संदर्भ
कोयला नियंत्रक संगठन (सीसीओ) को ‘सुविकल्प’ (SUVIKALP) खदान पुनर्प्रयोजन उपकरण के लिए 2026 का स्कॉच गोल्ड पुरस्कार प्रदान किया गया है। यह सम्मान बंद कोयला खदानों के टिकाऊ पुनः उपयोग और आँकड़ों पर आधारित निर्णय प्रक्रिया को बढ़ावा देने में संगठन के योगदान के लिए दिया गया है।
सुविकल्प पहल के बारे में
- सुविकल्प एक स्वदेशी और आँकड़ा-आधारित उपकरण है, जिसे बंद तथा परित्यक्त कोयला खदानों के लिए टिकाऊ वैकल्पिक उपयोगों की पहचान करने और उपयुक्त विकल्पों को प्राथमिकता देने के लिए विकसित किया गया है।
विकासकर्ता संगठन:
- भारत सरकार के कोयला मंत्रालय के अधीन कोयला नियंत्रक संगठन (सीसीओ) ने इस उपकरण को विकसित किया है।
मुख्य उद्देश्य:
- बंद कोयला खदानों को उपयोगी परिसंपत्तियों में बदलना। इसके लिए खदानों को वैज्ञानिक ढंग से बंद करने, पर्यावरण को बहाल करने, आजीविका के नए अवसर सृजित करने और क्षेत्रीय विकास को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जाता है।
प्रमुख विशेषताएँ:
- आँकड़ा-आधारित परियोजना मूल्यांकन: यह उपकरण तकनीकी, पर्यावरणीय, सामाजिक और आर्थिक पहलुओं के आधार पर खदानों के पुनर्प्रयोजन से जुड़ी परियोजनाओं का आकलन करता है और उन्हें प्राथमिकता के अनुसार क्रमबद्ध करता है। इससे निर्णय प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रमाण-आधारित बनती है।
- प्रिज्म के जरिए कार्यान्वयन में सहयोग: पोस्ट-माइनिंग रिपर्पजिंग इम्प्लीमेंटेशन स्ट्रैटेजी मॉडल (PRISM) के अंतर्गत परियोजना संबंधी अवधारणाएँ, उदाहरणात्मक अध्ययन, नमूना विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर), निविदा दस्तावेज और कार्यान्वयन एजेंसियों से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई जाती है।
- सुविकल्प संवाद वेबिनार श्रृंखला: इस पहल के तहत ज्ञान साझा करने और क्षमता निर्माण के उद्देश्य से 12 विषयगत वेबिनार आयोजित किए गए। इनमें कोयला कंपनियों, सरकारी अधिकारियों, तकनीकी विशेषज्ञों और शैक्षणिक संस्थानों ने भाग लिया।
- खदानों के रूपांतरण की समग्र रूपरेखा: इस पहल में रिक्लेम (RECLAIM) और एल.आई.वी.ई.एस. (L.I.V.E.S.) जैसी रूपरेखाओं के साथ सामुदायिक भागीदारी, पर्यटन विकास, वैकल्पिक आजीविका, वित्तपोषण के साधन और परित्यक्त खदानों के खाली गड्ढों के अभिनव उपयोग को शामिल किया गया है।
महत्व:
- पर्यावरण संरक्षण और भूमि का बेहतर उपयोग: यह पहल खदानों को वैज्ञानिक तरीके से बंद करने और खदानों की भूमि के उत्पादक उपयोग को बढ़ावा देती है। इससे पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम करने और खनन के बाद प्रभावित क्षेत्रों का टिकाऊ प्रबंधन करने में सहायता मिलती है।
- आजीविका और आर्थिक विकास के नए अवसर: कोयला-निर्भर क्षेत्रों में वैकल्पिक रोजगार, सामुदायिक विकास और आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करना इस पहल का प्रमुख लाभ है। इस प्रकार, सुविकल्प केवल नियामकीय आवश्यकताओं के पालन तक सीमित न रहकर सतत विकास को भी बढ़ावा देता है।
कोयला नियंत्रक संगठन (सीसीओ) के बारे में
- कोयला नियंत्रक संगठन (पहले कोयला आयुक्त) 1916 में स्थापित किया गया।
- यह भारतीय कोयला क्षेत्र के सबसे पुराने कार्यालयों में से एक है। कोयला नियंत्रक संगठन का नेतृत्व कोयला नियंत्रक करता है।
- इसकी स्थापना का मुख्य उद्देश्य प्रथम विश्व युद्ध के दौरान कोयले की आवश्यकता को पर्याप्त रूप से पूरा करने के लिए सरकारी नियंत्रण प्राप्त करना था।