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बच्चों में बढ़ता मोटापा: WHO ने जारी की पहली वैश्विक गाइडलाइन

प्रारंभिक परीक्षा (Prelims): WHO; बच्चों और किशोरों में मोटापा; गैर-संचारी रोग; टाइप-2 मधुमेह; हृदय रोग; समग्र उपचार; डिजिटल स्वास्थ्य
मुख्य परीक्षा (Mains): GS Paper II – स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे; सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप; सार्वजनिक स्वास्थ्य; सामाजिक न्याय, GS Paper III – विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी; स्वास्थ्य एवं पोषण; गैर-संचारी रोग

चर्चा में क्यों?

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने पहली बार बच्चों और किशोरों में मोटापे की समस्या से निपटने के लिए वैश्विक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
  • इन दिशा-निर्देशों में स्वास्थ्य व्यवस्था और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए बच्चों तथा किशोरों में मोटापे की रोकथाम और उपचार से जुड़ी साक्ष्य-आधारित सिफारिशें दी गई हैं।
  • WHO ने केवल दवाओं या सर्जरी पर निर्भर रहने के बजाय स्वस्थ आहार, शारीरिक गतिविधि, व्यवहार में बदलाव, मानसिक स्वास्थ्य और लंबे समय तक देखभाल पर जोर दिया है।

बच्चों में बढ़ता मोटापा क्यों चिंता का विषय है?

  • WHO मोटापे को एक दीर्घकालिक और बार-बार होने वाली बीमारी के रूप में देखता है, जिसे उचित और लगातार स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से नियंत्रित किया जा सकता है।
  • WHO के अनुसार, वर्ष 2024 में 5–19 वर्ष की आयु के लगभग 17 करोड़ बच्चे और किशोर मोटापे से प्रभावित थे। इनमें लगभग 7 करोड़ बच्चे 5–9 वर्ष की आयु के और 10 करोड़ किशोर 10–19 वर्ष की आयु के थे।
  • 1990 के बाद 5–19 वर्ष की आयु के लोगों में मोटापे की दर में काफी वृद्धि हुई है। यह लगभग 2% से बढ़कर 8% हो गई है।
  • बचपन का मोटापा केवल शरीर के वजन से जुड़ी समस्या नहीं है। इसका असर बच्चों के शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक भागीदारी और जीवन की गुणवत्ता पर भी पड़ सकता है।

समग्र और बहुआयामी उपचार

  • WHO ने मोटापे से प्रभावित बच्चों और किशोरों के लिए संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और व्यवहार में बदलाव से जुड़े व्यवस्थित हस्तक्षेप की मजबूत सिफारिश की है।
  • इन उपायों को अलग-अलग या एक समग्र कार्यक्रम के रूप में लागू किया जा सकता है, जिसमें कई प्रकार की स्वास्थ्य सेवाएं और सहायता शामिल हों।
  • इसका उद्देश्य केवल वजन कम करना नहीं है, बल्कि बच्चे के समग्र स्वास्थ्य, दैनिक कार्यक्षमता और जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना है।

जीवनशैली और व्यवहार में बदलाव पर जोर

WHO की गाइडलाइन में मोटापे के प्रबंधन के लिए स्वस्थ जीवनशैली को सबसे महत्वपूर्ण आधार माना गया है।

इसमें शामिल हैं:

  • संतुलित और पौष्टिक आहार
  • नियमित शारीरिक गतिविधि
  • व्यवहार में सकारात्मक बदलाव
  • लंबे समय तक स्वास्थ्य निगरानी
  • परिवार और देखभाल करने वालों की भागीदारी

WHO का मानना है कि केवल थोड़े समय के लिए वजन कम करने की बजाय लंबे समय तक स्वस्थ आदतों को बनाए रखना अधिक महत्वपूर्ण है।

डिजिटल स्वास्थ्य का उपयोग

  • WHO ने बच्चों और किशोरों में मोटापे के प्रबंधन के लिए डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को सशर्त रूप से उपयोगी माना है।
  • हालांकि, इनके इस्तेमाल में माता-पिता या देखभाल करने वालों की उचित निगरानी जरूरी है।
  • यह स्वास्थ्य शिक्षा, व्यवहार में बदलाव के लिए सहायता और स्वास्थ्य की निगरानी में डिजिटल तकनीक की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

दवाओं और सर्जरी के लिए उम्र के अनुसार अलग दृष्टिकोण

  • WHO 0–9 वर्ष के बच्चों में मोटापे के उपचार के लिए दवाओं, बैरिएट्रिक सर्जरी या वजन कम करने वाले उपकरणों की सिफारिश नहीं करता है।
  • वहीं, 10–19 वर्ष के किशोरों में, यदि निगरानी में चलाया गया समग्र जीवनशैली कार्यक्रम अपेक्षित परिणाम नहीं देता है, तो स्वीकृत दवाओं पर विचार किया जा सकता है।
  • गंभीर मोटापे से प्रभावित किशोरों में बैरिएट्रिक सर्जरी पर भी विचार किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए सख्त शर्तें और विशेषज्ञों की निगरानी आवश्यक होगी।
  • इस प्रकार WHO ने उपचार के लिए उम्र के अनुसार और चरणबद्ध दृष्टिकोण अपनाया है।
  • मोटापे का प्रबंधन केवल वजन कम करने तक सीमित नहीं
    • WHO की गाइडलाइन का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि मोटापे के उपचार का उद्देश्य केवल शरीर का वजन कम करना नहीं होना चाहिए।
    • उपचार व्यक्ति-केंद्रित, उम्र के अनुसार और बच्चों तथा उनके परिवारों की जरूरतों के अनुरूप होना चाहिए।
    • इसके साथ ही लंबे समय तक स्वास्थ्य निगरानी और लगातार देखभाल भी आवश्यक है।

बच्चों में मोटापा सार्वजनिक स्वास्थ्य की चुनौती क्यों है?

बचपन और किशोरावस्था में मोटापा आगे चलकर कई गैर-संचारी रोगों (NCDs) का खतरा बढ़ा सकता है।

इनमें शामिल हैं:

  • टाइप-2 मधुमेह
  • हृदय संबंधी रोग
  • मोटापे से जुड़ी अन्य स्वास्थ्य समस्याएं

इसके अलावा, मोटापे का सामाजिक और मानसिक प्रभाव भी हो सकता है। मोटापे से प्रभावित बच्चों को भेदभाव, मजाक, बुलिंग और सामाजिक अलगाव का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए बच्चों में मोटापा केवल व्यक्तिगत जीवनशैली की समस्या नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, सामाजिक और विकास से जुड़ी चुनौती है।

रोकथाम के लिए पूरे समाज की भागीदारी जरूरी

  • WHO का कहना है कि केवल उपचार के माध्यम से दुनिया में बढ़ते मोटापे की समस्या को नियंत्रित नहीं किया जा सकता।
  • सरकारों को ऐसे वातावरण तैयार करने की जरूरत है, जहां बच्चों और परिवारों के लिए स्वस्थ विकल्प आसानी से उपलब्ध और किफायती हों।

इसके लिए कई क्षेत्रों में एक साथ काम करना होगा:

  • शिक्षा: स्कूलों में स्वस्थ खान-पान और शारीरिक गतिविधियों को बढ़ावा देना।
  • शहरी नियोजन: ऐसे वातावरण तैयार करना जो लोगों को शारीरिक गतिविधि के लिए प्रोत्साहित करें।
  • परिवहन: पैदल चलने और सक्रिय परिवहन को बढ़ावा देना।
  • सामाजिक सुरक्षा: पौष्टिक भोजन तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करना।
  • नियमन और आर्थिक उपाय: स्वस्थ खाद्य वातावरण को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक नीतियां बनाना।

इससे स्पष्ट होता है कि बच्चों में मोटापे से निपटने के लिए बहु-क्षेत्रीय दृष्टिकोण जरूरी है।

प्रमुख चुनौतियां

  • अस्वास्थ्यकर खाद्य वातावरण: आसानी से उपलब्ध और आक्रामक तरीके से प्रचारित किए जाने वाले अधिक कैलोरी वाले खाद्य पदार्थ बच्चों की खान-पान की आदतों को प्रभावित कर सकते हैं।
  • शारीरिक निष्क्रियता: शहरीकरण, बैठकर रहने वाली जीवनशैली और स्क्रीन पर बढ़ता समय बच्चों की शारीरिक गतिविधि को कम कर सकता है।
  • भेदभाव और सामाजिक दबाव: मोटापे से प्रभावित बच्चों को बुलिंग और सामाजिक अलगाव का सामना करना पड़ सकता है, जिससे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।
  • स्वास्थ्य सेवाओं तक असमान पहुंच: मोटापे के लिए विशेष स्वास्थ्य सेवाएं सभी बच्चों को समान रूप से उपलब्ध नहीं हैं। सामाजिक-आर्थिक स्थिति और भौगोलिक क्षेत्र के कारण इसमें अंतर हो सकता है।
  • लंबे समय तक निगरानी की आवश्यकता: मोटापे का प्रबंधन थोड़े समय के प्रयास से नहीं होता। इसके लिए लंबे समय तक स्वस्थ व्यवहार और लगातार स्वास्थ्य देखभाल जरूरी है।

आगे की राह

  • बच्चों और किशोरों में मोटापे से निपटने के लिए रोकथाम, समय पर पहचान और लंबे समय तक उपचार पर ध्यान देना चाहिए।
  • सरकारों को स्कूलों में पोषण और शारीरिक गतिविधि से जुड़े कार्यक्रमों को मजबूत करने के साथ-साथ स्वस्थ और सस्ता भोजन उपलब्ध कराने पर भी ध्यान देना चाहिए।
  • स्वास्थ्य व्यवस्था में बहु-विषयक और परिवार-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए, जिसमें शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य को भी शामिल किया जाए।
  • नीतिगत स्तर पर खाद्य वातावरण को स्वस्थ बनाने के लिए नियामक और आर्थिक उपाय किए जा सकते हैं। साथ ही शहरी नियोजन और परिवहन नीतियों के माध्यम से सक्रिय जीवनशैली को बढ़ावा दिया जा सकता है।

निष्कर्ष

  • WHO द्वारा बच्चों और किशोरों में मोटापे पर जारी पहली वैश्विक गाइडलाइन समग्र, साक्ष्य-आधारित और व्यक्ति-केंद्रित स्वास्थ्य देखभाल की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
  • गाइडलाइन में स्पष्ट किया गया है कि बच्चों में मोटापे के प्रबंधन का आधार केवल दवाएं या सर्जरी नहीं होनी चाहिए। इसके बजाय स्वस्थ आहार, शारीरिक गतिविधि, व्यवहार में बदलाव, परिवार का सहयोग और मानसिक स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
  • सरकारों के लिए बड़ी चुनौती ऐसा सामाजिक और भौतिक वातावरण तैयार करना है, जहां बच्चों के लिए स्वस्थ विकल्प चुनना आसान हो। बचपन से ही मोटापे को रोकने से भविष्य में गैर-संचारी रोगों को कम करने और बेहतर स्वास्थ्य सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।

प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न

प्रश्न: WHO की बच्चों और किशोरों में मोटापे से संबंधित वैश्विक गाइडलाइन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. WHO मोटापे से प्रभावित बच्चों और किशोरों के लिए संतुलित आहार, शारीरिक गतिविधि और व्यवहार में बदलाव से जुड़े व्यवस्थित उपायों की सिफारिश करता है।
  2. WHO 0–9 वर्ष के बच्चों में मोटापे के उपचार के लिए दवाओं को पहली प्राथमिकता के रूप में सुझाता है।
  3. बच्चों और किशोरों में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का उपयोग माता-पिता या देखभाल करने वालों की उचित निगरानी के साथ किया जा सकता है।
  4. गंभीर मोटापे से प्रभावित किशोरों में कुछ परिस्थितियों में बैरिएट्रिक सर्जरी पर विचार किया जा सकता है।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

A. केवल 1 और 2
B. केवल 1, 3 और 4
C. केवल 2, 3 और 4
D. 1, 2, 3 और 4

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

“बचपन का मोटापा केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य की समस्या नहीं, बल्कि एक बहुआयामी सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक चुनौती है।” WHO की बच्चों और किशोरों में मोटापे पर पहली वैश्विक गाइडलाइन के संदर्भ में चर्चा कीजिए।

FAQs

1. WHO की बच्चों और किशोरों में मोटापे से संबंधित नई गाइडलाइन क्या है?

यह गाइडलाइन बच्चों और किशोरों में मोटापे की रोकथाम और उपचार के लिए साक्ष्य-आधारित सुझाव देती है। इसमें आहार, शारीरिक गतिविधि, व्यवहार में बदलाव, मानसिक स्वास्थ्य और लंबे समय तक देखभाल पर जोर दिया गया है।

2. वर्ष 2024 में 5–19 वर्ष की आयु के कितने बच्चे और किशोर मोटापे से प्रभावित थे?

WHO के अनुसार, वर्ष 2024 में 5–19 वर्ष की आयु के लगभग 17 करोड़ बच्चे और किशोर मोटापे से प्रभावित थे।

3. क्या WHO बच्चों में मोटापे के लिए दवाओं की सिफारिश करता है?

WHO 0–9 वर्ष के बच्चों में मोटापे के उपचार के लिए दवाओं की सिफारिश नहीं करता है।

4. क्या WHO किशोरों में बैरिएट्रिक सर्जरी की अनुमति देता है?

गंभीर मोटापे से प्रभावित किशोरों में कुछ परिस्थितियों में बैरिएट्रिक सर्जरी पर विचार किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए सख्त शर्तों और विशेषज्ञों की निगरानी की आवश्यकता होती है।

5. मोटापे के प्रबंधन में मानसिक स्वास्थ्य को क्यों शामिल किया गया है?

मोटापे से प्रभावित बच्चों को सामाजिक भेदभाव, बुलिंग, चिंता, अवसाद और कम आत्मविश्वास जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए मोटापे के उपचार में मानसिक स्वास्थ्य को भी महत्व दिया गया है।

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