संदर्भ
हाल ही में भारतीय नौसेना ने मुंबई स्थित नौसेना गोदी में स्वदेशी युद्धपोत आईएनएस मंगरोल (पी82)को कमीशन किया। कमीशनिंग समारोह की अध्यक्षता पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय वत्सायन ने की।
आईएनएस मंगरोल के बारे में
- यह माहे श्रेणी का तीसरा पनडुब्बी रोधी उथले पानी का युद्धपोत (एएसडब्ल्यू-एसडब्ल्यूसी) है।
- आईएनएस मंगरोल का नाम गुजरात के जूनागढ़ जिले में स्थित तटीय शहर और प्रमुख मछली पकड़ने वाले बंदरगाह मंगरोल के नाम पर रखा गया है।
- यह युद्धपोत पूर्ववर्ती आईएनएस मंगरोल (एम85) की विरासत को भी आगे बढ़ाता है, जो एक बारूदी सुरंग रोधी युद्धपोत था और अप्रैल 2004 तक भारतीय नौसेना में सेवारत रहा।
- कोच्चि स्थित कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा स्वदेशी तकनीक से डिजाइन और निर्मित आईएनएस मंगरोल भारत की युद्धपोत निर्माण व आधुनिक नौसैनिक प्रणालियों के एकीकरण की बढ़ती क्षमता का प्रतीक है।
- इस युद्धपोत में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ की पहल के लिए देश की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- इसके निर्माण में भारतीय रक्षा उद्योगों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के योगदान ने स्वदेशी नौसैनिक क्षमताओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
विशेषताएं:
- आईएनएस मंगरोल तटीय क्षेत्रों व कम गहरे समुद्री जल में संचालन के लिए डिजाइन किया गया पनडुब्बी रोधी युद्धपोत (एएसडब्ल्यू) है, जो पानी के भीतर निगरानी, कम तीव्रता वाले समुद्री अभियानों (एलआईएमओ) और बारूदी सुरंगों से जुड़े अभियानों को अंजाम देने में सक्षम है।
- इसके आधुनिक सेंसर, सोनार व हथियार प्रणालियां चुनौतीपूर्ण तटीय परिस्थितियों में पानी के नीचे मौजूद खतरों का पता लगाने, उनकी निगरानी करने और उनसे निपटने की क्षमता बढ़ाती हैं।
- तीन डीजल इंजनों से संचालित वॉटरजेट प्रपल्शन प्रणाली से लैस यह युद्धपोत तेजी से दिशा बदल सकता है और तुरंत प्रतिक्रिया दे सकता है, जिससे संकरे एवं कम गहरे समुद्री क्षेत्रों में इसका संचालन अधिक प्रभावी होता है।
महत्त्व:
- आईएनएस मंगरोल का भारतीय नौसेना में शामिल होना पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता और तटीय सुरक्षा को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह युद्धपोत भारत के तटीय क्षेत्रों और समुद्री हितों की रक्षा करने, समुद्री क्षेत्र की निगरानी बढ़ाने तथा पानी के नीचे मौजूद खतरों से निपटने में योगदान देगा।
- इसके भारतीय नौसेना में शामिल होने से समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और स्वदेशी युद्धपोत निर्माण में आत्मनिर्भरता के प्रति भारतीय नौसेना की वचनबद्धता को बल मिलेगा। साथ ही, यह हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के समुद्री हितों की सुरक्षा और रक्षा तैयारियों को सुदृढ़ करने में सहायक होगा।