संदर्भ
भारत अपनी बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सौर एवं पवन ऊर्जा क्षमता का तेजी से विस्तार कर रहा है। हालाँकि, इन स्रोतों से बिजली उत्पादन मौसम और समय पर निर्भर करता है। इसलिए अतिरिक्त बिजली का भंडारण करके आवश्यकता के समय उसकी आपूर्ति करना महत्त्वपूर्ण हो गया है। इस संदर्भ में पंप्ड स्टोरेज परियोजनाएँ (Pumped Storage Projects-PSP) भारत की ऊर्जा सुरक्षा, विद्युत ग्रिड की स्थिरता और नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
ऊर्जा भंडारण की बढ़ती आवश्यकता
- भारत ने वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित विद्युत उत्पादन क्षमता हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। जुलाई 2026 तक देश की स्थापित गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता 300 गीगावाट से अधिक हो चुकी थी। वित्त वर्ष 2025–26 में लगभग 55.29 गीगावाट अतिरिक्त क्षमता जोड़ी गई।
- केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के अनुसार, वित्त वर्ष 2031–32 तक भारत को 73.93 गीगावाट ऊर्जा भंडारण क्षमता की आवश्यकता होगी। इसमें 26.69 गीगावाट पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं और 47.24 गीगावाट बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (BESS) की क्षमता शामिल है।
पंप्ड स्टोरेज परियोजना क्या है?
- पंप्ड स्टोरेज परियोजना पानी की स्थितिज ऊर्जा का उपयोग करके बिजली का भंडारण और उत्पादन करने वाली प्रणाली है। इसमें सामान्यतः अलग-अलग ऊँचाइयों पर दो जलाशय बनाए जाते हैं।
- जब बिजली की मांग कम होती है या नवीकरणीय ऊर्जा से अतिरिक्त बिजली उपलब्ध होती है, तब पानी को निचले जलाशय से पंप करके ऊपरी जलाशय में पहुँचाया जाता है। बिजली की मांग बढ़ने पर पानी को नीचे छोड़ा जाता है, जिससे टर्बाइनों के माध्यम से बिजली उत्पन्न होती है।
- इस प्रक्रिया से अतिरिक्त बिजली का बाद में उपयोग संभव होता है। हालाँकि, पंपिंग और उत्पादन के दौरान ऊर्जा की हानि होती है, इसलिए यह प्रणाली ऊर्जा का शुद्ध स्रोत नहीं, बल्कि ऊर्जा भंडारण का माध्यम है।
पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं के प्रकार
जलाशयों और प्राकृतिक जलधाराओं के संबंध के आधार पर इन परियोजनाओं को तीन प्रकारों में बाँटा जाता है।
- ऑन-स्ट्रीम: दोनों जलाशय नदी या प्राकृतिक जलधारा पर स्थित होते हैं।
- ऑफ-स्ट्रीम ओपन-लूप: एक जलाशय प्राकृतिक जलधारा से जुड़ा होता है, जबकि दूसरा उससे अलग स्थित होता है।
- ऑफ-स्ट्रीम क्लोज्ड-लूप: दोनों जलाशय बारहमासी प्राकृतिक जलधाराओं से बाहर स्थित होते हैं। उपयुक्त स्थलों पर ऐसी परियोजनाएँ नदी पारिस्थितिकी पर प्रभाव कम करने में सहायक हो सकती हैं।
परियोजनाओं की उपयुक्तता निर्धारित करने के लिए स्थलाकृति, भूविज्ञान, जल उपलब्धता, पर्यावरणीय प्रभाव और पारेषण नेटवर्क से कनेक्टिविटी का आकलन किया जाता है।
भारत में वर्तमान क्षमता और संभावनाएँ
- अगस्त 2026 तक उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, भारत में 10 पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं की कुल 7.43 गीगावाट क्षमता परिचालन में थी। इसके अतिरिक्त, 11 परियोजनाओं के अंतर्गत 15.87 गीगावाट क्षमता निर्माणाधीन या कार्यान्वयन के चरण में थी। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा आठ परियोजनाओं की 10.40 गीगावाट क्षमता पर सहमति दी गई थी या उसका मूल्यांकन किया गया था।
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विश्व में पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं की स्थापित क्षमता
- पंप्ड स्टोरेज जलविद्युत, बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडारण का विश्व में सबसे व्यापक रूप से उपयोग किया जाने वाला स्वरूप है। यह अन्य ऊर्जा भंडारण प्रौद्योगिकियों की तुलना में अपने स्थापित पैमाने और परिपक्वता को दर्शाता है।
- अंतर्राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (आईआरईएनए) के अनुसार, वर्ष 2025 के अंत में विश्व में पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज की कुल स्थापित क्षमता 159.8 गीगावाट थी। इसमें चीन की हिस्सेदारी लगभग 66 गीगावाट थी। इसके बाद जापान और अमेरिका क्रमशः लगभग 22 गीगावाट और 19 गीगावाट की स्थापित क्षमता के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर थे।
- भारत पंप्ड स्टोरेज की स्थापित क्षमता के मामले में विश्व में चौथे स्थान पर है। वर्ष 2025 के अंत में भारत की स्थापित क्षमता 7.18 गीगावाट थी। जुलाई 2026 तक देश की यह क्षमता बढ़कर 7.43 गीगावाट हो गई, जो वैश्विक पंप्ड स्टोरेज परिदृश्य में भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करती है।
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- देश में कुल 345.38 गीगावाट संभावित क्षमता वाली 320 परियोजनाओं की पहचान की गई है। इनमें 56.67 गीगावाट की 62 ऑन-स्ट्रीम और 288.71 गीगावाट की 258 ऑफ-स्ट्रीम परियोजनाएँ शामिल हैं।
क्षेत्रवार संभावित क्षमता इस प्रकार है:
- पश्चिमी क्षेत्र: 129.72 गीगावाट
- दक्षिणी क्षेत्र: 97.76 गीगावाट
- पूर्वी क्षेत्र: 53.41 गीगावाट
- उत्तरी क्षेत्र: 50.32 गीगावाट
- पूर्वोत्तर क्षेत्र: 14.18 गीगावाट
- महाराष्ट्र में 67.36 गीगावाट और गुजरात में 33.36 गीगावाट संभावित क्षमता चिह्नित की गई है।
वस्तुतः ये आँकड़े भारत में पंप्ड स्टोरेज विकास की व्यापक संभावनाओं को दर्शाते हैं। हालाँकि, वास्तविक क्षमता का विकास तकनीकी व्यवहार्यता, निवेश और पर्यावरणीय मंजूरियों पर निर्भर करेगा।
वर्ष 2035–36 तक क्षमता विस्तार
- केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की योजना के अनुसार, वर्ष 2035–36 तक पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं की संचयी क्षमता बढ़ाकर 105.56 गीगावाट करने की परिकल्पना की गई है। इसके अंतर्गत 100.81 गीगावाट क्षमता वाली परियोजनाओं को चालू करने की योजना शामिल है, जिसमें निर्माणाधीन परियोजनाएँ भी सम्मिलित हैं।
- इस विस्तार से बिजली की अधिकतम मांग पूरी करने, नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर उपयोग और ग्रिड की विश्वसनीयता बढ़ाने में सहायता मिल सकती है।
सरकारी पहल और नीतिगत उपाय
सरकार ने पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं के विकास में तेजी लाने के लिए कई कदम उठाए हैं।
- नीतिगत दिशानिर्देश: विद्युत मंत्रालय ने अप्रैल 2023 में परियोजनाओं के विकास को प्रोत्साहित करने के लिए दिशानिर्देश जारी किए।
- प्रतिस्पर्धी बोली: फरवरी 2025 में भंडारण क्षमता और भंडारित ऊर्जा की खरीद के लिए टैरिफ-आधारित प्रतिस्पर्धी बोली संबंधी दिशानिर्देश अधिसूचित किए गए।
- पारेषण शुल्क में छूट: पात्र परियोजनाओं के लिए निर्धारित शर्तों के अधीन अंतरराज्यीय पारेषण प्रणाली (ISTS) शुल्क में 100 प्रतिशत छूट का प्रावधान है।
- अनुमोदन प्रक्रिया: विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) पर सीईए की सहमति की समय-सीमा 90 दिनों से घटाकर 50 दिन की गई।
- पर्यावरणीय एवं डिजिटल उपाय: पात्र परियोजनाओं के मूल्यांकन और सर्वेक्षण प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने तथा जलविद्युत डीपीआर पोर्टल के माध्यम से निगरानी को बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
इन पहलों का उद्देश्य परियोजनाओं की व्यवहार्यता बढ़ाना और ऊर्जा भंडारण अवसंरचना के विकास में तेजी लाना है।
महत्त्व और चुनौतियाँ
- पंप्ड स्टोरेज परियोजनाएँ दीर्घ अवधि तक ऊर्जा भंडारण, अधिकतम मांग के समय बिजली आपूर्ति और सौर एवं पवन ऊर्जा के बेहतर एकीकरण में सहायक हैं। ये बिजली उत्पादन और मांग के बीच संतुलन बनाए रखने तथा विद्युत ग्रिड को अधिक लचीला बनाने में योगदान देती हैं।
- हालाँकि, उच्च प्रारंभिक लागत, लंबी निर्माण अवधि, उपयुक्त स्थलों की उपलब्धता, जल संसाधनों का प्रबंधन और पर्यावरणीय प्रभाव इनके विकास की प्रमुख चुनौतियाँ हैं। इनके समाधान के लिए बेहतर नियोजन, पर्याप्त निवेश और प्रभावी पर्यावरणीय सुरक्षा उपाय आवश्यक हैं।
निष्कर्ष
- भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करने के लिए बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ ऊर्जा भंडारण का विस्तार भी आवश्यक है। 345.38 गीगावाट की चिह्नित संभावित क्षमता और वर्ष 2035–36 तक प्रस्तावित विस्तार पंप्ड स्टोरेज क्षेत्र की व्यापक संभावनाओं को दर्शाते हैं। उचित नीतिगत समर्थन, निवेश और पर्यावरणीय संतुलन के साथ ये परियोजनाएँ भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने तथा विश्वसनीय, स्वच्छ और टिकाऊ विद्युत प्रणाली विकसित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।