संदर्भ
हाल ही में जारी ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स ग्लोबल सिटीज इंडेक्स 2026 में दिल्ली ने दुनिया के 1,000 शहरों में 268वाँ स्थान हासिल किया है।
ग्लोबल सिटीज इंडेक्स के बारे में
- ग्लोबल सिटीज इंडेक्स एक वार्षिक रिपोर्ट है, जिसे वैश्विक आर्थिक सलाहकार संस्था ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स द्वारा जारी किया जाता है।
- इसमें दुनिया के 1,000 शहरों का विभिन्न आर्थिक, सामाजिक और प्रशासनिक मानकों के आधार पर मूल्यांकन किया जाता है।
- इस इंडेक्स में शहरों की रैंकिंग पाँच प्रमुख आधारों पर की जाती है:
- अर्थव्यवस्था
- मानव पूंजी
- जीवन की गुणवत्ता
- पर्यावरण
- शासन
- इस इंडेक्स का उद्देश्य शहर के वर्तमान प्रदर्शन के साथ-साथ भविष्य की विकास क्षमता का भी आकलन करना है।
वर्ष 2026 के प्रमुख निष्कर्ष
- वर्ष 2026 की रैंकिंग में न्यूयॉर्क पहले स्थान पर रहा।
- इसके बाद लंदन दूसरे और पेरिस तीसरे स्थान पर रहे।
- सिएटल चौथे तथा सैन फ्रांसिस्को पाँचवें स्थान पर रहे।
भारतीय शहरों की स्थिति
- रिपोर्ट में दुनिया के 1,000 प्रमुख शहरों में लगभग 100 भारतीय शहर शामिल हैं। प्रमुख भारतीय शहरों की वैश्विक रैंकिंग इस प्रकार है:
- दिल्ली — 268वाँ स्थान
- बेंगलुरु — 311वाँ स्थान
- मुंबई — 330वाँ स्थान
- चेन्नई — 381वाँ स्थान
- हैदराबाद — 421वाँ स्थान
- पुणे — 427वाँ स्थान
- इसके अलावा, 55 भारतीय शहर दुनिया की 100 सबसे तेजी से बढ़ती शहरी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं।
दिल्ली का प्रदर्शन:
- राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली वर्तमान में दुनिया की 63वीं सबसे बड़ी शहरी अर्थव्यवस्था है।
- ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स के अनुमान के अनुसार, वर्ष 2050 तक दिल्ली दुनिया की 14वीं सबसे बड़ी शहरी अर्थव्यवस्था बन सकती है। उस समय इसकी आर्थिक उत्पादन क्षमता 2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक होने का अनुमान है।
- दिल्ली का सबसे बेहतर प्रदर्शन मानव पूंजी के क्षेत्र में रहा, जहाँ इसे वैश्विक स्तर पर 13वाँ स्थान मिला। इस मामले में दिल्ली ने टोरंटो, सियोल और बीजिंग जैसे शहरों से बेहतर प्रदर्शन किया।
मुंबई और बेंगलुरु:
- मुंबई कॉरपोरेट मुख्यालयों की संख्या के मामले में भारत का प्रमुख शहर रहा। इस श्रेणी में मुंबई को वैश्विक स्तर पर 23वाँ स्थान मिला। मुंबई की शहरी अर्थव्यवस्था वर्तमान में दुनिया में 99वें स्थान पर है और वर्ष 2050 तक इसके 36वें स्थान तक पहुँचने का अनुमान है।
- बेंगलुरु ने अपनी वैश्विक रैंकिंग में 20 स्थानों का सुधार करते हुए 311वाँ स्थान हासिल किया। इसे ‘सिटी टू वॉच’ यानी उभरती संभावनाओं वाले शहर के रूप में चिन्हित किया गया है। भारत के छह बड़े महानगरीय शहरों में बेंगलुरु ने सबसे अधिक सुधार दर्ज किया।
- अनुमानित सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि के आधार पर बेंगलुरु दुनिया के 10 सबसे तेजी से बढ़ने वाले शहरों में शामिल है। इसी आधार पर हैदराबाद को 15वाँ और चेन्नई को 16वाँ वैश्विक स्थान मिला।
भारतीय शहरों के सामने चुनौतियाँ:
- रिपोर्ट के अनुसार, समग्र रैंकिंग में 250वें स्थान से नीचे रहने वाले भारतीय शहरों के प्रदर्शन को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारणों में पर्याप्त बुनियादी ढाँचे की कमी और जीवन की गुणवत्ता से जुड़ी चुनौतियाँ शामिल हैं।
- भारतीय शहरों का आय समानता के मामले में भी प्रदर्शन कमजोर रहा है।
- दिल्ली के लिए वायु प्रदूषण एक प्रमुख चुनौती बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, वायु गुणवत्ता के मामले में दिल्ली की स्थिति दुनिया के सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले शहरों में है और उसे इस सूचकांक में दूसरा स्थान दिया गया है।