प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय (पीएम-अजय) योजना

चर्चा में क्यों? 

हाल ही में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की जानकारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2014-15 से प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-अजय) के तीनों घटकों के तहत अब तक ₹11,186 करोड़ से अधिक राशि जारी की जा चुकी है।   

प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना के बारे में 

  • प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (PM-AJAY) सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की एक केंद्र प्रायोजित योजना है। 
  • इसका उद्देश्य अनुसूचित जाति (Scheduled Caste—SC) समुदायों का सामाजिक और आर्थिक विकास करना है। 
  • इसे वित्तीय वर्ष 2021-22 से एक एकीकृत योजना के रूप में लागू किया गया है।  
  • इसमें पहले से संचालित तीन योजनाओं को शामिल किया गया है:  
    • प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना 
    • अनुसूचित जाति उप-योजना के लिए विशेष केंद्रीय सहायता 
    • बाबू जगजीवन राम छात्रावास योजना  

उद्देश्य: 

  • पीएम-अजय का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जाति समुदायों में रोजगार और आजीविका के अवसर बढ़ाकर गरीबी कम करना है। 
  • इसके साथ ही अनुसूचित जाति बहुल क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे, आवश्यक सेवाओं और शिक्षा तक पहुंच को बेहतर बनाने पर जोर दिया जाता है। 

प्रमुख उपलब्धियां: 

  • आदर्श ग्राम का विकास: वित्तीय वर्ष 2014-15 से अब तक 48,811 चयनित गांवों के लिए ₹3,545.10 करोड़ जारी किए गए हैं। इनमें से 16,022 गांवों ने आदर्श ग्राम का दर्जा हासिल कर लिया है। 
  • आजीविका के लिए सहायता: अनुदान सहायता घटक (Grant-in-Aid Component) के तहत ₹7,142.69 करोड़ जारी किए गए हैं। इससे 34.61 लाख लोगों को कौशल विकास, आजीविका और आय-सृजन से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से लाभ मिला है।
  • शैक्षिक बुनियादी ढांचा: छात्रावासों के निर्माण और संबंधित सुविधाओं के लिए ₹498.21 करोड़ जारी किए गए हैं। इस राशि से 244 छात्रावासों को सहायता मिली है, जिससे 24,131 लाभार्थियों को आवास और बेहतर शैक्षिक सुविधाओं तक पहुंच उपलब्ध हुई है।  

हाल के वर्षों में गांवों की प्रगति: 

  • वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान आदर्श ग्राम घटक के तहत ₹629.26 करोड़ जारी किए गए। 
  • इस अवधि में 8,823 गांवों को आदर्श ग्राम घोषित किया गया।

महत्व:

  • समावेशी ग्रामीण विकास: पीएम-अजय अनुसूचित जाति बहुल गांवों में बुनियादी ढांचे और आवश्यक सेवाओं की कमी को दूर करने में मदद करती है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के अंतर को कम करने और अधिक संतुलित विकास को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाता है।
  • आर्थिक सशक्तिकरण: कौशल विकास, रोजगार और आय-सृजन से जुड़ी गतिविधियां अनुसूचित जाति परिवारों की आय और आजीविका के अवसरों को मजबूत करने में मदद करती हैं। इससे गरीबी कम करने और परिवारों की आर्थिक सुरक्षा बढ़ाने में योगदान मिल सकता है।
  • शिक्षा के अवसरों में सुधार: छात्रावासों से जुड़ा बुनियादी ढांचा अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा तक पहुंच आसान बनाता है। खासकर दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए यह भौगोलिक और सामाजिक-आर्थिक बाधाओं को कम करने में सहायक हो सकता है। 
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