देश के युवाओं को रोजगारपरक और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआई यानी पीएम-सेतु योजना शुरू की है। इस योजना का उद्देश्य देश के 1,000 सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों यानी आईटीआई को अत्याधुनिक बनाना और उनमें उद्योग की मांग के अनुरूप प्रशिक्षण सुविधाएं विकसित करना है।
पीएम-सेतु योजना की शुरुआत 4 अक्टूबर 2025 को हुई थी और 4 अक्टूबर 2026 को इसने एक वर्ष पूरा कर लिया है। योजना का कुल परिव्यय 60,000 करोड़ रुपये है। इसमें केंद्र सरकार 30,000 करोड़ रुपये, राज्य सरकारें 20,000 करोड़ रुपये और उद्योग जगत 10,000 करोड़ रुपये का योगदान करेगा।
हब-एंड-स्पोक मॉडल से होगा आईटीआई का कायाकल्प
पीएम-सेतु के तहत 1,000 सरकारी आईटीआई को हब-एंड-स्पोक मॉडल के माध्यम से आधुनिक बनाया जा रहा है। इनमें 200 हब आईटीआई और 800 स्पोक आईटीआई शामिल हैं। औसतन प्रत्येक हब आईटीआई से चार स्पोक आईटीआई को जोड़ा जाएगा।
हब आईटीआई में आधुनिक प्रयोगशालाएं, स्मार्ट कक्षाएं, नवाचार केंद्र, प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण की सुविधाएं, उत्पादन इकाइयां और रोजगार एवं नियुक्ति संबंधी सेवाएं विकसित की जाएंगी। वहीं, स्पोक आईटीआई इन आधुनिक संसाधनों और प्रशिक्षण सुविधाओं को आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों तक पहुंचाने का काम करेंगे।
इस मॉडल का उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक उपकरणों, डिजिटल अध्ययन सामग्री और उद्योग-अनुरूप प्रशिक्षण तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराना है।
पांच राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों की क्षमता बढ़ेगी
योजना के दूसरे घटक के तहत भुवनेश्वर, चेन्नई, हैदराबाद, कानपुर और लुधियाना स्थित पांच राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों यानी एनएसटीआई की क्षमता बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है।
इन संस्थानों में क्षेत्र-विशिष्ट राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र विकसित किए जाएंगे। इसके साथ ही प्रशिक्षकों के उन्नत प्रशिक्षण और कौशल विकास को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों का भी सहारा लिया जा रहा है।
उद्योग की भागीदारी से तैयार होगा रोजगारपरक प्रशिक्षण
पीएम-सेतु की एक प्रमुख विशेषता इसमें उद्योग जगत की भागीदारी है। योजना के तहत रणनीतिक निवेश योजनाओं, विशेष प्रयोजन वाहनों और एंकर उद्योग साझेदारों के माध्यम से उद्योग को आईटीआई के आधुनिकीकरण और संचालन से जोड़ा जा रहा है।
उन्नत आईटीआई समूहों के लिए विशेष प्रयोजन वाहन यानी एसपीवी के माध्यम से उद्योग-नेतृत्व वाले संचालन का प्रावधान किया गया है। प्रस्तावित व्यवस्था में एंकर उद्योग साझेदार की हिस्सेदारी 51 प्रतिशत, जबकि केंद्र और राज्य सरकारों की हिस्सेदारी 24.5-24.5 प्रतिशत होगी।
एसपीवी स्थानीय उद्योगों की जरूरतों के अनुसार पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण, बुनियादी ढांचे और विद्यार्थियों को उद्योग से जोड़ने संबंधी योजनाएं तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
एक वर्ष में 850 आईटीआई की पहचान
पीएम-सेतु के पहले वर्ष में योजना के कार्यान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। अब तक 850 आईटीआई की पहचान की गई है। इनमें 172 हब आईटीआई और 678 स्पोक आईटीआई शामिल हैं।
इसके अलावा, 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने आईटीआई समूहों की पहचान कर ली है और इनके लिए समर्पित राज्य बजट बनाए हैं। वहीं, 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने योजना के कार्यान्वयन और निगरानी के लिए राज्य संचालन समितियों का गठन किया है। 26 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने उद्योग की भागीदारी आमंत्रित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
राष्ट्रीय संचालन समिति ने योजना को पायलट चरण से आगे बढ़ाते हुए पहचाने गए 200 आईटीआई समूहों में देशभर में लागू करने की मंजूरी दी है। वहीं, पहले वर्ष में 14 आईटीआई समूहों को मंजूरी मिलने की जानकारी भी सामने आई है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता से रोबोटिक्स तक नए पाठ्यक्रम
बदलती तकनीकी जरूरतों को देखते हुए पीएम-सेतु के तहत आईटीआई में नए दौर के कौशल पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। प्रशिक्षण महानिदेशालय ने शिल्पकार प्रशिक्षण योजना के तहत 32 नए पाठ्यक्रम शुरू किए हैं।
इनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर तकनीक, रोबोटिक्स, हरित हाइड्रोजन, ड्रोन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, सौर ऊर्जा, फाइव-जी और सॉफ्टवेयर परीक्षण जैसे आधुनिक क्षेत्र शामिल हैं।
इन पाठ्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को भविष्य में तेजी से बढ़ने वाले रोजगार क्षेत्रों के लिए तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।
अंतर्राष्ट्रीय साझेदारियों से मिलेगा उन्नत प्रशिक्षण
पीएम-सेतु के तहत कौशल प्रशिक्षण को अंतरराष्ट्रीय स्तर से जोड़ने के लिए विभिन्न देशों के साथ साझेदारी की गई है। एनएसटीआई चेन्नई के लिए सिंगापुर, एनएसटीआई कानपुर के लिए फ्रांस और एनएसटीआई भुवनेश्वर के लिए ऑस्ट्रेलिया के साथ समझौता ज्ञापन किए गए हैं। वहीं, एनएसटीआई हैदराबाद के लिए जर्मनी के साथ संयुक्त आशय घोषणा का आदान-प्रदान किया गया है।
इन साझेदारियों से प्रशिक्षकों और विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण पद्धतियों और वैश्विक कौशल मानकों से जोड़ने में मदद मिलेगी।
आईटीआई से रोजगार तक मजबूत होगा रास्ता
भारत में आईटीआई व्यावसायिक प्रशिक्षण व्यवस्था की महत्वपूर्ण आधारशिला हैं। वर्ष 2014 में देश में सरकारी और निजी आईटीआई की संख्या 9,776 थी, जो 2026 में बढ़कर 13,888 हो गई है। इसी अवधि में आईटीआई में विद्यार्थियों का नामांकन 9.51 लाख से बढ़कर 14.70 लाख हो गया।
पीएम-सेतु का लक्ष्य इसी विस्तारित नेटवर्क को आधुनिक सुविधाओं और उद्योग-अनुरूप प्रशिक्षण से जोड़ना है। प्रस्तावित कौशल प्रयोगशालाएं विद्यार्थियों को प्रशिक्षण के दौरान व्यावहारिक अनुभव प्रदान करेंगी।
कुल मिलाकर, पीएम-सेतु के माध्यम से सरकार आईटीआई को केवल प्रशिक्षण संस्थान के रूप में नहीं, बल्कि आधुनिक कौशल, उद्योग की जरूरत और रोजगार के बीच महत्वपूर्ण सेतु के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। इससे युवाओं को उभरती तकनीकों में प्रशिक्षण मिलने के साथ रोजगार के बदलते अवसरों के लिए तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है।