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बुक्सा टाइगर रिजर्व में बाघों की वापसी

संदर्भ 

  • पश्चिम बंगाल के बुक्सा टाइगर रिजर्व में बाघों की आबादी फिर से बसाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। 2 अक्टूबर, 2026 को तीन वर्षीय बाघिन T138 को बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से लाकर बुक्सा में छोड़ा गया। इसके साथ ही रिजर्व में बाघों की एक सक्षम और स्वावलंबी आबादी स्थापित करने के चरणबद्ध कार्यक्रम की शुरुआत हुई है। आने वाले समय में दो से तीन और बाघों को यहां लाए जाने की संभावना है।   
  • T138 की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जाएगी। इसके लिए टेलीमेट्री, कैमरा ट्रैप और फील्ड मॉनिटरिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल होगा। इससे उसके स्वास्थ्य, व्यवहार, गतिविधियों और नए आवास के प्रति अनुकूलन का आकलन किया जाएगा। 

बुक्सा में बाघों की वापसी क्यों महत्वपूर्ण? 

  • बुक्सा को 1983 में टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था और यह देश का 15वां टाइगर रिजर्व है। करीब 760.87 वर्ग किलोमीटर में फैला यह रिजर्व जैव-विविधता और वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। 
  • उत्तर में यह भूटान के जंगलों से जुड़ा है। पूर्व में इसका संपर्क कोचुगांव के जंगलों और मानस टाइगर रिजर्व से, जबकि पश्चिम में जलदापाड़ा राष्ट्रीय उद्यान से है। इस तरह बुक्सा पूर्वोत्तर भारत के महत्वपूर्ण वन्यजीव गलियारों का हिस्सा है।
  • हालांकि, पिछले कई वर्षों से यहां स्थायी बाघ आबादी नहीं रही है। आवास का क्षरण और विखंडन, भूमि उपयोग में बदलाव तथा शिकार प्रजातियों की कमी इसके प्रमुख कारणों में शामिल रहे हैं।

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से हस्तांतरण 

  • बाघों के पुनर्वास के लिए ऐसे स्रोत क्षेत्र की जरूरत होती है, जिसका पर्यावरण और भू-भाग नए क्षेत्र से काफी हद तक मेल खाता हो। बिहार का वाल्मीकि टाइगर रिजर्व तराई आर्क लैंडस्केप के पूर्वी हिस्से में स्थित है और इसके प्राकृतिक आवास की बुक्सा से कई समानताएं हैं। इसी वजह से इसे बाघों के स्थानांतरण के लिए उपयुक्त माना गया।  
  • पश्चिम बंगाल के सुंदरबन में भी बाघों की अच्छी आबादी है, लेकिन वहां का मैंग्रोव और ज्वारीय पारिस्थितिकी तंत्र बुक्सा से काफी अलग है। इसलिए सुंदरबन से बाघ लाने की तुलना में वाल्मीकि से बाघों का स्थानांतरण अधिक उपयुक्त माना गया। 

भारत में बाघ पुनर्वास का अनुभव 

  • राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के अनुसार, भारत में बाघों का पुनर्वास एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य ऐसे क्षेत्र में फिर से बाघों की आबादी स्थापित करना है जहां वे ऐतिहासिक रूप से पाए जाते थे, लेकिन बाद में स्थानीय रूप से विलुप्त हो गए। 
  • भारत में इस कार्यक्रम की शुरुआत 2008 में सरिस्का और पन्ना टाइगर रिजर्व से हुई। इसके बाद करीब 12 टाइगर रिजर्व में बाघ पुनर्वास के प्रयास किए गए हैं। कई जगहों पर इसके सकारात्मक परिणाम मिले हैं, लेकिन हर क्षेत्र में सफलता समान नहीं रही।

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के बारे में 

  • राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन एक वैधानिक निकाय है।
  • इसका गठन वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के सक्षम प्रावधानों के तहत किया गया है। 
  • एनटीसीए, बाघों की स्थिति के आकलन, चल रही संरक्षण पहलों और विशेष रूप से गठित समितियों की सिफारिशों के आधार पर सलाह/मानक दिशानिर्देशों के माध्यम से निगरानी बनाए रखते हुए, देश में बाघ संरक्षण को मजबूत करने के लिए वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के दायरे में अपने जनादेश को पूरा कर रहा है। 
  • उदाहरण के लिए, सतकोसिया टाइगर रिजर्व में स्थानांतरित बाघों को नए वातावरण के अनुकूल होने में कठिनाइयां आईं। इसके साथ मानव-बाघ संघर्ष और पशुधन के शिकार जैसी समस्याएं भी सामने आईं। ऐसे अनुभवों को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने बाघ पुनर्वास के लिए विस्तृत प्रोटोकॉल तैयार किया है, जिसमें स्थल चयन से लेकर बाघों की निगरानी और स्थानीय सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों का आकलन शामिल है।    

बुक्सा के सामने बड़ी चुनौतियां 

  • बुक्सा में बाघों को फिर से बसाना आसान नहीं होगा। रिजर्व के भीतर और आसपास बस्तियां, राजस्व गांव और चाय बागान मौजूद हैं। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए करीब 300 परिवारों के पुनर्वास पर भी सहमति बनी है।
  • इसके अलावा, रेलवे लाइन जैसी रैखिक बुनियादी ढांचा परियोजनाएं वन्यजीवों की आवाजाही को प्रभावित करती हैं। इस क्षेत्र में हाथियों की मौत की घटनाएं भी चिंता का विषय रही हैं। 
  • भूटान के नजदीक होने के कारण बुक्सा से गुजरने वाले मार्ग पर भारी वाणिज्यिक यातायात भी एक चुनौती है। 
  • इसलिए बुक्सा में बाघों की वापसी केवल बाघों को जंगल में छोड़ने की प्रक्रिया नहीं है। इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि उपयुक्त आवास, पर्याप्त शिकार, सुरक्षित वन्यजीव गलियारे और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को किस तरह सुनिश्चित किया जाता है। यदि ये परिस्थितियां बनीं, तो बुक्सा में एक स्थायी और स्वावलंबी बाघ आबादी विकसित करने का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।   
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