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एकीकृत वायुमंडलीय रसायन विज्ञान और एयरोसोल विषाक्तता विश्लेषण प्रयोगशाला' (एएटीएएल)

संदर्भ  

हाल ही में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने नई दिल्ली स्थित भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) की शाखा में दुनिया में अपनी तरह की पहली एकीकृत वायुमंडलीय रसायन विज्ञान और एयरोसोल विषाक्तता विश्लेषण प्रयोगशाला (एएटीएएल) का उद्घाटन किया।   

एएटीएएल के बारे में  

  • एएटीएएल एक अत्याधुनिक, एकीकृत वायुमंडलीय अनुसंधान और एयरोसोल विषाक्तता प्रयोगशाला है। 
  • इसका उद्देश्य वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार प्रदूषकों की आणविक संरचना, रासायनिक परिवर्तन की प्रक्रियाओं और वास्तविक समय में उत्सर्जन के सटीक स्रोतों की पहचान करना है। इसके साथ ही, यह प्रदूषण के कारण कोशिकाओं पर पड़ने वाले विषैले प्रभावों और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों का आकलन भी करती है। 

स्थान: 

  • भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान की दिल्ली शाखा (नई दिल्ली)।

संबंधित संस्थान: 

  • इस सुविधा का विकास पुणे स्थित भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तत्वावधान में किया है।  

प्रयोगशाला की प्रमुख विशेषताएं: 

  • वास्तविक समय में प्रदूषण के स्रोतों की पहचान: यह सुविधा लगातार वाहनों से निकलने वाले धुएं, औद्योगिक प्रदूषण, पराली जलाने और द्वितीयक एयरोसोल से होने वाले प्रदूषण के योगदान की पहचान और मात्रा का आकलन करती है। इससे प्रदूषण के वास्तविक स्रोतों को अधिक सटीकता से समझने में मदद मिलती है।
  • एयरोसोल विषाक्तता और भारी धातुओं का विश्लेषण: यह प्रयोगशाला उन्नत स्पेक्ट्रोमेट्री तकनीक का इस्तेमाल करके पीएम 2.5, अति सूक्ष्म कणों, विषैली धातुओं और कैंसर पैदा करने वाले यौगिकों का विश्लेषण करती है। इससे केवल प्रदूषक कणों की मात्रा ही नहीं, बल्कि उनसे जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों का भी आकलन किया जा सकता है। 
  • एयरवाइज प्रणाली के साथ एकीकरण: यह सुविधा आईआईटीएम की उत्सर्जन के लिए वायु गुणवत्ता चेतावनी और एकीकृत निर्णय सहायता प्रणाली (एयरवाइज) के साथ एकीकृत है। इसके माध्यम से 400 मीटर के स्थानिक विभेदन पर अगले 72 घंटों के लिए वायु गुणवत्ता का पूर्वानुमान उपलब्ध कराया जाता है।
  • चार दिनों तक प्रदूषण का पूर्वानुमान: यह प्रणाली वास्तविक समय में प्रदूषण की निगरानी को चार दिनों के पूर्वानुमान के साथ जोड़ती है। इससे संबंधित अधिकारी प्रदूषण में संभावित बढ़ोतरी का पहले से अनुमान लगा सकते हैं और स्थिति गंभीर होने से पहले रोकथाम के उपाय लागू कर सकते हैं।
  • कई प्रकार के वायुमंडलीय प्रदूषकों की निगरानी: यह प्रयोगशाला वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों (VOCs), सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂), नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOₓ) और ओजोन की निगरानी करती है। साथ ही, यह उनके बीच होने वाली रासायनिक प्रक्रियाओं और द्वितीयक कणों के निर्माण तथा सर्दियों में छाने वाले धुंध के निर्माण में उनकी भूमिका का विश्लेषण करती है।  

महत्व: 

  • प्रदूषण नियंत्रण के लिए लक्षित उपाय: यह सुविधा वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) और नगर निकायों को श्रेणीबद्ध प्रतिक्रिया कार्ययोजना (ग्रैप) के तहत प्रदूषण के विशिष्ट स्रोतों को ध्यान में रखकर प्रतिबंध लागू करने में मदद करेगी। इससे नियामक उपाय अधिक प्रभावी हो सकते हैं और बिना जरूरत व्यापक प्रतिबंध लगाने से बचा जा सकता है। 
  • स्वास्थ्य जोखिमों का बेहतर आकलन: प्रदूषकों की संरचना और वायुमंडलीय रसायन विज्ञान को स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों से जोड़कर यह प्रयोगशाला प्रदूषण से होने वाली श्वसन और हृदय संबंधी बीमारियों के लिए समय रहते चेतावनी जारी करने तथा स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारी बेहतर बनाने में सहायता कर सकती है। 
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