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पेटा (PETA) इंडिया

चर्चा में क्यों? 

  • हाल ही में पशु अधिकार संगठन पेटा (PETA) इंडिया ने केंद्र सरकार से पशु क्रूरता निवारण (प्रयोगशाला पशुओं पर प्रयोग, प्रजनन एवं व्यापार का नियंत्रण और पर्यवेक्षण) नियम, 2026 के मसौदे को वापस लेने की अपील की है। संगठन का मानना है कि प्रस्तावित नियम प्रयोगशाला में उपयोग किए जाने वाले पशुओं के संरक्षण संबंधी मौजूदा प्रावधानों को कमजोर कर सकते हैं और केंद्र सरकार की निगरानी व्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं।  

पेटा (PETA) इंडिया के बारे में  

  • PETA (People for the Ethical Treatment of Animals) एक प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय गैर-सरकारी एवं गैर-लाभकारी संगठन है, जो पशु अधिकारों की रक्षा और उनके प्रति मानवीय व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए कार्य करता है। 
  • यह संगठन पशुओं के प्रयोग, भोजन, वस्त्र और मनोरंजन सहित विभिन्न उद्देश्यों के लिए उनके शोषण का विरोध करता है। साथ ही, यह वीगन जीवनशैली तथा पशु-अनुकूल विकल्पों को प्रोत्साहित करता है। 
  • अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थापना: मार्च 1980 में इंग्रिड न्यूकिर्क और एलेक्स पाचेको द्वारा।
  • भारत में शुरुआत: PETA इंडिया की आधिकारिक शुरुआत जनवरी 2000 में हुई।

पृष्ठभूमि:

  • PETA की स्थापना में इंग्रिड न्यूकिर्क की प्रमुख भूमिका रही। संगठन की विचारधारा पर पीटर सिंगर की वर्ष 1975 में प्रकाशित पुस्तक Animal Liberation का प्रभाव पड़ा। इसके बाद पशुओं के शोषण के विरुद्ध जागरूकता और उनके अधिकारों के संरक्षण के लिए अभियान चलाए गए।  
  • सिल्वर स्प्रिंग बंदर प्रकरण (1981): अमेरिका के मैरीलैंड में शोधकर्ता एडवर्ड टॉब द्वारा 17 मकाक बंदरों पर किए जा रहे प्रयोगों को उजागर करने के बाद संगठन को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। 
  • पशु कल्याण कानूनों पर प्रभाव: इस मामले में प्रयोगशाला पर पुलिस की छापेमारी हुई और कानूनी कार्यवाही शुरू हुई। इससे पशु प्रयोगों की निगरानी तथा उनके कल्याण को लेकर व्यापक बहस हुई। इस प्रकरण ने वर्ष 1985 में अमेरिकी पशु कल्याण कानून (Animal Welfare Act) में हुए संशोधनों की पृष्ठभूमि तैयार करने में भी योगदान दिया। 

PETA के प्रमुख कार्यक्षेत्र: 

  • गुप्त जाँच एवं अनियमितताओं का खुलासा: प्रयोगशालाओं, बूचड़खानों, चमड़ा उद्योगों, सर्कसों और पशु प्रजनन केंद्रों में पशुओं के साथ होने वाली कथित क्रूरता तथा अनुचित व्यवहार की जाँच करना।
  • पशु शोषण की रोकथाम: वैज्ञानिक प्रयोगों, औद्योगिक पशुपालन, वस्त्र उद्योग में फर और चमड़े के उपयोग तथा मनोरंजन के लिए पशुओं के इस्तेमाल से होने वाली पीड़ा को कम करने के लिए अभियान चलाना।
  • जन-जागरूकता एवं उपभोक्ता अभियान: मीडिया, विरोध प्रदर्शनों और मशहूर हस्तियों के सहयोग से वीगन जीवनशैली, क्रूरतामुक्त उत्पादों तथा पशुओं के प्रति संवेदनशील व्यवहार को प्रोत्साहित करना।
  • कानूनी एवं नीतिगत पहल: पशु संरक्षण कानूनों को मजबूत करने, क्रूर प्रथाओं पर नियंत्रण लगाने और पशु परीक्षण के वैकल्पिक तरीकों को बढ़ावा देने के लिए कानूनी कार्रवाई तथा नीतिगत स्तर पर प्रयास करना। 

पशु संरक्षण में PETA का महत्त्व: 

  • पशु परीक्षण के वैकल्पिक तरीकों को बढ़ावा: मानव कोशिका संवर्धन, ऑर्गन-ऑन-चिप तकनीक और कंप्यूटेशनल टॉक्सिकोलॉजी जैसी आधुनिक विधियों के उपयोग को प्रोत्साहित करना, ताकि वैज्ञानिक अनुसंधान में पशुओं पर निर्भरता घटाई जा सके। 
  • नीतिगत स्तर पर पशु कल्याण को बढ़ावा: सरकारी नीतियों और कंपनियों की कार्यप्रणाली में पशु कल्याण को महत्त्वपूर्ण स्थान दिलाने के प्रयास करना।
  • क्रूरतामुक्त उत्पादों का समर्थन: पशुओं पर परीक्षण न किए गए सौंदर्य प्रसाधनों और नैतिक उपभोग की प्रवृत्ति को बढ़ावा देना। 
  • पशु अधिकारों के प्रति जागरूकता: पशुओं के साथ मानवीय व्यवहार, उनके शोषण की रोकथाम और उनके अधिकारों के संरक्षण के प्रति सामाजिक जागरूकता बढ़ाना। 
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