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पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (पीएमजीएस-एनएमपी)

संदर्भ 

  • भारत में सड़क, रेलवे, बंदरगाह, हवाई अड्डे, जलमार्ग और ऊर्जा नेटवर्क जैसे बुनियादी ढाँचे का तेजी से विस्तार हो रहा है। इन परियोजनाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने, लागत एवं समय बचाने और संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के लिए एकीकृत नियोजन आवश्यक है। इसी उद्देश्य से 13 अक्टूबर 2021 को पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान की शुरुआत की गई। 
  • यह एक जीआईएस आधारित डिजिटल मंच है, जो विभिन्न मंत्रालयों, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के आँकड़ों को एकीकृत करके बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं की योजना बनाने और निर्णय लेने में सहायता करता है।   

पीएम गतिशक्ति के प्रमुख उद्देश्य एवं विशेषताएँ 

  • पीएम गतिशक्ति का उद्देश्य विभिन्न परिवहन माध्यमों और आर्थिक क्षेत्रों के बीच संपर्क सुविधा को मजबूत करना, परियोजनाओं में समन्वय बढ़ाना तथा विकास कार्यों में होने वाली देरी और अतिरिक्त लागत को कम करना है।  
  • इसके छह प्रमुख सिद्धांत एकीकृत विकास, मल्टीमॉडल संपर्क, अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी, भूमि अधिग्रहण में तेजी, मंजूरियों की संख्या में कमी और पर्यावरणीय प्रभाव को न्यूनतम करना हैं।
  • इस योजना के अंतर्गत सात प्रमुख अवसंरचना इंजन शामिल हैं -सड़कें, रेलवे, बंदरगाह, जलमार्ग, हवाई अड्डे, सार्वजनिक परिवहन और लॉजिस्टिक्स अवसंरचना। राष्ट्रीय मास्टर प्लान में 58 केंद्रीय मंत्रालयों एवं विभागों तथा सभी 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को शामिल किया गया है।
  • 12 अक्टूबर 2026 तक इस मंच पर 23,493 से अधिक डेटा लेयर्स उपलब्ध कराई गई थीं। वहीं, पीएम गतिशक्ति पब्लिक प्लेटफॉर्म के माध्यम से 230 अनुमोदित डेटासेट तक पहुँच मिलती है। इनकी सहायता से स्थल की उपयुक्तता, मार्ग निर्धारण, संपर्क सुविधाओं की कमियों और नियामकीय अनुपालन का विश्लेषण किया जा सकता है। भारतमाला, सागरमाला, अंतर्देशीय जलमार्ग, ड्राई पोर्ट और उड़ान जैसी पहलें भी इसके नियोजन ढाँचे से जुड़ी हैं। 

संस्थागत व्यवस्था और एकीकृत परिवहन नियोजन 

पीएम गतिशक्ति का संचालन तीन प्रमुख संस्थागत तंत्रों के माध्यम से किया जाता है। 

  • अधिकार प्राप्त सचिवों का समूह (ईजीओएस): कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में यह समूह योजना के कार्यान्वयन की निगरानी करता है और राष्ट्रीय मास्टर प्लान में आवश्यक बदलावों की समीक्षा एवं स्वीकृति देता है।
  • नेटवर्क नियोजन समूह (एनपीजी): यह समूह विभिन्न मंत्रालयों के बुनियादी ढाँचा प्रस्तावों का मूल्यांकन करके उनके बीच समन्वय और एकीकृत नियोजन सुनिश्चित करता है। 
  • तकनीकी सहायता इकाई (टीएसयू): विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों से युक्त यह इकाई परियोजनाओं के मूल्यांकन में सहयोग देती है और लॉजिस्टिक्स प्रभाग को तकनीकी सहायता प्रदान करती है।

वस्तुतः 11 अगस्त 2026 तक एनपीजी लगभग 18.66 लाख करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली 396 अवसंरचना परियोजनाओं का मूल्यांकन कर चुका है। इनमें से 256 परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है और 198 परियोजनाएँ कार्यान्वयन के चरण में हैं।   

एकीकृत परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स प्राधिकरण (आईटीएलए): 

  • इसके अतिरिक्त, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एकीकृत परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स प्राधिकरण (आईटीएलए) की स्थापना को मंजूरी दी है। 
  • इसका उद्देश्य दस वर्ष या उससे अधिक की अवधि को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय परिवहन मास्टर प्लान तैयार करना, क्षेत्रीय एवं वार्षिक परिवहन योजनाओं का आकलन करना और 500 करोड़ रुपये या उससे अधिक लागत वाली परियोजनाओं का तकनीकी मूल्यांकन एवं निगरानी करना है। 
  • यह फास्टैग, वाहन और जीएसटीएन ई-वे बिल जैसे स्रोतों के आँकड़ों को जोड़कर राष्ट्रीय परिवहन डेटा रिपॉजिटरी (एनटीडीआर) विकसित करने पर भी कार्य करेगा।

डिजिटल तकनीक और लॉजिस्टिक्स का एकीकरण 

  • राष्ट्रीय मास्टर प्लान पर बुनियादी ढाँचे, भौगोलिक विशेषताओं, जनसांख्यिकी और आर्थिक क्षेत्रों से संबंधित जीआईएस आधारित जानकारी एकत्रित की जाती है। उपग्रह चित्रों, स्थानिक विश्लेषण और डेटा अपडेट करने की व्यवस्थाओं के माध्यम से योजनाकार विभिन्न परियोजनाओं के संभावित प्रभावों का आकलन कर सकते हैं।
  • अक्टूबर 2025 में पीएम गतिशक्ति मंच को चयनित गैर-संवेदनशील डेटासेट तक नियंत्रित पहुँच के साथ निजी क्षेत्र के लिए भी उपलब्ध कराया गया। इससे निवेश संबंधी निर्णयों, स्थल चयन और संपर्क सुविधाओं के विश्लेषण में सहायता मिलती है।
  • एकीकृत लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म (यूएलआईपी) विभिन्न सरकारी लॉजिस्टिक्स प्रणालियों को एपीआई के माध्यम से जोड़ता है, जबकि लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक (एलडीबी) आयात-निर्यात कंटेनरों की वास्तविक समय में निगरानी करता है। जुलाई 2026 तक यूएलआईपी ने 142 एपीआई के माध्यम से 12 केंद्रीय मंत्रालयों की 46 सरकारी प्रणालियों को एकीकृत किया था। 

गतिशक्ति विश्वविद्यालय की भूमिका 

  • वर्ष 2022 में स्थापित गतिशक्ति विश्वविद्यालय परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान को बढ़ावा देता है। 
  • यह पीएम गतिशक्ति और राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति, 2022 के लिए पाठ्यक्रम विकसित करने तथा प्रशिक्षण प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।  
  • जुलाई 2026 तक विश्वविद्यालय द्वारा तैयार पाठ्यक्रमों के माध्यम से 2.4 लाख से अधिक अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जा चुका था। विश्वविद्यालय समुद्री परिवहन, पुल एवं सुरंग इंजीनियरिंग, रक्षा लॉजिस्टिक्स और एकीकृत परिवहन नियोजन में अनुसंधान का भी विस्तार कर रहा है।  

प्रमुख परियोजनाएँ और उपलब्धियाँ 

  • पुणे–बेंगलुरु एक्सप्रेसवे: लगभग 699 किलोमीटर लंबा यह प्रस्तावित एक्सप्रेसवे महाराष्ट्र और कर्नाटक के औद्योगिक एवं आर्थिक क्षेत्रों को जोड़ेगा। इसके 2027–28 तक पूरा होने की उम्मीद है। पीएम गतिशक्ति के माध्यम से मार्ग में बदलाव करके वन भूमि के ओवरलैप को 19 प्रतिशत तक कम किया गया। परियोजना से यात्रा समय में 7–8 घंटे की कमी, प्रतिवर्ष लगभग 16 करोड़ लीटर ईंधन की बचत और कार्बन उत्सर्जन में लगभग 39 करोड़ किलोग्राम की कमी आने का अनुमान है। 
  • जोगीघोपा मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क, असम: ब्रह्मपुत्र के उत्तरी तट पर विकसित यह पार्क सड़क, रेल और अंतर्देशीय जलमार्गों को जोड़कर पूर्वोत्तर क्षेत्र में माल परिवहन को सुगम बनाएगा। धुबरी–फूलबाड़ी चार-लेन पुल से यात्रा दूरी 205 किलोमीटर से घटकर 20 किलोमीटर और यात्रा समय लगभग सात घंटे से घटकर 30 मिनट होने की उम्मीद है।  
  • लद्दाख–हरियाणा हरित ऊर्जा गलियारा: एनपीजी द्वारा अनुशंसित इस परियोजना में पांग से कैथल तक 480 किलोमीटर लंबी उच्च वोल्टेज प्रत्यक्ष धारा (एचवीडीसी) पारेषण लाइन शामिल है। इसका उद्देश्य 13 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी और ग्रिड एकीकरण को सक्षम बनाना है। परियोजना को वित्त वर्ष 2029–30 तक पूरा करने का लक्ष्य है। 

निष्कर्ष 

पाँच वर्षों में पीएम गतिशक्ति एक डिजिटल नियोजन मंच से विकसित होकर भारत की एकीकृत अवसंरचना रणनीति का महत्वपूर्ण आधार बन गया है। साझा डेटा, बेहतर अंतर-मंत्रालयी समन्वय, आधुनिक लॉजिस्टिक्स और विशेषज्ञ प्रशिक्षण के माध्यम से यह परियोजनाओं की दक्षता बढ़ाने में योगदान दे रहा है। भविष्य में इसका विस्तार भारत में टिकाऊ, किफायती और निर्बाध संपर्क व्यवस्था विकसित करने तथा आर्थिक विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।  

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