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अनुच्छेद 370 से राज्य के दर्जे की मांग तक: जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक स्थिति का विकास

चर्चा में क्यों?

  • जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 28 सितंबर 2026 को विधानसभा में जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा तत्काल बहाल करने की मांग से संबंधित प्रस्ताव पेश किया।
  • प्रस्ताव पर कुछ संशोधन भी पेश किए गए, जिनमें अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35A को फिर से शामिल करने की मांग की गई थी। हालांकि, बाद में इन संशोधनों को वापस ले लिया गया।
  • यह घटनाक्रम जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक स्थिति, अनुच्छेद 370, अनुच्छेद 35A और 2019 के संवैधानिक बदलावों को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक स्थिति:

  • भारत की स्वतंत्रता के समय जम्मू-कश्मीर एक रियासत थी, जिसके शासक महाराजा हरि सिंह थे। विभाजन के बाद उन्होंने प्रारंभ में स्वतंत्र रहने का प्रयास किया।
  • अक्टूबर 1947 में पाकिस्तान समर्थित कबायली हमले के बाद महाराजा हरि सिंह ने 26 अक्टूबर 1947 को Instrument of Accession (विलय-पत्र) पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद भारत ने जम्मू-कश्मीर को सैन्य सहायता प्रदान की।
  • विलय-पत्र के अनुसार भारत की संसद को जम्मू-कश्मीर के संबंध में मुख्यतः तीन विषयों पर कानून बनाने का अधिकार मिला था-
    • रक्षा 
    • विदेश मामले 
    • संचार 

इसी विशेष संवैधानिक व्यवस्था की पृष्ठभूमि में बाद में अनुच्छेद 370 अस्तित्व में आया।

अनुच्छेद 370 क्या था?

अनुच्छेद 370 भारतीय संविधान में जम्मू-कश्मीर के लिए एक विशेष संवैधानिक व्यवस्था प्रदान करता था।

इसके तहत -

  • भारतीय संसद की विधायी शक्ति जम्मू-कश्मीर में सीमित थी। 
  • प्रारंभ में केंद्र की विधायी शक्ति मुख्यतः रक्षा, विदेश मामले और संचार से जुड़े विषयों तक सीमित थी। 
  • जम्मू-कश्मीर को अपना अलग संविधान बनाने का अधिकार मिला। 
  • भारतीय संविधान के प्रावधान जम्मू-कश्मीर पर विशेष प्रक्रिया के माध्यम से लागू होते थे। 
  • जम्मू-कश्मीर की अपनी विधानसभा और संवैधानिक व्यवस्था थी। 
  • अनुच्छेद 370 को 17 अक्टूबर 1949 को संविधान सभा द्वारा अपनाया गया था।
  • संविधान सभा में एन. गोपालस्वामी अयंगार ने जम्मू-कश्मीर की विशेष परिस्थितियों को इसके पीछे प्रमुख कारणों में बताया था।

अनुच्छेद 370 की पृष्ठभूमि

  • 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद जम्मू-कश्मीर की स्थिति जटिल थी।
  • पाकिस्तान समर्थित कबायली हमले के बाद महाराजा हरि सिंह ने भारत के साथ विलय किया। इसके बाद भारत ने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को जनवरी 1948 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के समक्ष उठाया।
  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 47 में युद्धविराम, सैन्य बलों की वापसी और जनमत-संग्रह की दिशा में कदमों की बात की गई थी। हालांकि, प्रस्ताव के लिए आवश्यक शर्तें पूरी न होने के कारण जनमत-संग्रह आयोजित नहीं हुआ।
  • इन्हीं परिस्थितियों में जम्मू-कश्मीर के लिए अलग संवैधानिक व्यवस्था विकसित हुई।

दिल्ली समझौता, 1952

अनुच्छेद 370 की व्यवस्था को लेकर जम्मू-कश्मीर और केंद्र के बीच आगे भी बातचीत जारी रही। 1952 में दिल्ली समझौता हुआ।

इसके प्रमुख प्रावधानों में-

  • जम्मू-कश्मीर में सर्वोच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार करना। 
  • भारतीय राष्ट्रीय ध्वज की सर्वोच्चता को स्वीकार करना, जबकि जम्मू-कश्मीर का अपना झंडा भी बना रहना। 
  • आपातकालीन प्रावधानों से संबंधित केंद्र की शक्तियों को कुछ शर्तों के साथ स्वीकार करना। 
  • भारतीय संघ और जम्मू-कश्मीर के बीच संवैधानिक संबंधों को आगे बढ़ाना। 

संबंधित राजनीतिक घटनाक्रम

  • अनुच्छेद 370 का विरोध भी इसी दौर में तेज हुआ। श्यामा प्रसाद मुखर्जी और भारतीय जनसंघ ने जम्मू-कश्मीर के पूर्ण एकीकरण की मांग उठाई।
  • उनसे जुड़ा प्रमुख नारा था- “एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं हो सकते।”

1953 का राजनीतिक घटनाक्रम

  • अगस्त 1953 में शेख अब्दुल्ला को गिरफ्तार किया गया।
  • इसके बाद बख्शी गुलाम मोहम्मद जम्मू-कश्मीर के प्रधानमंत्री बने।
  • इस अवधि में जम्मू-कश्मीर और भारतीय संघ के बीच अधिक संवैधानिक एकीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
  • यह चरण इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 1950 और 1960 के दशकों में कई केंद्रीय संवैधानिक एवं कानूनी प्रावधान जम्मू-कश्मीर तक विस्तारित किए गए।

अनुच्छेद 35A क्या था?

  • 1954 के राष्ट्रपति आदेश के माध्यम से अनुच्छेद 370 के तहत अनुच्छेद 35A को संविधान में जोड़ा गया था।
  • यह सामान्य अनुच्छेद के रूप में संविधान के मुख्य पाठ में नहीं था, बल्कि परिशिष्ट (Appendix) के माध्यम से जोड़ा गया था।

अनुच्छेद 35A की प्रमुख विशेषताएँ

इसने जम्मू-कश्मीर की विधानसभा को “स्थायी निवासी” (Permanent Residents) की परिभाषा निर्धारित करने तथा उन्हें विशेष अधिकार और विशेषाधिकार देने की शक्ति दी।

इनमें मुख्यतः-

  • संपत्ति के अधिकार 
  • सरकारी नौकरियों में अवसर 
  • छात्रवृत्ति 
  • अन्य सार्वजनिक कल्याणकारी सुविधाएँ  शामिल थे।

2019 में अनुच्छेद 370 में क्या बदलाव हुआ?

  • 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर की विशेष संवैधानिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया।
  • इसके लिए प्रमुख रूप से -Constitution (Application to Jammu and Kashmir) Order, 2019 जारी किया गया।
  • इसने 1954 के राष्ट्रपति आदेश का स्थान लिया और भारतीय संविधान के प्रावधानों को जम्मू-कश्मीर पर व्यापक रूप से लागू करने का मार्ग प्रशस्त किया।
  • इसके परिणामस्वरूप-
    • अनुच्छेद 370 को प्रभावहीन कर दिया गया। 
    • जम्मू-कश्मीर का अलग संविधान समाप्त हो गया। 
    • भारतीय संविधान के सभी प्रावधान जम्मू-कश्मीर पर लागू हो गए। 
    • अनुच्छेद 35A भी प्रभावी रूप से समाप्त हो गया। 

अनुच्छेद 370 को कैसे निष्प्रभावी किया गया?

  • अनुच्छेद 370(3) में राष्ट्रपति को यह अधिकार दिया गया था कि वह अधिसूचना द्वारा अनुच्छेद 370 को समाप्त या संशोधित कर सकते हैं।
  • इसमें एक महत्वपूर्ण शर्त थी-
    • राष्ट्रपति को जम्मू-कश्मीर की संविधान सभा की सिफारिश आवश्यक थी।
    • समस्या यह थी कि जम्मू-कश्मीर की संविधान सभा 1957 में भंग हो चुकी थी और दोबारा अस्तित्व में नहीं आई।
    • 2019 में सरकार ने अनुच्छेद 367 में संशोधन के माध्यम से “Constituent Assembly of the State” के संदर्भ को “Legislative Assembly of the State” के रूप में पढ़ने की व्यवस्था की।
    • उस समय जम्मू-कश्मीर विधानसभा निलंबित थी और राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू था।
    • इसलिए संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया में राज्यपाल की भूमिका सामने आई।

जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन, 2019

  • 2019 के संवैधानिक बदलाव के साथ Jammu and Kashmir Reorganisation Act, 2019 के माध्यम से राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में पुनर्गठित किया गया-
    • जम्मू-कश्मीर - विधानसभा वाला केंद्रशासित प्रदेश
    • लद्दाख - बिना विधानसभा वाला केंद्रशासित प्रदेश

इस प्रकार 31 अक्टूबर 2019 से जम्मू-कश्मीर का प्रशासनिक एवं संवैधानिक स्वरूप बदल गया।

सर्वोच्च न्यायालय का 2023 का निर्णय

  • दिसंबर 2023 में सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने के केंद्र सरकार के कदम को बरकरार रखा।
  • न्यायालय ने माना कि अनुच्छेद 370 की प्रकृति अस्थायी थी और यह जम्मू-कश्मीर के भारत के साथ संवैधानिक एकीकरण की प्रक्रिया से संबंधित था।
  • यह निर्णय अनुच्छेद 370 से संबंधित संवैधानिक विवाद को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

वर्तमान मुद्दा: राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग

  • 2026 में जम्मू-कश्मीर विधानसभा में राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग से संबंधित प्रस्ताव सामने आया।
  • यह मुद्दा अनुच्छेद 370 की बहाली से अलग संवैधानिक प्रश्न है।
  • अंतर  
    • राज्य का दर्जा बहाल करना→ जम्मू-कश्मीर को फिर से राज्य बनाना।
    • अनुच्छेद 370 की बहाली→ जम्मू-कश्मीर की पूर्व विशेष संवैधानिक व्यवस्था को पुनर्स्थापित करने का प्रश्न।

इसलिए दोनों मांगों को संवैधानिक रूप से एक ही मुद्दा नहीं माना जाना चाहिए।

Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1. अनुच्छेद 370 क्या था?

उत्तर :- अनुच्छेद 370 भारतीय संविधान में जम्मू-कश्मीर के लिए विशेष संवैधानिक व्यवस्था प्रदान करता था। इसके तहत भारतीय संविधान के प्रावधानों और संसद की विधायी शक्तियों का जम्मू-कश्मीर में विशेष प्रावधानों के अनुसार विस्तार किया जाता था।

Q2. अनुच्छेद 370 को संविधान सभा ने कब अपनाया था?

उत्तर :- अनुच्छेद 370 को 17 अक्टूबर 1949 को संविधान सभा द्वारा अपनाया गया था।

Q3. Instrument of Accession क्या था?

उत्तर :- Instrument of Accession वह कानूनी दस्तावेज था जिसके माध्यम से महाराजा हरि सिंह ने 26 अक्टूबर 1947 को जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय किया। प्रारंभ में इसमें रक्षा, विदेश मामले और संचार जैसे विषय शामिल थे।

Q4. दिल्ली समझौता, 1952 क्या था?

उत्तर :- दिल्ली समझौता 1952 में भारत सरकार और जम्मू-कश्मीर सरकार के बीच हुआ एक समझौता था, जिसने दोनों के संवैधानिक संबंधों को आगे स्पष्ट किया। इसमें सर्वोच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र और भारतीय राष्ट्रीय ध्वज सहित विभिन्न विषय शामिल थे।

Q5. अनुच्छेद 35A क्या था?

उत्तर :- अनुच्छेद 35A को 1954 के राष्ट्रपति आदेश के माध्यम से अनुच्छेद 370 के तहत जोड़ा गया था। इसने जम्मू-कश्मीर की विधानसभा को स्थायी निवासियों को परिभाषित करने और उन्हें कुछ विशेष अधिकार एवं विशेषाधिकार देने की शक्ति प्रदान की।

Q6. 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 के संबंध में क्या हुआ?

उत्तर :- 5 अगस्त 2019 को संवैधानिक बदलाव किए गए, जिसके परिणामस्वरूप अनुच्छेद 370 की विशेष व्यवस्था प्रभावी रूप से समाप्त हो गई और भारतीय संविधान के प्रावधानों को जम्मू-कश्मीर पर व्यापक रूप से लागू किया गया।

Q7. 2019 के बाद अनुच्छेद 35A का क्या हुआ?

उत्तर :- 2019 के संवैधानिक बदलावों के बाद अनुच्छेद 35A प्रभावी नहीं रहा और इससे संबंधित विशेष प्रावधान समाप्त हो गए।

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