संदर्भ
- फसल की पैदावार का अनुमान लगाने, बीमारी के प्रकोप पर नजर रखने, नई दवाओं की खोज में तेजी लाने और नदी घाटियों में बाढ़ से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों की पहले से पहचान करने तक, उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग यानी एचपीसी आज विज्ञान और समाज से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उपयोगी साबित हो रही है। यह तकनीक बड़े पैमाने पर आंकड़ों को तेजी से संसाधित करने और जटिल वैज्ञानिक सिमुलेशन चलाने में मदद करती है।
- जलवायु परिवर्तन, मौसम पूर्वानुमान, अंतरिक्ष अनुसंधान, स्वास्थ्य सेवा, कृषि, ऊर्जा और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में बड़ी मात्रा में आंकड़ों का विश्लेषण करना पड़ता है। ऐसे में सुपरकंप्यूटर शोधकर्ताओं को कम समय में जटिल गणनाएं करने और वैज्ञानिक समस्याओं के समाधान खोजने में मदद करते हैं।
सुपरकंप्यूटर क्या है?
- सुपरकंप्यूटर ऐसे अत्याधुनिक कंप्यूटिंग सिस्टम हैं, जिन्हें बेहद तेज गति से जटिल गणनाएं करने के लिए तैयार किया जाता है। इनमें बड़ी संख्या में प्रोसेसर एक साथ काम करते हैं, जिससे एक ही समय में कई गणनाएं संभव होती हैं।
- इस क्षमता के कारण शोधकर्ता विशाल आंकड़ा समूहों का विश्लेषण करने और जटिल सिमुलेशन चलाने में सक्षम होते हैं। यही वजह है कि सुपरकंप्यूटिंग को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और रणनीतिक अनुप्रयोगों के लिए महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा माना जा रहा है।
राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन की शुरुआत
- भारत में उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग क्षमता को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने अप्रैल 2015 में राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन यानी एनएसएम की शुरुआत की थी। इस मिशन के लिए लगभग 4,500 करोड़ रुपये का परिव्यय निर्धारित किया गया।
- एनएसएम का संचालन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय संयुक्त रूप से करते हैं। मिशन का मुख्य उद्देश्य सुपरकंप्यूटिंग के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाना और देश में उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग का मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है।
- इस मिशन को आगे बढ़ाने में सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग यानी सी-डैक, पुणे और भारतीय विज्ञान संस्थान यानी आईआईएससी, बेंगलुरु प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।
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राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क (एनकेएन)
- एनकेएन राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन के तहत देश के सुपरकंप्यूटिंग परितंत्र की रीढ़ के रूप में कार्य करता है।
- यह एक उच्च गति वाले राष्ट्रीय नेटवर्क के माध्यम से शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों में सुपरकंप्यूटिंग सुविधाओं को जोड़ता है।
- यह शोधकर्ताओं और संस्थानों को उन्नत कंप्यूटिंग संसाधनों तक पहुंचने और भौगोलिक सीमाओं के पार सहयोग करने में सक्षम बनाता है।
- यह नेटवर्क कम्प्यूटेशनल संसाधनों, अनुसंधान क्षमताओं और वैज्ञानिक जानकारी को साझा करने को मजबूत करता है। इस जुड़े बुनियादी ढांचे के माध्यम से, यह मिशन पूरे भारत में उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग तक पहुंच का विस्तार कर रहा है।
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देश में बढ़ रहा सुपरकंप्यूटिंग बुनियादी ढांचा
- राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन के तहत देश के विभिन्न शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों में कुल 50 सुपरकंप्यूटर स्थापित करने की योजना है। इनकी संचयी क्षमता 123 पेटाफ्लॉप से अधिक होगी।
- सितंबर 2026 तक भारत में 68 पेटाफ्लॉप की संयुक्त क्षमता वाले 40 सुपरकंप्यूटर तैनात किए जा चुके थे। इनमें 1 पेटाफ्लॉप से अधिक क्षमता वाले 13 उच्च क्षमता वाले सिस्टम शामिल हैं। इसके अलावा 12 मध्यम क्षमता वाले सिस्टम की क्षमता 500 टेराफ्लॉप से 1 पेटाफ्लॉप के बीच है, जबकि 15 अन्य सिस्टम की क्षमता 500 टेराफ्लॉप से कम है।
- इन प्रणालियों को देश में विकसित क्षमता के आधार पर तैयार और विभिन्न संस्थानों में संचालित किया जा रहा है। इससे भारत के घरेलू उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिल रही है।
स्वास्थ्य से बाढ़ पूर्वानुमान तक सुपरकंप्यूटर का उपयोग
एनएसएम के तहत विकसित सुपरकंप्यूटिंग प्रणालियां कई राष्ट्रीय महत्व के अनुप्रयोगों में इस्तेमाल की जा रही हैं।
- जीनोमिक्स और दवा खोज मंच बड़े पैमाने पर अणुओं का अध्ययन करके नई दवाओं की खोज और परीक्षण में सहायता करता है। कोविड-19 के दौरान इसका इस्तेमाल मौजूदा दवाओं की जांच और संभावित दुष्प्रभावों के अनुमान के लिए भी किया गया।
- शहरी पर्यावरण निर्णय सहायता प्रणाली मौसम और वायु प्रदूषण से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण करती है। इससे भारी बारिश और प्रदूषण की स्थिति का पूर्वानुमान लगाने में मदद मिलती है।
- भूकंपीय इमेजिंग प्रणाली उन्नत गणनात्मक तकनीकों के माध्यम से जमीन के नीचे मौजूद संरचनाओं की तस्वीर तैयार करने में सहायता करती है। इसका उपयोग तेल और गैस की खोज को अधिक प्रभावी बनाने के लिए किया जा रहा है।
- नदी घाटियों में बाढ़ की प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली आंकड़ा विश्लेषण और पूर्वानुमान मॉडल के माध्यम से दो दिन पहले तक बाढ़ की संभावना का अनुमान लगाने में सक्षम है। महानदी नदी बेसिन में इसका उपयोग समुदायों और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए किया जा रहा है।
- इसके अलावा वनाग्नि प्रसार मॉडल उपग्रह आधारित रिमोट सेंसिंग और कंप्यूटिंग मॉडल को जोड़कर जंगल की आग के फैलाव का अनुमान लगाने में मदद करता है। इसका परीक्षण सिक्किम हिमालय जैसे क्षेत्रों में किया गया है।
स्वदेशी सुपरकंप्यूटिंग तकनीक पर जोर
- एनएसएम का एक प्रमुख लक्ष्य सुपरकंप्यूटिंग के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाना है। इसके तहत सर्वर, नेटवर्क, शीतलन तकनीक और सिस्टम सॉफ्टवेयर जैसे महत्वपूर्ण घटकों के विकास पर काम किया गया है।
- रुद्र सर्वर श्रृंखला सी-डैक द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित की गई है। इसका उपयोग जटिल गणनाओं, सिमुलेशन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े कार्यों के लिए किया जा सकता है।
- इसके अलावा कंप्यूटर नोड के बीच तेज संचार के लिए 100 जीबीपीएस और 200 जीबीपीएस की गति वाले हाई-स्पीड इंटरकनेक्ट नेटवर्क का विकास और परीक्षण किया गया है।
- उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग प्रणालियों के लिए स्वदेशी शीतलन तकनीक भी विकसित की गई है। इसके साथ ही सुपरकंप्यूटर के प्रभावी संचालन और प्रबंधन के लिए संपूर्ण एचपीसी सिस्टम सॉफ्टवेयर विकसित किया गया है।
- परम शावक भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इसे इंजीनियरिंग कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों तथा शोधकर्ताओं की उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत में डिजाइन और विकसित किया गया है।
शोधकर्ताओं को लाभ
- सुपरकंप्यूटिंग बुनियादी ढांचे के विस्तार के साथ एनएसएम मानव संसाधन और कौशल विकास पर भी जोर दे रहा है। मिशन के बुनियादी ढांचे से 400 से अधिक संस्थानों में 2,900 से अधिक पीएचडी छात्रों सहित 16,000 से अधिक शोधकर्ताओं को लाभ मिला है।
- सितंबर 2026 तक इन प्रणालियों पर 1.5 करोड़ से अधिक कंप्यूट नौकरियां निष्पादित की जा चुकी हैं और इनसे जुड़े शोध कार्यों से 1,990 से अधिक शोध प्रकाशनों में योगदान मिला है।
- एचपीसी और डीप लर्निंग जागरूकता कार्यक्रम, हैकथॉन, बूटकैंप, संकाय विकास कार्यक्रम के जरिए छात्रों, शोधकर्ताओं और शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
- इसके अलावा राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संवर्धित शिक्षण कार्यक्रम के तहत उच्च-प्रदर्शन वैज्ञानिक कंप्यूटिंग पाठ्यक्रम और एचपीसी शिक्षा पोर्टल के माध्यम से अध्ययन सामग्री भी उपलब्ध कराई जा रही है।
आगे की राह: एआई और एचपीसी का बढ़ेगा एकीकरण
- भारत का सुपरकंप्यूटिंग पारिस्थितिकी तंत्र आने वाले वर्षों में और विस्तार करने की दिशा में बढ़ रहा है। तेज, ऊर्जा-कुशल और विश्वसनीय कंप्यूटिंग प्रणालियों के निर्माण के साथ स्वदेशी हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर क्षमता को मजबूत करना मिशन की प्राथमिकताओं में शामिल है।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग का बढ़ता एकीकरण मौसम एवं जलवायु, स्वास्थ्य, कृषि, ऊर्जा, दवा खोज, इंजीनियरिंग और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएं पैदा कर सकता है।
- कुल मिलाकर, राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। स्वदेशी तकनीक, मजबूत कंप्यूटिंग बुनियादी ढांचे और कुशल मानव संसाधन के संयोजन से भारत न केवल जटिल वैज्ञानिक चुनौतियों का समाधान तेजी से कर सकता है, बल्कि उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति भी मजबूत कर सकता है।