सुरक्षा, लोक व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े हितों की रक्षा के उद्देश्य से किया जाता है।
- वैध गतिविधियों को सक्षम बनाना: अधिनियम के प्रावधानों के अधीन शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबी उन्मूलन, आपदा राहत, वैज्ञानिक अनुसंधान और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में वैध विदेशी सहयोग संभव है।
- जनविश्वास बढ़ाना: विदेशी अंशदान की पारदर्शी निगरानी, लेखांकन और जवाबदेही से दाताओं, लाभार्थियों तथा स्वयंसेवी संगठनों के प्रति जनविश्वास मजबूत करने में सहायता मिलती है।
कानून का विकास: पारदर्शिता और जवाबदेही का सुदृढ़ीकरण
भारत में विदेशी अंशदान के विनियमन का ढाँचा समय के साथ विकसित हुआ है। इसका उद्देश्य विदेशी धन की प्राप्ति और उपयोग को कानूनी दायरे में लाना तथा निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करना रहा है।
- 1976 : विदेशी अंशदान और विदेशी आतिथ्य के विनियमन के लिए पहला एफसीआरए लागू किया गया।
- 1984-85 : संशोधनों के माध्यम से पंजीकरण, निगरानी और अनुपालन संबंधी प्रावधानों में बदलाव किए गए।
- 2010-11 : एफसीआरए, 2010 ने पुराने कानून का स्थान लिया। इसमें पंजीकरण के नवीनीकरण, निलंबन, निरस्तीकरण और अनुपालन संबंधी प्रावधान शामिल किए गए।
- 2020 : प्रमुख संशोधनों के तहत एसबीआई, नई दिल्ली की निर्दिष्ट शाखा में खाता, प्रशासनिक व्यय की सीमा 50% से घटाकर 20% करना और उप-अनुदान पर प्रतिबंध जैसे प्रावधान लागू किए गए।
- 2022 : रिश्तेदारों से प्राप्त विदेशी अंशदान की वार्षिक सूचना संबंधी सीमा ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹10 लाख की गई तथा कुछ प्रक्रियागत प्रावधान बदले गए।
- 2024-25 : एफसीआरए नियमों और अनुपालन प्रक्रियाओं में आगे बदलाव किए गए।
- 2026 (प्रस्तावित) : प्रस्तावित एफसीआरए संशोधन विधेयक, 2026 में यह प्रस्ताव किया गया है कि किसी पंजीकरण की अवधि समाप्त होने या उसके निरस्त होने की स्थिति में विदेशी वित्तपोषित परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए एक नामित प्राधिकरण की व्यवस्था की जाए। अधिसूचित एफसीआरए (संशोधन) नियम, 2026 के तहत पंजीकरण को निर्दिष्ट उद्देश्यों तथा अनुमोदित राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से जोड़ा गया है तथा अनुमत धार्मिक गतिविधियों के दायरे से धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से किए जाने वाले प्रचार-प्रसार (प्रोसिलिटाइजेशन) को बाहर रखा गया है।
भारत के दृष्टिकोण के पाँच आधार स्तंभ
1. संप्रभु अधिकार:
- भारत को अपने कानूनों के अनुसार विदेशी वित्तीय प्रवाह और उसके उपयोग को विनियमित करने का अधिकार है।
2. पारदर्शिता और प्रकटीकरण:
- एफसीआरए के तहत विदेशी अंशदान प्राप्त करने वाले पात्र संगठनों को निर्धारित पंजीकरण, बैंकिंग और रिपोर्टिंग संबंधी नियमों का पालन करना होता है।
3. लोकतांत्रिक जवाबदेही:
- विदेशी वित्तपोषण के स्रोत और उपयोग का खुलासा संस्थाओं की जवाबदेही तथा सार्वजनिक निगरानी में सहायक होता है।
4. राष्ट्रीय सुरक्षा:
- विदेशी वित्तीय प्रवाह का विनियमन राष्ट्रीय सुरक्षा, लोक व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं से जुड़े हितों की रक्षा में भूमिका निभाता है।
5. वैश्विक नियामक प्रथाएँ:
- अनेक देश विदेशी वित्तपोषण और राजनीतिक गतिविधियों में विदेशी प्रभाव से संबंधित पारदर्शिता एवं प्रकटीकरण के नियम लागू करते हैं। हालाँकि, इन कानूनों का दायरा और स्वरूप अलग-अलग है।
व्यवहार में एफसीआरए की कार्य प्रणाली
- पंजीकरण और पूर्व अनुमति: संगठन निर्धारित पात्रता के अनुसार एफसीआरए पंजीकरण या किसी विशिष्ट उद्देश्य के लिए पूर्व अनुमति प्राप्त कर सकते हैं।
- निर्धारित बैंक खाता: विदेशी अंशदान सबसे पहले भारतीय स्टेट बैंक की नई दिल्ली मुख्य शाखा के निर्दिष्ट एफसीआरए खाते में प्राप्त किया जाता है।
- घोषित उद्देश्य और व्यय सीमा: प्राप्त धन का उपयोग घोषित उद्देश्यों के अनुरूप करना होता है। प्रशासनिक व्यय की सामान्य सीमा विदेशी अंशदान का 20% है, जब तक सक्षम प्राधिकारी निर्धारित शर्तों के अनुसार छूट न दे।
- वार्षिक विवरणी: संगठनों को प्रपत्र एफसी-4 में निर्धारित वार्षिक विवरणी दाखिल करनी होती है, जिसमें विदेशी अंशदान की प्राप्ति और उपयोग का विवरण दिया जाता है।
- पंजीकरण का नवीनीकरण: एफसीआरए पंजीकरण सामान्यतः पाँच वर्ष के लिए वैध होता है और उसका नवीनीकरण आवश्यक है।
- अपात्र श्रेणियाँ: अधिनियम में निर्दिष्ट व्यक्तियों और संस्थाओं को विदेशी अंशदान प्राप्त करने से प्रतिबंधित किया गया है।
- परिसंपत्तियों का प्रबंधन: पंजीकरण समाप्त होने, निरस्त होने या समर्पित किए जाने की स्थिति में विदेशी अंशदान और उससे निर्मित परिसंपत्तियों के संबंध में एफसीआरए की धारा 15 सहित लागू कानूनी प्रावधानों का पालन आवश्यक है।
पारदर्शी वैश्विक साझेदारियों की रूपरेखा
- विदेशी अंशदान भारत में शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, पर्यावरण संरक्षण और आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में महत्त्वपूर्ण योगदान देते हैं। भारत वैध अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को प्रोत्साहित करते हुए उनके लिए कानूनी ढाँचा उपलब्ध कराता है।
- विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) इस ढाँचे का प्रमुख आधार है। इसका उद्देश्य विदेशी धन की प्राप्ति और उपयोग में पारदर्शिता, जवाबदेही तथा निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित करना और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है।
- एफसीआरए में समय-समय पर किए गए संशोधन इसके नियामक ढाँचे में बदलाव लाते रहे हैं। हालाँकि, 2026 के संशोधनों, उनके लागू होने की स्थिति तथा प्रस्तावित विधेयक के संसद में विचाराधीन होने संबंधी दावों की पुष्टि संबंधित आधिकारिक अधिसूचनाओं और संसदीय अभिलेखों से की जानी चाहिए। अंततः, प्रभावी नियमन का उद्देश्य वैध अंतरराष्ट्रीय सहयोग, पारदर्शी वित्तीय प्रबंधन और जवाबदेह शासन के बीच संतुलन स्थापित करना है।