संदर्भ
हाल ही में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय तटीय मिशन 2.0 (National Coastal Mission 2.0—NCM 2.0) के कार्यान्वयन संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए।
राष्ट्रीय तटीय मिशन 2.0 (NCM 2.0) के बारे में
- इस केंद्रीय क्षेत्रक योजना (Central Sector Scheme) को वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक लागू करने के लिए ₹767 करोड़ के परिव्यय के साथ मंजूरी दी गई है।
- यह योजना तटीय क्षेत्रों के पारिस्थितिक शासन और समुद्री स्थानिक नियोजन (Marine Spatial Planning) के लिए एक एकीकृत ढांचा तैयार करती है।
- यह योजना NCM 1.0 (2021-22 से 2025-26) का स्थान लेगी।
- इसका उद्देश्य संवेदनशील तटीय पारिस्थितिकी तंत्रों का संरक्षण करना और प्रकृति-सकारात्मक आर्थिक गतिविधियों (Nature-Positive Economic Activities) को बड़े स्तर पर बढ़ावा देना है।
- इसका क्रियान्वयन 9 तटीय राज्यों और 4 तटीय केंद्रशासित प्रदेशों में किया जाएगा।
- संचालन: इस योजना का प्रशासन भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा सीधे किया जाएगा।
उद्देश्य:
- तटीय और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्रों का संरक्षण करना।
- जलवायु परिवर्तन के प्रति तटीय क्षेत्रों की लचीलापन क्षमता (Climate Resilience) को मजबूत करना।
- समुद्री प्रदूषण को कम करना।
- भारत की ब्लू इकोनॉमी (Blue Economy) की क्षमता का सतत उपयोग करना।
- विकसित भारत @2047 के लक्ष्य के अनुरूप तटीय एवं समुद्री संसाधनों का टिकाऊ विकास सुनिश्चित करना।
प्रमुख विशेषताएं:
1. पूरे भारत के तटीय क्षेत्रों को शामिल करना:
- एनसीएम 2.0 के तहत सभी 9 तटीय राज्यों और 4 तटीय केंद्रशासित प्रदेशों को शामिल किया गया है। इससे भारत की पूरी तटरेखा पर संरक्षण और जलवायु-लचीलापन से जुड़े उपायों को समन्वित तरीके से लागू करने में मदद मिलेगी।
2. पांच विषयगत स्तंभ:
मिशन को पांच प्रमुख विषयगत स्तंभों पर केंद्रित किया गया है:
- ब्लू इकोनॉमी का विकास
- तटीय जोखिमों में कमी
- जलवायु अनुकूलन और शमन
- क्षमता निर्माण
- प्रभावी परियोजना प्रबंधन
3. एकीकृत स्थानिक नियोजन:
- इस मिशन के तहत लगभग 1,000 किलोमीटर प्राथमिकता वाली तटरेखा के लिए एकीकृत तटीय क्षेत्र प्रबंधन योजनाएं (ICZMPs) और तटीय समुद्री स्थानिक योजनाएं (Coastal Marine Spatial Plans) विकसित की जाएंगी।
- इसके लिए पूरे देश में तटीय क्षेत्रों की संवेदनशीलता का एक मानकीकृत राष्ट्रीय आकलन भी किया जाएगा।
4. पारिस्थितिकी तंत्र का पुनर्स्थापन:
- एनसीएम 2.0 के तहत प्रवाल भित्तियों (Coral Reefs) और मैंग्रोव के पुनर्स्थापन को बढ़ावा दिया जाएगा।
- इसके लिए प्रवालों पर उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence on Corals) भी स्थापित किया जाएगा। इससे जैव विविधता के संरक्षण, ब्लू कार्बन भंडारण को बढ़ाने तथा तटीय क्षेत्रों को प्राकृतिक सुरक्षा प्रदान करने में सहायता मिलेगी।
5. समुद्री बुनियादी ढांचा और पर्यटन:
- मिशन के तहत हरित तटीय बुनियादी ढांचे (Green Shoreline Infrastructure) को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके साथ ही पर्यावरण-अनुकूल समुद्र तटीय पर्यटन को प्रोत्साहित किया जाएगा।
- गुजरात में एक संरक्षण एवं सूचना केंद्र सह-समुद्री ओशनोरियम (Conservation and Information Centre-cum-Marine Oceanarium) स्थापित करने का भी प्रावधान है।
6. वैश्विक जलवायु वित्त:
- एनसीएम 2.0 के तहत ग्रीन क्लाइमेट फंड (Green Climate Fund) द्वारा समर्थित पहलों को देश के घरेलू तटीय कार्यक्रमों के साथ जोड़ा जाएगा।
- इससे भारत की तटीय संरक्षण संबंधी योजनाओं को अंतरराष्ट्रीय महासागर एवं जलवायु प्रतिबद्धताओं के अनुरूप लागू करने में सहायता मिलेगी।
राष्ट्रीय तटीय मिशन 2.0 का महत्व
- राष्ट्रीय तटीय मिशन 2.0 तटीय क्षेत्रों को तटीय कटाव, चक्रवात, तूफानी लहरों (Storm Surges), बाढ़ और लवणीय जल के प्रवेश (Salinity Intrusion) जैसी चुनौतियों से सुरक्षा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
- इससे विशेष रूप से तटीय क्षेत्रों में रहने वाली संवेदनशील आबादी की जलवायु लचीलापन क्षमता मजबूत होगी।
- इसके अलावा, वैज्ञानिक आधार पर तैयार समुद्री स्थानिक नियोजन के माध्यम से बंदरगाहों, अपतटीय नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन और समुद्री कृषि (Mariculture) जैसी आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा सकता है। साथ ही, इनके विकास के दौरान तटीय और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के लिए आवश्यक सुरक्षा उपाय भी सुनिश्चित किए जा सकेंगे।
- इस प्रकार, एनसीएम 2.0 का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन स्थापित करते हुए भारत की तटीय अर्थव्यवस्था और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को अधिक टिकाऊ और जलवायु-सक्षम बनाना है।