भारत का स्वदेशी मानवरहित सतही पोत (USV): नौसैनिक तकनीक में आत्मनिर्भरता की नई उपलब्धि

चर्चा में क्यों?

  • भारत ने स्वदेशी मानवरहित सतही पोत (Unmanned Surface Vessel—USV) विकसित कर नौसैनिक तकनीक के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। 
  • सागर डिफेंस इंजीनियरिंग (Sagar Defence Engineering) द्वारा विकसित ये पोत भारतीय नौसेना की निगरानी, टोही और विशेष सैन्य अभियानों की क्षमता को मजबूत कर सकते हैं। 
  • इन्हें दिल्ली में आयोजित भारतीय नौसेना के ‘स्वावलंबन’ (Swavlamban) नवाचार एवं स्वदेशीकरण कार्यक्रम में प्रदर्शित किया गया।
  • यह विकास ऐसे समय में महत्त्वपूर्ण है, जब रूस-यूक्रेन युद्ध और लाल सागर सहित विभिन्न समुद्री क्षेत्रों में मानवरहित प्रणालियों का उपयोग नौसैनिक रणनीतियों को बदल रहा है।

मानवरहित सतही पोत (USV) क्या है?

  • मानवरहित सतही पोत एक ऐसी नौका या जलयान है, जिसे चालक दल के बिना संचालित किया जाता है। 
  • इसका संचालन दूर से नियंत्रित करके या उपलब्ध स्वायत्त प्रणालियों की सहायता से किया जा सकता है। 
  • इसमें सेंसर, कैमरे, नेविगेशन प्रणाली और मिशन के अनुसार अन्य उपकरण लगाए जा सकते हैं।
  • इसके प्रमुख उपयोगों में समुद्री निगरानी, टोही, तटीय सुरक्षा, संदिग्ध जहाजों की पहचान, सैन्य बलों की सुरक्षा और विशेष अभियानों में सहायता शामिल हैं। 
  • सशस्त्र USV का उपयोग उपयुक्त प्रणालियों से लैस होने पर लक्षित सैन्य कार्रवाई के लिए भी किया जा सकता है।

सागर डिफेंस इंजीनियरिंग 

  • सागर डिफेंस इंजीनियरिंग की स्थापना वर्ष 2015 में कैप्टन निकुंज पराशर और उनके सह-संस्थापकों ने की थी। 
  • कंपनी भारतीय सशस्त्र बलों, विशेषकर नौसेना, के लिए स्वायत्त नौकाओं, मानवरहित प्रणालियों और ड्रोन तकनीक पर काम करती है। 
  • इसकी यात्रा रक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों, स्टार्टअप और स्वदेशी अनुसंधान की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है।
  • कंपनी ने भारतीय नौसेना के iDEX-Sprint अनुबंध के अंतर्गत 12 सशस्त्र मानवरहित सतही पोतों की आपूर्ति शुरू की है। इनमें ‘मातंगी’ (Matangi) पोत भी शामिल है।

मातंगी USV की प्रमुख विशेषताएँ

  • मातंगी जैसे उच्च गति वाले इंटरसेप्टर पोतों को निगरानी और आक्रामक अभियानों के लिए तैयार किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें 12.7 मिमी की स्थिर रिमोट-नियंत्रित गन प्रणाली, उन्नत इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल एवं रडार ट्रैकिंग और जामिंग-रोधी GPS नेविगेशन जैसी क्षमताएँ शामिल हैं।
  • इनका उपयोग उथले जलक्षेत्रों में गश्त, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और आवश्यकता के अनुसार विशेष अभियानों में किया जा सकता है। 
  • कुछ पोतों को पूर्वी लद्दाख की पैंगोंग त्सो झील में सेना की गश्त के लिए भी तैनात किए जाने की जानकारी दी गई है।
  • कंपनी बहु-उपयोगी क्वाडकॉप्टर और हेक्साकॉप्टर ड्रोन भी बनाती है। इसके अतिरिक्त, इजराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) के साथ मिलकर ‘पॉइंट ब्लैंक’ (Point Blank) नामक सटीक प्रहार प्रणाली के विकास एवं भारत में परिचय पर भी काम किया गया है।

स्वावलंबन प्रदर्शनी का महत्त्व

  • भारतीय नौसेना की स्वावलंबन पहल का उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में नवाचार, स्वदेशी तकनीक और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना है। 
  • इसके माध्यम से नौसेना, रक्षा उद्योग, स्टार्टअप और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित किया जाता है।
  • इस प्रदर्शनी में अन्य कंपनियों ने भी मानवरहित समुद्री प्रणालियों और संबंधित तकनीकों का प्रदर्शन किया। 
  • जेन टेक्नोलॉजीज ने बहुउद्देशीय स्वायत्त सतही पोत का प्रोटोटाइप प्रस्तुत किया, जबकि C14 ने ‘तांडव’ नामक स्वायत्त पोत मंच और गोताखोरों के लिए AquaScan प्रणाली प्रदर्शित की। 
  • अंतरिक्ष क्षेत्र की कंपनी GalaxEye ने उपग्रह आधारित समुद्री निगरानी समाधान प्रस्तुत किया।
  • ये पहल दर्शाती हैं कि भारत में समुद्री सुरक्षा के लिए केवल नौकाओं ही नहीं, बल्कि सेंसर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उपग्रह और संचार प्रणालियों के एकीकृत उपयोग पर भी जोर बढ़ रहा है।

भारत के लिए USV का सामरिक महत्त्व

  1. समुद्री निगरानी में वृद्धि: मानवरहित पोत भारतीय समुद्री क्षेत्र और महत्त्वपूर्ण समुद्री मार्गों की निगरानी में सहायता कर सकते हैं।
  2. सैनिकों के जोखिम में कमी: जोखिमपूर्ण क्षेत्रों में बिना चालक दल के पोत भेजने से नौसैनिक कर्मियों के जीवन को होने वाला खतरा कम किया जा सकता है।
  3. त्वरित सैन्य प्रतिक्रिया: उच्च गति वाले इंटरसेप्टर पोत संदिग्ध नौकाओं की पहचान, निगरानी और आवश्यक कार्रवाई में सहायता कर सकते हैं।
  4. हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा: समुद्री व्यापार मार्गों, बंदरगाहों और रणनीतिक समुद्री क्षेत्रों की निगरानी अधिक प्रभावी बनाई जा सकती है।
  5. रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता: स्वदेशी विकास से विदेशी तकनीक पर निर्भरता घटाने, घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहित करने और भविष्य में रक्षा निर्यात की संभावनाएँ बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
  6. तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहन: निजी कंपनियों और स्टार्टअप की भागीदारी से कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वायत्त नेविगेशन, सेंसर और समुद्री रोबोटिक्स के क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा मिल सकता है।

प्रमुख चुनौतियाँ

  • मानवरहित समुद्री प्रणालियों के विस्तार के साथ कुछ चुनौतियाँ भी जुड़ी हैं। 
  • इनमें साइबर हमलों और संचार बाधित होने का जोखिम, GPS जामिंग, प्रतिकूल मौसम में संचालन, समुद्री परिस्थितियों में सेंसर की विश्वसनीयता और स्वायत्त प्रणालियों पर प्रभावी मानवीय नियंत्रण सुनिश्चित करना शामिल है।
  • इसके अतिरिक्त, इन प्रणालियों का अन्य नौसैनिक प्लेटफॉर्म के साथ समन्वय, रखरखाव, लागत, परीक्षण और बड़े पैमाने पर उत्पादन भी महत्त्वपूर्ण हैं। 
  • सशस्त्र स्वायत्त प्रणालियों के उपयोग में जवाबदेही तथा अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के अनुरूप संचालन सुनिश्चित करना आवश्यक होगा।

आगे की राह

  • भारत को मानवरहित सतही पोतों के विकास के साथ सुरक्षित संचार, साइबर सुरक्षा, स्वदेशी सेंसर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और विश्वसनीय नेविगेशन प्रणालियों में निवेश बढ़ाना चाहिए। 
  • नौसेना, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), निजी उद्योग और स्टार्टअप के बीच सहयोग को मजबूत किया जाना चाहिए।
  • इसके साथ ही, वास्तविक समुद्री परिस्थितियों में परीक्षण, नियमित रखरखाव, प्रशिक्षित मानव संसाधन और स्पष्ट परिचालन मानक विकसित करने की आवश्यकता है। 
  • मानवरहित पोतों को पारंपरिक युद्धपोतों, समुद्री गश्ती विमानों और उपग्रह निगरानी प्रणालियों के पूरक के रूप में विकसित करना अधिक प्रभावी रणनीति होगी।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1. मानवरहित सतही पोत (USV) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।

  1. इसका संचालन दूर से नियंत्रित करके या स्वायत्त प्रणाली के माध्यम से किया जा सकता है।
  2. इसका उपयोग समुद्री निगरानी और टोही के लिए किया जा सकता है।
  3. प्रत्येक USV में अनिवार्य रूप से हथियार लगे होते हैं।

उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

(A) केवल 1 और 2
(B) केवल 2 और 3
(C) केवल 1 और 3
(D) 1, 2 और 3

« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT