चर्चा में क्यों?
अहमदाबाद स्थित स्पेसटेक स्टार्टअप सैटलीओ लैब्स (Satleo Labs) ने TAPAS-1 लॉन्च किया है। इसे कैलिफोर्निया से SpaceX के Falcon 9 रॉकेट के जरिए ट्रांसपोर्टर-18 राइडशेयर मिशन के तहत अंतरिक्ष में भेजा गया। तपस-1 को भारत का पहला व्यावसायिक निजी थर्मल-इमेजिंग पेलोड बताया गया है।
तपस-1 (TAPAS-1) के बारे में
- Thermal Access Platform for Analytics & Solutions (TAPAS-1) भारत का पहला स्वदेशी रूप से डिजाइन किया गया व्यावसायिक निजी थर्मल-इमेजिंग नैनोसैटेलाइट पेलोड है।
- इसे 1.5 किलोग्राम के मॉड्यूलर क्यूबसैट के रूप में विकसित किया गया है।
- यह पृथ्वी के लिए एक तरह के ऑर्बिटल थर्मामीटर की तरह काम करता है।
- यह पृथ्वी की सतह से निकलने वाले थर्मल इंफ्रारेड विकिरण में होने वाले बदलावों को रिकॉर्ड करता है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों के सतही तापमान का विश्लेषण किया जा सकता है।
विकासकर्ता:
- तपस-1 को अहमदाबाद स्थित स्पेसटेक स्टार्टअप सैटलीओ लैब्स ने विकसित किया है। कंपनी की स्थापना 2023 में उद्यमी श्रवण सिंह भाटी, सेवानिवृत्त इसरो वैज्ञानिक डॉ. रानेंदु घोष और बिजनेस स्ट्रैटेजिस्ट उर्मिल बखाई ने की थी।
लॉन्च व्हीकल:
- तपस-1 को स्पेसएक्स के Falcon 9 रॉकेट से लॉन्च किया गया। यह ट्रांसपोर्टर-18 के तहत संचालित एक समर्पित राइडशेयर मिशन का हिस्सा था, जिसमें करीब 130 उपग्रह शामिल थे।
कक्षा:
- तपस-1 को पृथ्वी से करीब 500 किलोमीटर ऊपर सूर्य-समकालिक निम्न पृथ्वी कक्षा (Sun-Synchronous Low Earth Orbit) में स्थापित किया गया है।
मिशन की अवधि:
- इसे शुरुआती तौर पर 3 वर्ष के परिचालन मिशन के लिए डिजाइन किया गया है। इसके बाद 2029 तक तपस-2 और प्रस्तावित PYRO कॉन्स्टेलेशन को विकसित करने की योजना है। वस्तुतः PYRO कॉन्स्टेलेशन में 10-15 माइक्रोसैटेलाइट शामिल होंगे।
मुख्य उद्देश्य:
- तपस-1 का उद्देश्य वाणिज्यिक, नागरिक और रक्षा क्षेत्र के उपयोगकर्ताओं को स्वदेशी, किफायती और उच्च-रिजॉल्यूशन थर्मल इंटेलिजेंस उपलब्ध कराना है।
- इसका लक्ष्य अर्थ ऑब्जर्वेशन आधारित विश्लेषण को अधिक सुलभ बनाना है, ताकि उपयोगकर्ताओं को इसके लिए अलग से महंगे ग्राउंड स्टेशन हार्डवेयर की आवश्यकता न पड़े।
प्रमुख उपयोग और विशेषताएं:
1. शहरी हीट आइलैंड की मैपिंग
- तपस-1 घनी आबादी वाले शहरों में अलग-अलग इलाकों के सतही तापमान में होने वाले सूक्ष्म अंतर को रिकॉर्ड कर सकता है। इससे नगर निकायों को हीट स्ट्रेस कम करने और जलवायु-अनुकूल शहरी नियोजन में मदद मिल सकती है।
2. सटीक कृषि और जल तनाव प्रबंधन
- यह मिट्टी की सतह पर नमी की कमी और फसलों में वाष्पोत्सर्जन (Evapotranspiration) को माप सकता है। इससे किसान और कृषि क्षेत्र से जुड़े व्यवसाय फसल में तनाव के शुरुआती संकेतों का पता लगा सकते हैं और पत्तियों को नुकसान दिखाई देने से पहले माइक्रो-इरिगेशन की योजना को बेहतर ढंग से निर्धारित कर सकते हैं।
3. जंगल की आग और थर्मल आपदाओं की निगरानी
- तपस-1 जमीन के भीतर सुलग रही आग का पता लगाने, धुएं के बीच सक्रिय जंगल की आग के फैलाव को ट्रैक करने और औद्योगिक क्षेत्रों में असामान्य गर्म स्थानों की पहचान करने में सक्षम होगा। इससे थर्मल आपदाओं की लगभग रियल-टाइम निगरानी में मदद मिल सकती है।
4. भूमिगत भूगर्भीय और पुरातात्विक खोज
- यह अलग-अलग पदार्थों की थर्मल इनर्शिया में होने वाले अंतर का उपयोग करके जमीन के नीचे छिपे पुरातात्विक अवशेषों, दबे हुए भूगर्भीय भ्रंशों और संभावित उथले खनिज या हाइड्रोकार्बन भंडारों का पता लगाने में मदद कर सकता है।
5. सीधे उपयोगकर्ताओं के लिए एआई आधारित विश्लेषण
- तपस-1 के थर्मल सेंसर से प्राप्त आंकड़ों को क्लाउड-आधारित मशीन लर्निंग के साथ जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य कच्चे थर्मल डेटा को अलग-अलग क्षेत्रों के लिए उपयोगी और पूर्वानुमान आधारित जानकारी में बदलना है।
इस तरह तपस-1 केवल पृथ्वी की सतह का तापमान रिकॉर्ड करने वाला उपग्रह नहीं है, बल्कि थर्मल डेटा को कृषि, शहरी नियोजन, आपदा प्रबंधन, भू-विज्ञान और रक्षा जैसे क्षेत्रों के लिए उपयोगी इंटेलिजेंस में बदलने की दिशा में एक प्रयास है।