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स्मार्ट चश्मों पर यूरोप में प्रतिबंध की तैयारी

संदर्भ 

यूरोप में स्मार्ट चश्मों की बढ़ती लोकप्रियता के बीच नागरिकों की निजता और डेटा सुरक्षा को लेकर चिंताएं गहराने लगी हैं। नॉर्वे सार्वजनिक और संवेदनशील स्थानों पर इनके इस्तेमाल को सीमित करने के लिए अस्थायी प्रतिबंध का प्रस्ताव तैयार कर रहा है। इस कदम से तकनीकी कंपनियों, उपभोक्ताओं और नियामकों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।  

नॉर्वे में स्मार्ट चश्मों पर प्रतिबंध की तैयारी  

  • हाई-डेफिनिशन कैमरे, ऑडियो रिकॉर्डिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी सुविधाओं से लैस स्मार्ट चश्मे आधुनिक तकनीक का नया चेहरा बनकर उभरे हैं। हालांकि, इनकी बढ़ती उपयोगिता के साथ बिना सहमति रिकॉर्डिंग और व्यक्तिगत जानकारी के दुरुपयोग का खतरा भी बढ़ रहा है।  
  • इसी को देखते हुए नॉर्वे की सरकार कुछ सार्वजनिक और संवेदनशील स्थानों पर स्मार्ट चश्मों के इस्तेमाल पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव पर काम कर रही है। इसके दायरे में स्कूल, खेल के मैदान, युवा क्लब, अस्पताल, फिटनेस सेंटर, चेंजिंग रूम, सार्वजनिक समुद्र तट, पार्क, संग्रहालय और संगीत कार्यक्रमों के स्थल शामिल हो सकते हैं।  
  • वस्तुतः सरकार का उद्देश्य इन उपकरणों की बिक्री रोकना नहीं, बल्कि इनके सुरक्षित इस्तेमाल के लिए नियम तैयार करना है। इसके लिए विशेषज्ञ समिति से तकनीकी चुनौतियों का आकलन करने और दीर्घकालिक कानूनी ढांचा सुझाने की अपेक्षा की जा रही है। ओस्लो के नगर निगम स्कूलों में स्मार्ट चश्मों के इस्तेमाल पर पहले ही रोक लगाई जा चुकी है।  

बिना सहमति रिकॉर्डिंग बनी बड़ी चुनौती 

  • स्मार्ट चश्मों को लेकर सबसे बड़ी चिंता यह है कि इनके माध्यम से रिकॉर्डिंग किए जाने का पता लगाना मुश्किल हो सकता है। स्मार्टफोन से तस्वीर लेने या वीडियो बनाने के लिए आमतौर पर फोन को सामने उठाना पड़ता है, जबकि स्मार्ट चश्मे आंखों के स्तर से ही तस्वीरें लेने, आसपास की आवाजें रिकॉर्ड करने और लाइव वीडियो प्रसारित करने में सक्षम हैं। 
  • ऐसी स्थिति में आसपास मौजूद लोगों को यह जानने का स्पष्ट संकेत नहीं मिलता कि उनकी गतिविधियां रिकॉर्ड की जा रही हैं या नहीं। अस्पतालों, चेंजिंग रूम और बच्चों से जुड़े स्थानों पर यह जोखिम विशेष रूप से गंभीर हो सकता है। 
  • इसके अलावा, एआई आधारित फेस रिकग्निशन तकनीक के साथ स्मार्ट चश्मों का इस्तेमाल अजनबियों की पहचान करने और उनकी व्यक्तिगत जानकारी जुटाने में किया जा सकता है। इससे निजता के उल्लंघन और व्यक्तिगत जानकारी के दुरुपयोग की आशंका बढ़ती है। मौजूदा कानूनी व्यवस्थाओं के लिए लगातार और गुप्त रिकॉर्डिंग करने वाले इन उपकरणों को नियंत्रित करना भी एक नई चुनौती है। 

दूसरे देशों में भी बढ़ रही नियामकीय सख्ती 

  • स्मार्ट चश्मों से जुड़े जोखिमों को लेकर यूरोप और उत्तरी अमेरिका के कई देशों में अलग-अलग स्तर पर कदम उठाए जा रहे हैं। 
  • नीदरलैंड और बेल्जियम में चश्मों के खुदरा विक्रेता हैंस एंडर्स ने नियामकीय स्पष्टता की प्रतीक्षा में मेटा के रे-बैन स्मार्ट चश्मों की बिक्री रोक दी। नीदरलैंड में नए नियमों पर चर्चा जारी है, जबकि जर्मनी के हैम्बर्ग में क्षेत्रीय प्रतिबंधों की संभावनाएं तलाशने की बात सामने आई है। 
  • यूनाइटेड किंगडम में ब्रिटिश सिनेमा एसोसिएशन ने सिनेमाघरों में कैमरे वाले चश्मों के इस्तेमाल को सीमित करने संबंधी दिशा-निर्देश बनाए हैं। इसका उद्देश्य फिल्मों की अनधिकृत रिकॉर्डिंग रोकना और दर्शकों की निजता सुरक्षित रखना है। इंग्लैंड और वेल्स की अदालतों में भी सुरक्षा जांच के दौरान स्मार्ट चश्मे जमा कराने की व्यवस्था लागू है। 
  • अमेरिका में न्यूयॉर्क के कुछ नाइटक्लब, जिम और अदालतों ने स्थानीय स्तर पर ऐसे उपकरणों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाए हैं। वहीं, कैलिफोर्निया में निजी स्थानों पर गुप्त रिकॉर्डिंग को दंडनीय बनाने संबंधी प्रस्ताव पर राजनीतिक बहस जारी रही है। 

निर्माता अपना रहे हैं तकनीकी सुरक्षा उपाय 

  • निजता संबंधी चिंताओं को कम करने के लिए स्मार्ट चश्मा निर्माता कई तकनीकी उपाय अपना रहे हैं। रे-बैन मेटा जैसे उपकरणों में कैमरे के पास एक एलईडी संकेतक दिया जाता है, जो तस्वीर लेते समय झपकता है और वीडियो रिकॉर्डिंग के दौरान लगातार जलता रहता है। 
  • कुछ उपकरणों में ऐसे सॉफ्टवेयर अपडेट भी शामिल किए गए हैं, जो संकेतक को ढकने या उसकी रोशनी बाधित होने पर कैमरे को निष्क्रिय कर सकते हैं। रिकॉर्डिंग की अवधि सीमित करना और तस्वीर लेते समय ध्वनि संकेत देना भी इन उपायों का हिस्सा है।
  • हालांकि, निजता समर्थकों का तर्क है कि तेज धूप या भीड़भाड़ वाले स्थानों पर छोटी एलईडी लाइट आसानी से दिखाई नहीं देती। इसलिए, केवल इन तकनीकी उपायों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं हो सकता। 

बिक्री और भविष्य की तकनीक पर क्या होगा असर? 

  • सार्वजनिक स्थानों पर इस्तेमाल सीमित होने से स्मार्ट चश्मों की व्यावसायिक उपयोगिता प्रभावित हो सकती है। इन उपकरणों की खासियत रोजमर्रा की गतिविधियों में सहज इस्तेमाल है। पार्क, समुद्र तट, शॉपिंग सेंटर और फिटनेस क्लब जैसे स्थानों पर प्रतिबंध इनके आकर्षण को कम कर सकते हैं। 
  • नियामकीय अनिश्चितता के कारण उपभोक्ता भी खरीदारी टाल सकते हैं, जबकि खुदरा विक्रेताओं की बिक्री रोकने से कंपनियों को आर्थिक नुकसान हो सकता है। 
  • भविष्य में निर्माता अधिक स्पष्ट रिकॉर्डिंग संकेतक, एआई आधारित चेहरा धुंधला करने की सुविधा और संवेदनशील क्षेत्रों में कैमरा स्वतः बंद करने वाली तकनीक विकसित कर सकते हैं। सार्वजनिक स्थानों पर फेस रिकग्निशन के इस्तेमाल को सीमित करने और बिना कैमरे वाले ऑडियो स्मार्ट चश्मों की पेशकश बढ़ाने पर भी जोर दिया जा सकता है। 

निष्कर्ष 

  • स्मार्ट चश्मों का भविष्य केवल तकनीकी प्रगति पर निर्भर नहीं करेगा, बल्कि इस बात पर भी तय होगा कि कंपनियां नागरिकों की निजता और डेटा सुरक्षा की रक्षा कैसे करती हैं। ऐसे में सरकारों, निर्माताओं और उपभोक्ताओं के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है, ताकि नवाचार को बढ़ावा देने के साथ व्यक्तिगत स्वतंत्रता और निजता के अधिकारों की रक्षा भी सुनिश्चित की जा सके। 
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