संदर्भ
हाल ही में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने दस केन्द्रीय मंत्रालयों के सचिवों, रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और सभी राज्यों एवं केन्द्र-शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों/प्रशासकों को ‘कार्यस्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा’ के संबंध में एक परामर्श जारी किया है।
प्रमुख बिंदु
- एनएचआरसी का कहना है कि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए कड़े कानून होने के बावजूद, कार्यस्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर उनकी सुरक्षा अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है।
- भारत में हाल ही के ‘आवधिक श्रम बल भागीदारी सर्वेक्षण’ के अनुसार, सितंबर 2026 में श्रम बल में महिलाओं की भागीदारी 34.6 प्रतिशत थी। वहीं, 2026 में जारी राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं के खिलाफ अपराध के लगभग 4.4 लाख मामले सामने आए। वस्तुतः ये आंकड़े महिलाओं की सुरक्षा एवं संरक्षा सुनिश्चित करने में लगातार पेश आ रही चुनौतियों को दर्शाते हैं और इसके लिए निरंतर एवं ठोस प्रयासों की जरूरत को रेखांकित करते हैं।
- एनएचआरसी यह मानना है कि महिलाओं की सुरक्षा, वास्तव में न्याय और समान अवसरों के उनके संवैधानिक अधिकारों को सुनिश्चित करने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण है। साथ ही, यह भी कहा गया है कि कार्यस्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा एक ऐसी अनिवार्य शर्त है, जो महिलाओं को श्रम बल में पूरी तरह से शामिल होने और अपनी पूरी क्षमता का सदुपयोग करने में समर्थ बनाती है।
परामर्श के अंतर्गत शामिल मंत्रालय:
- रेलवे बोर्ड के अलावा, जिन केन्द्रीय मंत्रालयों को यह परामर्श भेजा गया है, उनमें महिला एवं बाल विकास, शिक्षा, गृह, सूचना और प्रसारण, श्रम और रोजगार, कॉरपोरेट कार्य, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, आवासन और शहरी कार्य, तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय शामिल हैं।
परामर्श के मुख्य क्षेत्र:
एनएचआरसी का परामर्श आठ मुख्य क्षेत्रों पर केन्द्रित है।
- इनमें महिलाओं की सुरक्षा एवं यौन उत्पीड़न से जुड़े विषयों पर जागरूकता बढ़ाना,
- बुनियादी ढांचे का सशक्तिकरण,
- किसी घटना के समय आस-पास मौजूद लोगों को हस्तक्षेप करने के लिए प्रोत्साहित करना,
- पुलिस की भूमिका,
- पीड़ितों को सहायता,
- महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराध,
- दीर्घकालिक सुधार तथा अन्य उपाय शामिल हैं।
एनएचआरसी ने सभी संबंधित प्राधिकरणों से परामर्श में दी गई सिफारिशों को कार्यान्वित करने और इस दिशा में हुई प्रगति से अवगत कराने हेतु दो महीने के भीतर ‘की गई कार्रवाई की रिपोर्ट’ (एटीआर) सौंपने का आग्रह किया है।
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी) के बारे में
- भारत का राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) 12 अक्टूबर, 1993 को स्थापित किया गया था। जिस क़ानून के तहत इसकी स्थापना की गई है, वह मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम (PHRA), 1993 है, जिसे मानव अधिकार संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2019 द्वारा संशोधित किया गया है।
- पीएचआर अधिनियम, 1993 की धारा 2(1)(d) मानव अधिकारो को संविधान द्वारा गारंटीकृत या अंतर्राष्ट्रीय प्रसंविदाओं में सन्निहित व्यक्ति के जीवन, स्वतंत्रता, समानता और सम्मान से संबंधित अधिकारों के रूप में परिभाषित करती है और भारत में न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय है।
- यह पेरिस सिद्धांतों के अनुरूप है, जिसे अक्टूबर 1991 में पेरिस में आयोजितमानव अधिकारो के संवर्धन और संरक्षण हेतु राष्ट्रीय संस्थाओं पर प्रथम अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला में अपनाया गया था और संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 20 दिसंबर, 1993 के अपने विनियम 48/134 द्वारा अनुमोदित किया गया था।
मिशन:
- भारत में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग की स्थापना मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत संसद के एक अधिनियम द्वारा मानव अधिकारो के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु की गई है।
- आयोग के कार्य अधिनियम की धारा 12 में वर्णित हैं; मानव अधिकार उल्लंघनों या किसी लोक सेवक द्वारा ऐसे उल्लंघनों को रोकने में लापरवाही की शिकायतों की जाँच के अलावा, आयोग मानव अधिकारो पर संधियों और अंतर्राष्ट्रीय समझौतों का अध्ययन करता है और उनके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए सरकार को सिफारिशें करता है।