चर्चा में क्यों:
हाल ही में भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय की राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना विकास एजेंसी (एनआरआईडीए) और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट कलकत्ता (आईआईएम कलकत्ता) ने पीएमजीएसवाई -IV और पीएम--जनमन के तहत बनी सड़कों के चार वर्ष के व्यापक 'लॉन्गिट्यूडिनल' (लंबे समय तक चलने वाले) प्रभाव आकलन अध्ययन के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।
अध्ययन के प्रमुख बिंदु:
- ग्रामीण सड़क संपर्कता के दीर्घकालिक परिणामों का आकलन करने के लिए चार वर्ष का लॉन्गिट्यूडिनल प्रभाव आकलन।
- 10 राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों, 50 जिलों, 150 ब्लॉकों और 250 सड़कों को शामिल करना
- शामिल किए जाने वाले राज्य/केंद्र शासित प्रदेश: आंध्र प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़, जम्मू और कश्मीर, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान, सिक्किम और उत्तराखंड।
- आवागमन, पहुंच और सामाजिक-आर्थिक स्थितियों में बदलाव का आकलन करने के लिए लगभग 5,000 परिवारों का सर्वेक्षण।
- इस अध्ययन में समय के साथ होने वाले बदलावों का आकलन करने के लिए एक लॉन्गिट्यूडिनल दृष्टिकोण अपनाया जाएगा जिसमें बेसलाइन सर्वे (निर्माण-पूर्व सर्वे) और एंडलाइन सर्वे (निर्माण-पश्चात सर्वे) के ज़रिए डेटा एकत्रित किया जाएगा।
- आवागमन, पहुंच, सामाजिक-आर्थिक स्थितियों और आवश्यक सेवाओं तक पहुंच पर ग्रामीण सड़कों के प्रभाव का आकलन।
- बेसलाइन सर्वेक्षण (निर्माण-पूर्व सर्वेक्षण): 14 माह
- परिवर्तन अवधि: लगभग 12 माह
- एंडलाइन सर्वेक्षण (निर्माण-पश्चात सर्वेक्षण): 22 माह
अपेक्षित परिणाम:
- इस लंबे समय तक चलने वाले अध्ययन से पीएमजीएसवाई -IV और पी एम--जनमन के तहत ग्रामीण सड़क संपर्कता के सतत सामाजिक-आर्थिक और विकासात्मक प्रभावों पर ठोस सबूत मिलने की उम्मीद है।
- यह अध्ययन आकलन करेगा कि बेहतर अंतर्संपर्कता का असर लोगों की पहुंच, आवाजाही, आजीविका, रोज़गार, आय के अलग-अलग स्रोतों, खेती, खेती से अलग कार्यकलापों और बाज़ारों तक पहुँच के साथ-साथ परिवारों की भलाई और ग्रामीण इलाकों में सुविधाओं की कमी पर किस प्रकार पड़ता है।
- यह अध्ययन शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, महिलाओं के सशक्तिकरण, सुरक्षा और अनिवार्य सार्वजनिक व वित्तीय सेवाओं तक पहुँच पर बेहतर ग्रामीण सड़क संपर्कता के दीर्घकालिक प्रभाव का भी आकलन करेगा।
- इसमें यात्रा के समय और परिवहन लागत में कमी, बेहतर आवाजाही, रोज़गार और आजीविका के अवसरों तक बेहतर पहुँच और पलायन पर निर्भरता कम होने पर विशेष बल दिया जाएगा।
- यह समय के साथ इन परिणामों में आए बदलावों की भी जाँच करेगा और अलग-अलग क्षेत्रों व कमज़ोर वर्गों के बीच अंतर का आकलन करेगा, जिससे ग्रामीण सड़क संपर्कता के दीर्घावधि प्रभाव से मिलने वाले फायदों की पूरी जानकारी मिल सकेगी।
- एक महत्वपूर्ण परिणाम इन लाभों के लंबे समय तक बने रहने की क्षमता का आकलन होगा, जिसमें सतत सामाजिक-आर्थिक लाभ सुनिश्चित होगा। प्रस्तावित अध्ययन से ग्रामीण सड़क संपर्कता के कार्यान्वयन की खामियों, उभरती चुनौतियों और ऐसे क्षेत्रों की पहचान होगी जिनमें नीतिगत हस्तक्षेप करने की आवश्यकता है।
निष्कर्ष:
कुल मिलाकर, एनआरआईडीए, एमओआरडी तथा आईआईएम कलकत्ता के बीच सहयोग से कार्यक्रम की समीक्षा, परिणामों की निगरानी, सबूतों पर आधारित नीति बनाने और ग्रामीण सड़क परियोजनाओं की भावी योजना बनाने के लिए बहुमूल्य जानकारी प्राप्त होगी।