चर्चा में क्यों?
हाल ही में भारत की राष्ट्रपति ने फ्रंटियर नागालैंड टेरिटोरियल अथॉरिटी (एफएनटीए) विधेयक, 2026 को अपनी मंजूरी दे दी है। इससे पहले नागालैंड विधानसभा ने इस विधेयक को सर्वसम्मति से पारित किया था।
फ्रंटियर नागालैंड टेरिटोरियल अथॉरिटी विधेयक, 2026 के बारे में
- फ्रंटियर नागालैंड टेरिटोरियल अथॉरिटी विधेयक, 2026 एक महत्वपूर्ण राज्य कानून है, जिसे केंद्रीय गृह मंत्रालय के परामर्श से तैयार किया गया है।
- इसके तहत पूर्वी नागालैंड के छह जिलों के लिए फ्रंटियर नागालैंड टेरिटोरियल अथॉरिटी नामक एक वैधानिक और स्वायत्त स्वशासी निकाय की स्थापना की गई है। इसका उद्देश्य राज्य के संवैधानिक ढांचे के भीतर क्षेत्रीय प्रशासनिक स्वायत्तता सुनिश्चित करना है।
विधेयक के प्रमुख उद्देश्य:
- पूर्वी नागालैंड में विकेंद्रीकृत स्वशासन स्थापित करना,
- बुनियादी ढांचे से जुड़ी असमानताओं को दूर करना तथा क्षेत्र की सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक और भाषाई आकांक्षाओं को पूरा करना।
विधेयक की प्रमुख विशेषताएं:
- छह जिलों में लागू होगा : इस प्राधिकरण का अधिकार क्षेत्र तुएनसांग, मोन, लोंगलेंग, किफिरे, नोकलाक और शामाटोर जिलों तक विस्तृत होगा। इन जिलों में कोन्याक, चांग, फोम और संगतम सहित कई प्रमुख जनजातियां निवास करती हैं।
- वैधानिक और स्वायत्त प्रशासनिक व्यवस्था: विधेयक के तहत एफएनटीए को संवैधानिक सीमाओं के भीतर प्रशासनिक और वित्तीय स्वायत्तता प्रदान की जाएगी। हालांकि, इस क्षेत्र पर कानून बनाने का अधिकार नागालैंड विधानसभा के पास ही रहेगा।
- विकेंद्रीकृत योजना और वित्तीय व्यवस्था: एफएनटीए को वार्षिक विकास योजनाएं तैयार करने तथा संसाधनों के आवंटन और स्थानीय विकास के लिए अलग योजना एवं वित्तीय व्यवस्थाएं स्थापित करने का अधिकार दिया जाएगा।
- वित्तपोषण की विशेष व्यवस्था: प्राधिकरण को राज्य के बजट से जनसंख्या और क्षेत्रफल के अनुपात के आधार पर धन आवंटित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से विशेष विकास अनुदान भी प्रदान किए जाएंगे।
- त्रिपक्षीय सहमति पर आधारित व्यवस्था: यह विधेयक 5 फरवरी 2026 को केंद्र सरकार, नागालैंड सरकार और ईस्टर्न नागालैंड पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन (ईएनपीओ) के बीच हुए समझौता ज्ञापन को लागू करता है। इसके माध्यम से बातचीत के आधार पर तय की गई क्षेत्रीय स्वायत्तता को संस्थागत स्वरूप दिया गया है।
एफएनटीए विधेयक का महत्व:
- क्षेत्रीय स्वायत्तता की लंबे समय से चली आ रही मांग का समाधान: यह प्राधिकरण ईएनपीओ की लंबे समय से चली आ रही स्वायत्तता संबंधी मांगों को संस्थागत रूप से संबोधित करता है। इससे राजनीतिक स्थिरता, समान विकास और प्रशासनिक विकेंद्रीकरण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
- नागालैंड का विभाजन किए बिना विकास: यह व्यवस्था राज्य की सीमाओं को बनाए रखते हुए पूर्वी नागालैंड की विकास संबंधी समस्याओं को दूर करने का प्रयास करती है।
- सहकारी संघवाद को बढ़ावा: यह विधेयक केंद्र और राज्य सरकार के बीच सहयोग तथा क्षेत्र-विशिष्ट स्वायत्तता का उदाहरण प्रस्तुत करता है। लक्षित वित्तीय सहायता के माध्यम से जनजातीय असमानताओं और विकास संबंधी कमियों को दूर करने का प्रयास किया जाएगा, जबकि नागालैंड की क्षेत्रीय अखंडता बनी रहेगी।