कनाडा के तेल समृद्ध प्रांत अल्बर्टा में अलगाववादी आंदोलन को बड़ा झटका लगा है। सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को हुए जनमत संग्रह में अधिकांश मतदाताओं ने कनाडा के साथ बने रहने का समर्थन किया। इससे प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को बड़ी राजनीतिक राहत मिली है। अमेरिका के साथ व्यापार नीतियों को लेकर बढ़ते तनाव और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने संबंधी टिप्पणियों के बीच यह परिणाम अहम माना जा रहा है।
21 अक्टूबर की सुबह तक 90 प्रतिशत से अधिक मतों की गिनती हो चुकी थी। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, कुल 19,51,821 मतों में से 14,67,256 मतदाताओं ने अल्बर्टा के कनाडा का प्रांत बने रहने के विकल्प का समर्थन किया। यह कुल मतों का 75 प्रतिशत से अधिक है। हालांकि, आधिकारिक नतीजों की घोषणा 29 अक्टूबर को होनी है।
अल्बर्टा में अलगाव की मांग
अल्बर्टा दुनिया के सबसे बड़े प्रमाणित तेल भंडार वाले क्षेत्रों में शामिल है। तेल भंडार के मामले में वेनेजुएला, सऊदी अरब और ईरान इससे आगे हैं। कनाडा के कुल कच्चे तेल उत्पादन में अल्बर्टा की हिस्सेदारी 80 प्रतिशत से अधिक है। इसके बावजूद यह देश का सबसे बड़ा या सर्वाधिक आबादी वाला प्रांत नहीं है।
प्रांत के कुछ लोगों का मानना है कि अल्बर्टा संघीय सरकार को जितना आर्थिक योगदान देता है, उसे बदले में उतना लाभ नहीं मिलता। केंद्र सरकार की पर्यावरण संबंधी नीतियों और तेल उत्खनन पर नियंत्रण लगाने के प्रयासों ने भी स्थानीय असंतोष को बढ़ाया।
कोविड-19 महामारी के दौरान और उसके बाद लागू प्रतिबंधों, अनिवार्य टीकाकरण तथा अन्य नियमों के प्रति नाराजगी ने भी अलगाववादी भावनाओं को हवा दी। इसके अलावा, अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले MAGA आंदोलन से प्रभावित कुछ रूढ़िवादी समूह अधिक स्वायत्तता और स्वतंत्रता की मांग करने लगे। उनका उद्देश्य तेल संसाधनों के इस्तेमाल और उनसे होने वाली आय पर प्रांत का नियंत्रण बढ़ाना है।
जनमत संग्रह का रुख
मार्च में मंजूर किए गए प्रस्तावों के तहत आव्रजन, कल्याणकारी नीतियों, संवैधानिक व्यवस्था और प्रांतों के बीच सहयोग से जुड़े नौ सवाल शामिल थे। मई में दसवां सवाल जोड़ा गया, जो कनाडा से अल्बर्टा के अलग होने की प्रक्रिया से संबंधित था।
मतदाताओं के सामने दो विकल्प थे। पहला, अल्बर्टा कनाडा का प्रांत बना रहे। दूसरा, प्रांतीय सरकार अलगाव पर फैसला करने के लिए बाध्यकारी जनमत संग्रह कराने की कानूनी प्रक्रिया शुरू करे।
इसका मतलब यह था कि नागरिकों को सीधे स्वतंत्रता पर अंतिम फैसला नहीं करना था, बल्कि यह तय करना था कि अलगाव पर दूसरे, बाध्यकारी जनमत संग्रह की प्रक्रिया शुरू की जाए या नहीं।
कार्नी और डेनियल स्मिथ वक्तव्य
प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने मतदान से पहले एकता के पक्ष में अपील की थी। नतीजों के बाद उन्होंने कहा कि अल्बर्टा के नागरिकों ने एकता को चुना है और अब साथ मिलकर काम करने का समय है।
अल्बर्टा की प्रीमियर डेनियल स्मिथ ने भी परिणाम को एकजुट कनाडा में मजबूत अल्बर्टा के समर्थन के रूप में देखा। उन्होंने अपनी यूनाइटेड कंजरवेटिव पार्टी (UCP) के भीतर बढ़ते दबाव के बीच जनमत संग्रह कराने का आह्वान किया था, लेकिन खुद एकता के पक्ष में मतदान करने की बात कही थी।
अलगाववादी आंदोलन पर प्रभाव
जनमत संग्रह के बावजूद अलगाववादी नेता पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। अल्बर्टा प्रॉस्पेरिटी प्रोजेक्ट के नेता जेफ रैथ ने कहा कि उनका आंदोलन जारी रहेगा। उनके अनुसार, लगभग 30 प्रतिशत मतों का समर्थन भी आंदोलन के लिए महत्वपूर्ण है।
पूर्व प्रीमियर जेसन केनेडी के मुताबिक, अलगाववादी दलों को पहले चुनावों और जनमत संग्रहों में पारंपरिक रूप से 2 प्रतिशत से भी कम वोट मिलते रहे हैं। ऐसे में करीब 30 प्रतिशत समर्थन आंदोलन की राजनीतिक पहुंच बढ़ने का संकेत हो सकता है।
कनाडा की अर्थव्यवस्था के लिए महत्त्व
अल्बर्टा के कनाडा से अलग होने की आशंका दूर होना कार्नी के लिए आर्थिक रूप से भी राहत की बात है। प्रांत देश के तेल उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देता है। कार्नी अल्बर्टा से तेल की आपूर्ति के लिए एक बड़ी पाइपलाइन परियोजना को आगे बढ़ाना चाहते हैं, जिससे अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
फिलहाल जनमत संग्रह ने अलगाववादी आंदोलन की राह मुश्किल कर दी है, लेकिन उसका भविष्य प्रांत में राजनीतिक समर्थन और संघीय सरकार के साथ आर्थिक एवं नीतिगत मतभेदों के समाधान पर निर्भर करेगा।