संदर्भ
हाल ही में पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने भारत और पोलैंड के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से 100 सदस्यीय कारोबारी प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत का दौरा किया।
भारत-पोलैंड द्विपक्षीय संबंधों के बारे में
- भारत और पोलैंड के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध हैं। अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वारसॉ यात्रा के दौरान इन संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया गया था।
- दोनों देशों के बीच सहयोग भारत-पोलैंड कार्ययोजना (2024–2028) के तहत संचालित होता है। यह व्यापक भारत-यूरोपीय संघ रणनीतिक एजेंडे का हिस्सा है और भारत तथा मध्य एवं पूर्वी यूरोप के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु का काम करता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
- द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान शरण — जाम साहब का योगदान: द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नवानगर (जामनगर) के महाराजा दिग्विजयसिंहजी रणजीतसिंहजी और कोल्हापुर रियासत ने हजारों पोलिश शरणार्थी महिलाओं और बच्चों को आश्रय दिया था। इस मानवीय योगदान ने दोनों देशों के समाजों के बीच स्थायी संबंध स्थापित किए। इस विरासत को जाम साहब स्मृति युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम के माध्यम से भी सम्मानित किया जाता है।
- प्रारंभिक राजनयिक मान्यता: भारत और पोलैंड के बीच वर्ष 1954 में औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित हुए। इन संबंधों की नींव आपसी सम्मान, गुटनिरपेक्षता और औपनिवेशिक शासन के बाद के दौर में साझा व्यापारिक हितों पर आधारित थी।
- भारतीय अध्ययन की अकादमिक परंपरा: पोलैंड में भारतीय विद्या और संस्कृत के अध्ययन की समृद्ध परंपरा है। क्राकोव स्थित ऐतिहासिक यागेलोनियन विश्वविद्यालय में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के भारतीय अध्ययन पीठ जैसी संस्थाएं इस परंपरा को आगे बढ़ाती हैं।
- ऑपरेशन गंगा के दौरान मानवीय सहायता (2022): यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद सीमा पार फंसे 2,000 से अधिक भारतीय विद्यार्थियों को निकालने के लिए पोलिश अधिकारियों ने पारगमन और रसद संबंधी सहायता प्रदान की थी।
द्विपक्षीय बैठक के प्रमुख परिणाम
- वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य: दोनों देशों ने लगभग 6 अरब डॉलर के मौजूदा आधार से द्विपक्षीय व्यापार को वर्ष 2030 तक दोगुना करने की प्रतिबद्धता जताई। इसमें प्रस्तावित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर और उसके क्रियान्वयन से सहयोग मिलने की उम्मीद है।
- रक्षा उद्योग संवाद की स्थापना: रक्षा विनिर्माण में संयुक्त उद्यम, सैन्य प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, संयुक्त विकास और संयुक्त उत्पादन की संभावनाएं तलाशने के लिए एक व्यवस्थित कारोबारी तथा संस्थागत तंत्र स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया।
- गोपनीय सूचनाओं से संबंधित समझौते में प्रगति: गोपनीय सूचनाओं के पारस्परिक संरक्षण और आदान-प्रदान संबंधी समझौते पर वार्ता आगे बढ़ाई गई। यह औपचारिक सैन्य उपकरण अनुबंधों पर हस्ताक्षर करने के लिए एक आवश्यक शर्त है।
- बहुपक्षीय मंचों पर समर्थन: पोलैंड ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की मांग और वर्ष 2028–29 के कार्यकाल के लिए अस्थायी सदस्यता संबंधी दावेदारी का समर्थन दोहराया। वहीं, भारत ने जी-20 की कार्यप्रणाली से जुड़े विषयों में पोलैंड की भागीदारी की इच्छा को स्वीकार किया।
- रूस-यूक्रेन संघर्ष का समाधान: दोनों देशों ने भारत के चार सूत्रीय प्रस्ताव पर चर्चा की। इसका उद्देश्य नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले रोकना, काला सागर के माध्यम से ऊर्जा और अनाज के परिवहन गलियारों को सुगम बनाना तथा वाणिज्यिक जहाजों के नाविकों पर हमलों को रोकना है।
- महत्त्वपूर्ण खनिज, खनन और चक्रीय अर्थव्यवस्था: दोनों देशों ने भूविज्ञान, खनन और महत्त्वपूर्ण खनिजों पर समझौता ज्ञापन के लिए बातचीत करने पर सहमति जताई। इसमें स्वच्छ कोयला निष्कर्षण, दुर्लभ मृदा तत्वों के शोधन और औद्योगिक बैटरियों के पुनर्चक्रण पर ध्यान दिया जाएगा।
- संपर्क और संस्थागत सहयोग: दोनों देशों ने सीधी हवाई सेवाओं के विस्तार, भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) के तहत बंदरगाहों के बीच बेहतर समन्वय, ध्रुवीय वैज्ञानिक अनुसंधान और आपदा-रोधी अवसंरचना गठबंधन (सीडीआरआई) में पोलैंड की भागीदारी की संभावनाओं पर विचार किया।
भारत-पोलैंड संबंधों से जुड़ी प्रमुख चुनौतियां
- भू-राजनीतिक मतभेद: सैन्य गठबंधनों और ऐतिहासिक रणनीतिक संबंधों को लेकर दोनों देशों की चिंताएं अलग-अलग हैं। पोलैंड को आशंका है कि भारत-रूस रक्षा सहयोग के माध्यम से यूरोपीय सैन्य प्रौद्योगिकी की संवेदनशील जानकारी मॉस्को तक पहुंच सकती है। वहीं, भारत को पाकिस्तान को पोलैंड द्वारा अतीत में किए गए रक्षा उपकरण हस्तांतरण को लेकर आपत्तियां रही हैं।
- गोपनीय सूचनाओं की सुरक्षा संबंधी समझौते में देरी: गोपनीय सूचनाओं के पारस्परिक संरक्षण और आदान-प्रदान संबंधी समझौते को अंतिम रूप देने में देरी से बड़े रक्षा परियोजनाओं पर असर पड़ रहा है। उदाहरण के लिए, भारतीय और पोलिश विमानन तथा बख्तरबंद वाहन निर्माता तकनीकी प्रारूप साझा करने और संयुक्त उत्पादन अनुबंधों को अंतिम रूप देने में कठिनाइयों का सामना कर सकते हैं।
- सीमित द्विपक्षीय व्यापार: दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग 6 अरब डॉलर तक सीमित है, जबकि पोलैंड की अर्थव्यवस्था का आकार लगभग एक लाख करोड़ डॉलर है और भारत आने वाले वर्षों में 10 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य रखता है। गैर-टैरिफ नियामकीय बाधाएं तथा कृषि और औषधि क्षेत्रों में बाजार तक पहुंच की समस्याएं भारतीय निर्यात को सीमित करती हैं।
- रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर अलग-अलग प्राथमिकताएं: पोलैंड रूस के सैन्य अभियान को अपनी सीमाओं के निकट एक गंभीर क्षेत्रीय और अस्तित्वगत खतरे के रूप में देखता है। इसके विपरीत, भारत रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए ऊर्जा आयात करता है और मॉस्को तथा कीव, दोनों के साथ संवाद जारी रखता है।
भारत के लिए पोलैंड का महत्त्व
- मध्य एवं पूर्वी यूरोप का प्रवेश द्वार: पोलैंड की भौगोलिक स्थिति, परिवहन अवसंरचना और विसेग्राद समूह में उसकी भागीदारी भारतीय कंपनियों को यूरोपीय आपूर्ति श्रृंखलाओं तक पहुंचने का अवसर देती है।
- औद्योगिक और स्वच्छ प्रौद्योगिकी में पूरकता: गहरी भूमिगत खदानों, स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकी, रेलवे के डिब्बों और उपकरणों तथा बैटरी पुनर्चक्रण में पोलैंड की विशेषज्ञता भारत के घरेलू विनिर्माण कार्यक्रमों के लिए उपयोगी हो सकती है।
- यूरोपीय संघ में प्रभावशाली भूमिका: यूरोपीय संघ के एक प्रभावशाली सदस्य के रूप में पोलैंड भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते, निवेश संधियों तथा भारत-यूरोपीय संघ सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी के शीघ्र क्रियान्वयन का समर्थन कर सकता है।
आगे की राह
- विसेग्राद समूह-प्लस-भारत संवाद को संस्थागत बनाना: विसेग्राद चार देशों के समूह के माध्यम से मंत्रिस्तरीय और व्यापारिक संवाद बढ़ाया जाए। इससे क्षेत्रीय संपर्क, अर्धचालक प्रौद्योगिकी और आईएमईसी के तहत बंदरगाह एकीकरण को बढ़ावा मिल सकता है।
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विसेग्राद समूह (V4):
- विसेग्राद समूह (V4) मध्य यूरोप के चार देशों - पोलैंड, चेक गणराज्य, स्लोवाकिया और हंगरी के बीच सहयोग का एक अनौपचारिक क्षेत्रीय प्रारूप है, जो न केवल पड़ोस और समान भू-राजनीतिक स्थिति से जुड़े हुए हैं, बल्कि सबसे बढ़कर साझा इतिहास, परंपराओं, संस्कृति और मूल्यों से भी जुड़े हुए हैं।
- इस समूह का उद्देश्य लोकतांत्रिक राज्य संरचनाओं और मुक्त बाजार अर्थव्यवस्थाओं के निर्माण में सहयोग को सुदृढ़ करना और दीर्घकालिक रूप से यूरोपीय एकीकरण की प्रक्रिया में भाग लेना था।
- इसकी स्थापना 15 फरवरी 1991 को हुई थी, जब पोलैंड और चेकोस्लोवाकिया के राष्ट्रपतियों लेच वालेसा और वाक्लाव हावेल तथा हंगरी के प्रधानमंत्री जोसेफ एंटाल ने हंगरी के विसेग्राद शहर में सहयोग के उद्देश्यों और शर्तों पर एक संयुक्त घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए थे।
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- गोपनीय सूचना संरक्षण समझौते को अंतिम रूप देना: साझा खुफिया जानकारी की सुरक्षा के लिए कानूनी ढांचे को शीघ्र पूरा किया जाए, ताकि संयुक्त रक्षा विनिर्माण परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा सके।
- मुक्त व्यापार समझौते का लाभ उठाना: भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देकर लागू किया जाए, जिससे वस्त्र, वाहन कलपुर्जों और जेनेरिक दवाओं के निर्यात में शुल्क संबंधी बाधाएं कम हो सकें।
- महत्त्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखला विकसित करना: खनन और महत्त्वपूर्ण खनिजों से संबंधित प्रस्तावित समझौता ज्ञापन को अंतिम रूप दिया जाए, ताकि भारत को यूरोपीय खनन, शोधन और पुनर्चक्रण प्रौद्योगिकियों तक पहुंच मिल सके।
निष्कर्ष
- पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की भारत यात्रा ने दोनों देशों के संबंधों को नई गति दी है। इस यात्रा का उद्देश्य ऐतिहासिक सद्भावना को आधुनिक आर्थिक, औद्योगिक और रक्षा साझेदारी में बदलना है। वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सुरक्षा संबंधी समझौतों को अंतिम रूप देना, बाजार तक पहुंच बेहतर बनाना और भू-राजनीतिक मतभेदों का प्रबंधन करना आवश्यक होगा।
- वस्तुतः महत्त्वपूर्ण खनिजों, परिवहन संपर्क, रक्षा विनिर्माण और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाकर भारत और पोलैंड यूरोप तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और आर्थिक विकास को मजबूत करने वाली दीर्घकालिक साझेदारी स्थापित कर सकते हैं।