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भारत समुद्री बीमा पूल: समुद्री व्यापार की सुरक्षा में आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम

संदर्भ 

  • भारत का विदेशी व्यापार बड़े पैमाने पर समुद्री मार्गों पर निर्भर है। कच्चे तेल और अन्य ऊर्जा संसाधनों के आयात से लेकर औद्योगिक उत्पादों के निर्यात तक, समुद्री कनेक्टिविटी देश की अर्थव्यवस्था की आधारभूत जीवनरेखा है। तटीय नौवहन और अंतर्देशीय जलमार्ग इस व्यवस्था को और मजबूत करते हैं। ऐसे में जहाजों, कार्गो और समुद्री देनदारियों के लिए मजबूत बीमा व्यवस्था भी बंदरगाहों और जहाजरानी अवसंरचना जितनी ही महत्वपूर्ण है।  
  • इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए भारत समुद्री बीमा पूल (Bharat Maritime Insurance Pool—BMIP) की शुरुआत घरेलू समुद्री बीमा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में हुई है। 18 अप्रैल 2026 को मंजूरी और 12 मई 2026 को औपचारिक शुरुआत के बाद भारत समुद्री बीमा पूल को भारत की घरेलू समुद्री बीमा क्षमता बढ़ाने के लिए स्थापित किया गया है।    

बढ़ता समुद्री क्षेत्र और बीमा की जरूरत 

  • भारत के समुद्री क्षेत्र का आकार लगातार बढ़ रहा है। 2025-26 में देश के बड़े और छोटे बंदरगाहों ने लगभग 1,668 मिलियन मीट्रिक टन कार्गो संभाला। भारत की करीब 11,098 किलोमीटर लंबी तटरेखा, लगभग 2.4 मिलियन वर्ग किलोमीटर का विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) और 14,500 किलोमीटर से अधिक अंतर्देशीय जलमार्ग इसकी समुद्री क्षमता को दर्शाते हैं। 
  • 2026 के मध्य तक भारतीय ध्वज वाले बेड़े में 1,609 जहाज और 14.33 मिलियन ग्रॉस टनेज (GT) शामिल थे। 2015 के बाद से भार क्षमता में लगभग 36 प्रतिशत वृद्धि हुई है। भारत के व्यापार मूल्य का लगभग 95 प्रतिशत और व्यापार मात्रा का करीब 70 प्रतिशत समुद्री मार्गों से संचालित होता है। समुद्री गतिविधियां मछली पालन, बंदरगाह संचालन, जहाजरानी और जहाज निर्माण समेत अनेक क्षेत्रों में करोड़ों लोगों की आजीविका से जुड़ी हैं। 
  • ऐसे व्यापक समुद्री नेटवर्क में दुर्घटना, टक्कर, प्रदूषण, समुद्री डकैती, प्राकृतिक आपदा और युद्ध जैसे जोखिमों से वित्तीय सुरक्षा आवश्यक हो जाती है।

समुद्री बीमा क्यों महत्वपूर्ण है? 

  • समुद्री बीमा व्यापार के लिए एक अदृश्य वित्तीय सुरक्षा तंत्र की तरह काम करता है। 
  • हुल एंड मशीनरी बीमा जहाज के ढांचे और मशीनरी को नुकसान से सुरक्षा देता है। 
  • कार्गो बीमा समुद्र के रास्ते भेजे जा रहे माल को नुकसान से बचाता है। 
  • प्रोटेक्शन एंड इंडेम्निटी (P&I) बीमा प्रदूषण, मलबा हटाने, चालक दल की दुर्घटनाओं और तीसरे पक्ष की देनदारियों जैसे जोखिमों को कवर करता है। वहीं युद्ध जोखिम बीमा सशस्त्र संघर्ष, समुद्री डकैती, आतंकवाद और अन्य युद्ध-संबंधी जोखिमों से सुरक्षा देता है।
  • इसलिए समुद्री बीमा केवल वित्तीय उत्पाद नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के सुचारू संचालन की एक महत्वपूर्ण व्यावसायिक व्यवस्था है।

विदेशी प्रोटेक्शन एंड इंडेम्निटी क्लबों पर निर्भरता  

  • भारत में समुद्री व्यापार बढ़ने के बावजूद पी एंड आई बीमा के लिए भारतीय जहाज मालिक लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय बीमा बाजार पर निर्भर रहे हैं। इंटरनेशनल ग्रुप ऑफ पी एंड आई क्लब्स के 13 प्रमुख क्लब सामूहिक रूप से दुनिया के बड़े जहाजों के लगभग 90 प्रतिशत हिस्से को पी एंड आई कवरेज देते हैं। 
  • विदेशी बीमा पर निर्भरता का आर्थिक प्रभाव भी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भारत से हर वर्ष लगभग 45–60 मिलियन अमेरिकी डॉलर पी एंड आई प्रीमियम के रूप में विदेश जाते हैं। इसके अतिरिक्त, अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रीमियम, कवरेज और जोखिम मूल्यांकन में बदलाव का असर भारतीय जहाज मालिकों और व्यापारियों की लागत पर पड़ सकता है।    

भू-राजनीतिक तनाव ने बढ़ाई चुनौती 

  • लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में तनाव ने समुद्री व्यापार के जोखिमों को और स्पष्ट किया है। संवेदनशील क्षेत्रों से गुजरने वाले जहाजों के लिए युद्ध जोखिम बीमा की लागत बढ़ सकती है या कवरेज की शर्तें बदल सकती हैं। 
  • भारत के लिए यह चुनौती इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ऊर्जा संसाधनों, विशेषकर कच्चे तेल, का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों से आता है। ऐसे में घरेलू समुद्री बीमा क्षमता एक अतिरिक्त वित्तीय सुरक्षा तंत्र के रूप में काम कर सकती है।

भारत समुद्री बीमा पूल (BMIP) की संरचना और प्रमुख विशेषताएं 

  • बीएमआईपी की कुल संरचना 13,906.50 करोड़ रुपये (लगभग 1.5 अरब अमेरिकी डॉलर) की है। इसमें 12,980 करोड़ रुपये (लगभग 1.4 अरब अमेरिकी डॉलर) की सरकारी गारंटी शामिल है। इसका उद्देश्य बड़े समुद्री जोखिमों के लिए घरेलू स्तर पर पर्याप्त अंडरराइटिंग क्षमता विकसित करना है।
  • पूल के तहत भारतीय ध्वज वाले जहाजों तथा भारतीय संस्थाओं के स्वामित्व, प्रबंधन या नियंत्रण वाले पात्र जहाजों को कवरेज मिल सकती है। भारत से संचालित या भारत आने वाले पात्र मालवाहक जहाज भी निर्धारित शर्तों के तहत इसके दायरे में आते हैं।
  • पूल की प्रारंभिक अवधि 10 वर्ष है, जिसे निर्धारित व्यवस्था के अनुसार 15 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। इसकी पॉलिसियां पूल के सदस्य घरेलू बीमाकर्ताओं द्वारा संयुक्त जोखिम-अंकन क्षमता के आधार पर जारी की जाएंगी।

दावों के निपटान की व्यवस्था 

  • बीएमआईपी में दावों के लिए बहु-स्तरीय व्यवस्था बनाई गई है। 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक के दावों का निपटान पूल के आरक्षित कोष और पुनर्बीमा से प्राप्त राशि के माध्यम से किया जाएगा। बड़े दावों की स्थिति में सरकारी गारंटी का उपयोग पूल के आरक्षित कोष के समाप्त होने के बाद किया जाना है। 
  • जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (GIC) पूल मैनेजर के रूप में इसके दैनिक संचालन और प्रशासनिक कार्यों को संभालता है। एक गवर्निंग बॉडी संचालन की निगरानी करती है, जबकि अंडरराइटिंग कमेटी जोखिमों के मूल्यांकन और निर्धारित अंडरराइटिंग मानकों के पालन में भूमिका निभाती है।

बीएमआईपी के तहत प्रमुख कवरेज 

  • बीएमआईपी के दायरे में हुल एंड मशीनरी, कार्गो, पी एंड आई और युद्ध जोखिम जैसी प्रमुख समुद्री बीमा कवरेज शामिल हैं।  
  • हुल एंड मशीनरी युद्ध कवरेज जहाज के ढांचे, प्रोपल्शन सिस्टम और मशीनरी को युद्ध-संबंधी नुकसान से सुरक्षा देती है। कार्गो युद्ध कवरेज अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों से गुजरने वाले माल को युद्ध जोखिम से बचाती है। पी एंड आई कवरेज प्रदूषण, मलबा हटाने, चालक दल की दुर्घटनाओं और तीसरे पक्ष की देनदारियों से संबंधित सुरक्षा देती है। युद्ध जोखिम कवरेज सशस्त्र संघर्ष, समुद्री डकैती, आतंकवाद और अन्य संबंधित जोखिमों से वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है।   

शुरुआत के बाद की उपलब्धियां 

  • 7 सितंबर 2026 तक बीएमआईपी ने 3,000 कार्गो युद्ध जोखिम, 92 जहाज हुल युद्ध जोखिम और 3 पी एंड आई पॉलिसियां जारी की थीं।
  • 30 जुलाई 2026 को बीएमआईपी के तहत भारत की पहली पी एंड आई पॉलिसी शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड को जारी की गई। इसे द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड ने जारी किया।  
  • 12 मई 2026 को ही संघर्ष प्रभावित क्षेत्र से गुजरने वाले एक जहाज के लिए पहली युद्ध जोखिम पॉलिसी जारी की गई थी। यह पॉलिसी होगर ऑफशोर एंड मरीन प्राइवेट लिमिटेड को दी गई।
  • इसके अलावा वेदांता स्टरलाइट कॉपर लिमिटेड को समुद्री कार्गो युद्ध जोखिम पॉलिसी जारी की गई, जिससे आयातित केबल और तारों से जुड़े समुद्री परिवहन जोखिमों के लिए सुरक्षा मिली। बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड को जारी पॉलिसी यह दर्शाती है कि बीएमआईपी की उपयोगिता केवल जहाज मालिकों तक सीमित नहीं है, बल्कि समुद्री परिवहन पर निर्भर औद्योगिक और वाणिज्यिक कंपनियां भी इसका लाभ उठा सकती हैं।   

आगे की राह 

  • बीएमआईपी के सामने अब अपनी शुरुआती क्षमता को दीर्घकालिक और टिकाऊ समुद्री बीमा व्यवस्था में बदलने की चुनौती है। इसके लिए समुद्री जोखिम मूल्यांकन, डेटा विश्लेषण, अंडरराइटिंग, दावों के निपटान, कानूनी विशेषज्ञता और अंतरराष्ट्रीय पुनर्बीमा साझेदारियों को मजबूत करना महत्वपूर्ण होगा। 
  • दीर्घकाल में बीएमआईपी भारत में समुद्री बीमा विशेषज्ञता विकसित करने के साथ हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री बीमा के संभावित क्षेत्रीय केंद्र के रूप में देश की भूमिका को भी मजबूत कर सकता है। 

निष्कर्ष 

  • भारत के बढ़ते समुद्री व्यापार के साथ समुद्री जोखिमों के लिए मजबूत घरेलू वित्तीय सुरक्षा की जरूरत भी बढ़ रही है। 13,906.50 करोड़ रुपये की कुल संरचना और 12,980 करोड़ रुपये की सरकारी गारंटी वाला बीएमआईपी इसी आवश्यकता को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संस्थागत कदम है।  
  • जहाजों और कार्गो से लेकर पी एंड आई और युद्ध जोखिम तक व्यापक कवरेज उपलब्ध कराने की क्षमता के साथ यह पूल भारत की समुद्री बीमा व्यवस्था में घरेलू क्षमता विकसित करने का प्रयास है। इसकी दीर्घकालिक भूमिका इस बात पर निर्भर करेगी कि यह जोखिमों का आकलन, दावों का निपटान, पुनर्बीमा और वित्तीय स्थिरता कितनी प्रभावी ढंग से संभाल पाता है। भारत की समुद्री अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ बीएमआईपी देश की समुद्री वित्तीय सुरक्षा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है। 
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