New
Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 14th Oct. 2026, 06:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 22nd Sept. 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 26th Sept. 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 19th Aug 2026, 11:00 AM Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 14th Oct. 2026, 06:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 22nd Sept. 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 26th Sept. 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 19th Aug 2026, 11:00 AM

सरकार-विरोधी प्रदर्शनों में बढ़ोत्तरी: सड़कों पर युवा पीढ़ी

संदर्भ 

  • फ्रांस में स्कूलों की बदहाल स्थिति, शिक्षकों की कमी और बजट कटौती के खिलाफ शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब व्यापक राजनीतिक और सामाजिक असंतोष का प्रतीक बनता दिखाई दे रहा है। देशभर में हजारों छात्रों के प्रदर्शन, स्कूलों की नाकाबंदी, आगजनी और पुलिस कार्रवाई ने सरकार के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। लेकिन फ्रांस की यह तस्वीर अकेली नहीं है। भारत सहित दुनिया के कई देशों में हाल के समय में युवाओं और आम नागरिकों के नेतृत्व में सरकार-विरोधी प्रदर्शनों में बढ़ोतरी देखी गई है।
  • इन आंदोलनों के मुद्दे अलग-अलग हैं, लेकिन इनके पीछे कुछ साझा कारण दिखाई देते हैं - महंगाई और आर्थिक दबाव, रोजगार की कमी, शिक्षा व्यवस्था से असंतोष, भ्रष्टाचार, सरकारी जवाबदेही, राजनीतिक निर्णयों में युवाओं की भागीदारी और संस्थाओं पर भरोसे का संकट।  

फ्रांस में स्कूलों से शुरू हुआ आंदोलन  

  • फ्रांस में सितंबर के मध्य में पेरिस के आसपास के कुछ उच्च माध्यमिक विद्यालयों से छात्रों का विरोध शुरू हुआ। देखते ही देखते यह आंदोलन देश के अनेक हिस्सों में फैल गया। छात्र स्कूलों के प्रवेश द्वार पर कूड़ेदान और फर्नीचर रखकर अवरोध कर रहे हैं और जर्जर स्कूल भवनों, शिक्षकों की कमी, भीड़भाड़ वाली कक्षाओं तथा लंबे स्कूल समय के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।
  • हाल के दिनों में आंदोलन के हिंसक होने के बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें भी हुईं। कई स्कूलों में आगजनी की घटनाएं सामने आईं और बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया। सैकड़ों स्कूलों के पूरी तरह या आंशिक रूप से प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।
  • छात्रों का विरोध ऐसे समय में और महत्वपूर्ण हो गया है जब सरकार 2027 के बजट में बड़े पैमाने पर खर्च कटौती की तैयारी कर रही है। इस कारण शिक्षा और सार्वजनिक सेवाओं पर खर्च को लेकर असंतोष व्यापक राजनीतिक बहस में बदल रहा है।

भारत में भी युवा असंतोष ने पकड़ा जोर 

  • भारत में भी युवाओं के नेतृत्व में विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन देखने को मिले हैं। शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा से जुड़े विवाद, रोजगार, सरकारी नीतियों और लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली को लेकर युवाओं और छात्रों ने कई मौकों पर विरोध प्रदर्शन किए हैं। 
  • शिक्षा से जुड़े आंदोलनों में छात्रों ने परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं पर जवाबदेही और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग उठाई है। कई शहरों में छात्र सड़कों पर उतरे और सरकार से शिक्षा तथा रोजगार से जुड़े मुद्दों पर ठोस कदम उठाने की मांग की। 
  • भारत में चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े विवादों को लेकर भी राजनीतिक विरोध प्रदर्शन देखने को मिले हैं। इन प्रदर्शनों में विपक्षी दलों के साथ बड़ी संख्या में युवा समर्थक भी शामिल हुए हैं। इससे संकेत मिलता है कि युवा असंतोष अब केवल शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और राजनीतिक व्यवस्था से जुड़े सवालों तक भी पहुंच रहा है।

विश्व में क्यों बढ़ रहे हैं सरकार-विरोधी प्रदर्शन? 

  • दुनिया के कई देशों में हाल के समय में सरकार-विरोधी प्रदर्शनों में तेजी देखने को मिली है। अलग-अलग देशों में विरोध के मुद्दे अलग हैं, लेकिन आर्थिक असुरक्षा, बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार, सरकारी नीतियों से असंतोष और राजनीतिक जवाबदेही की मांग इन आंदोलनों में प्रमुख रूप से दिखाई देती है।
  • नेपाल में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के खिलाफ युवाओं ने व्यापक प्रदर्शन किया। इंडोनेशिया में सांसदों के भत्तों में बढ़ोतरी को लेकर लोगों में नाराजगी देखने को मिली। वहीं कुछ यूरोपीय देशों में करों, सामाजिक सुरक्षा और सरकारी खर्च से जुड़े फैसलों के खिलाफ जनता सड़कों पर उतरी। 
  • इन आंदोलनों की खास बात यह है कि इनमें युवा वर्ग की भागीदारी काफी अधिक है। कई जगह आंदोलन पारंपरिक राजनीतिक दलों से अलग स्वतंत्र रूप से शुरू हुए और बाद में राजनीतिक दलों ने उनका समर्थन किया। 

सोशल मीडिया बना आंदोलन का नया हथियार 

  • आज के सरकार-विरोधी आंदोलनों की एक महत्वपूर्ण विशेषता सोशल मीडिया का व्यापक इस्तेमाल है। युवा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से कुछ ही घंटों में हजारों लोगों तक आंदोलन का संदेश पहुंचा सकते हैं।
  • हैशटैग, वीडियो, मीम और ऑनलाइन समूह आंदोलन के प्रचार और संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इससे पारंपरिक राजनीतिक नेतृत्व पर निर्भरता कम हुई है और युवा अपने मुद्दों को सीधे जनता तथा सरकार तक पहुंचाने में सक्षम हुए हैं।
  • हालांकि, सोशल मीडिया की यही ताकत गलत सूचनाओं और अफवाहों के तेजी से प्रसार की चुनौती भी पैदा करती है। इसलिए सरकारों के सामने आंदोलन से निपटने के साथ-साथ सही सूचना उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है।  

सरकारों के सामने दोहरी चुनौती 

  • इन आंदोलनों ने सरकारों के सामने दोहरी चुनौती खड़ी कर दी है। एक ओर उन्हें कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रदर्शन नियंत्रित करने पड़ते हैं, वहीं दूसरी ओर अत्यधिक पुलिस कार्रवाई से आंदोलन और व्यापक होने का जोखिम रहता है।
  • फ्रांस में पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारियों को लेकर विपक्ष ने सरकार की आलोचना की है। भारत सहित अन्य देशों में भी प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव कई बार राजनीतिक विवाद का विषय बनता रहा है।
  • हालांकि, केवल प्रदर्शन रोक देना इन आंदोलनों के मूल कारणों का समाधान नहीं है। यदि शिक्षा, रोजगार, आर्थिक अवसर, सार्वजनिक सेवाओं और राजनीतिक जवाबदेही से जुड़े सवालों का समाधान नहीं होता, तो असंतोष नए मुद्दों के साथ दोबारा सामने आ सकता है।  

बदल रही है विरोध की राजनीति 

  • फ्रांस और भारत की घटनाएं यह दिखाती हैं कि आज के सरकार-विरोधी आंदोलन केवल पारंपरिक राजनीतिक दलों के नेतृत्व तक सीमित नहीं हैं। युवा स्वयं आंदोलन शुरू कर रहे हैं और बाद में राजनीतिक दल उनका समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।
  • इन आंदोलनों को केवल विपक्ष बनाम सरकार के संघर्ष के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। इनके केंद्र में शिक्षा, रोजगार, आर्थिक सुरक्षा, संस्थागत पारदर्शिता और भविष्य को लेकर युवाओं की चिंताएं हैं।
  • फ्रांस में स्कूलों से शुरू हुआ आंदोलन हो या भारत में युवाओं का शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक व्यवस्था को लेकर विरोध- दोनों घटनाएं संकेत देती हैं कि सरकारों से जवाबदेही और बेहतर सार्वजनिक सेवाओं की मांग नई पीढ़ी के राजनीतिक व्यवहार का महत्वपूर्ण हिस्सा बनती जा रही है। 
  • आने वाले समय में इन आंदोलनों की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकारें केवल कानून-व्यवस्था के स्तर पर प्रतिक्रिया देती हैं या प्रदर्शनकारियों की मूल समस्याओं पर संवाद और नीतिगत समाधान का रास्ता अपनाती हैं। यही तय करेगा कि मौजूदा असंतोष अस्थायी विरोध तक सीमित रहता है या व्यापक राजनीतिक बदलाव की मांग में बदलता है।  
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR