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संक्रामक कैंसर

संदर्भ 

कैंसर को आमतौर पर गैर-संक्रामक बीमारी माना जाता है, लेकिन वैज्ञानिकों ने जानवरों में ऐसे कैंसर की पहचान की है, जिसकी कोशिकाएँ एक जीव से दूसरे जीव में फैल सकती हैं। अमेरिका और कनाडा की सीमा पर स्थित एक झील में कैटफिश पर किए गए अध्ययन ने इस असामान्य घटना को लेकर वैज्ञानिकों की रुचि बढ़ा दी है। यह खोज कैंसर की प्रकृति, प्रतिरक्षा प्रणाली और कोशिकाओं के बीच सहयोग को समझने के नए रास्ते खोल सकती है।    

क्या कैंसर भी संक्रामक हो सकता है? 

  • आमतौर पर कैंसर की उत्पत्ति शरीर की अपनी कोशिकाओं में होने वाले आनुवंशिक बदलावों से होती है। यही कारण है कि इसे एड्स, कोविड-19, तपेदिक और मलेरिया जैसी संक्रामक बीमारियों से अलग माना जाता है। हालाँकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में जानवरों में विकसित कैंसर कोशिकाएँ एक जीव से दूसरे जीव तक पहुँचकर वहाँ ट्यूमर बना सकती हैं। 
  • ऐसे कैंसर को संक्रामक कैंसर (Transmissible Cancer) कहा जाता है। इसमें संक्रमणकारी इकाई कोई सामान्य वायरस या जीवाणु नहीं, बल्कि स्वयं कैंसर कोशिकाएँ होती हैं।  
  • पहले कुत्तों, तस्मानियाई डेविल और कुछ समुद्री जीवों में ऐसे कैंसर के उदाहरण सामने आ चुके हैं। अब अमेरिका के वर्मोंट विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने ब्राउन बुलहेड कैटफिश (Ameiurus nebulosus) में इसका एक और उदाहरण दर्ज किया है। 

कैटफिश में मेलेनोमा की पहचान 

  • शोधकर्ताओं ने मेम्फ्रेमागॉग झील में रहने वाली कैटफिश में मेलेनोमा नामक कैंसर का अध्ययन किया। लगभग 51 किलोमीटर लंबी यह झील कनाडा के क्यूबेक और अमेरिका के वर्मोंट राज्य के बीच स्थित है।
  • मेलेनोमा त्वचा की मेलानोसाइट्स नामक कोशिकाओं से उत्पन्न होने वाला कैंसर है। ये कोशिकाएँ मेलेनिन नामक वर्णक बनाती हैं, जो त्वचा को रंग प्रदान करता है। वर्ष 2013 से झील के विभिन्न हिस्सों में एकत्र की गई कैटफिश में से लगभग 30 प्रतिशत मछलियाँ इस कैंसर से प्रभावित पाई गईं।
  • शोधकर्ताओं के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण सवाल यह था कि इतनी बड़ी संख्या में मछलियाँ इस बीमारी से कैसे प्रभावित हुईं। क्या इसके पीछे कोई वायरस या सूक्ष्मजीव था, अथवा कैंसर कोशिकाएँ स्वयं एक मछली से दूसरी मछली में पहुँच रही थीं?  

माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए से मिले महत्त्वपूर्ण संकेत

  • इस सवाल का जवाब खोजने के लिए वैज्ञानिकों ने कैंसर कोशिकाओं के जीनोम की तुलना प्रभावित मछलियों की सामान्य कोशिकाओं के आनुवंशिक पदार्थ से की। इस प्रक्रिया में उन्होंने माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए (mtDNA) का भी विश्लेषण किया। 
  • माइटोकॉन्ड्रिया कोशिकाओं के ऊर्जा उत्पादन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके पास अपना अलग डीएनए होता है, जो कोशिका के केंद्रक में मौजूद डीएनए से अलग है। 
  • शोधकर्ताओं ने पाया कि कैंसर कोशिकाओं के माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए में सामान्य कोशिकाओं की तुलना में लगभग दस गुना अधिक आनुवंशिक बदलाव मौजूद थे। यह अंतर सामान्य आनुवंशिक विविधता से समझाया नहीं जा सकता था। 
  • आगे के विश्लेषण से संकेत मिला कि कैंसर कोशिकाओं की उत्पत्ति किसी अन्य, दूर से संबंधित मछली में हुई थी। इसके बाद ये कोशिकाएँ नए मेजबान के शरीर में पहुँचीं और वहाँ ट्यूमर बनाने लगीं। अध्ययन से यह भी संकेत मिला कि कैंसर कोशिकाओं का मूल स्रोत मेम्फ्रेमागॉग झील के बाहर था।  

मछलियों में कैंसर कैसे फैल सकता है? 

  • शोधकर्ताओं के अनुसार, मछलियों के प्रजनन व्यवहार की इस प्रक्रिया में भूमिका हो सकती है। प्रजनन के दौरान मछलियाँ सीमित क्षेत्रों में एकत्र होती हैं। इस समय उनके बीच होने वाला शारीरिक संपर्क कैंसर कोशिकाओं के एक जीव से दूसरे जीव तक पहुँचने का अवसर पैदा कर सकता है।
  • एक अन्य संभावना यह है कि कैंसर कोशिकाएँ पानी के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से फैलती हों। वे मछलियों के गलफड़ों, त्वचा या मुँह के रास्ते शरीर में प्रवेश कर सकती हैं। 
  • वैज्ञानिकों ने ट्यूमर और सामान्य ऊतकों में वायरस तथा अन्य सूक्ष्मजीवों की भी जाँच की। उन्हें ऐसा कोई विशिष्ट रोगजनक नहीं मिला, जो केवल प्रभावित मछलियों में मौजूद हो। हालाँकि, शोधकर्ताओं ने यह संभावना पूरी तरह खारिज नहीं की कि किसी रोगजनक की भूमिका बीमारी की शुरुआती उत्पत्ति या उसके प्रसार में रही हो सकती है।  

संक्रामक कैंसर के अन्य उदाहरण 

जानवरों में संक्रामक कैंसर के पहले से ज्ञात उदाहरण इस घटना की गंभीरता और विविधता को दर्शाते हैं। 

  • कुत्तों में संक्रामक यौन ट्यूमर: यह कैंसर यौन संपर्क के माध्यम से फैल सकता है। वर्ष 2006 के एक अध्ययन में विभिन्न देशों के 40 प्रभावित कुत्तों की कैंसर कोशिकाओं के डीएनए में व्यापक समानता पाई गई। इससे संकेत मिला कि इसकी उत्पत्ति लगभग 11,000 वर्ष पहले एक ही कुत्ते में हुई थी।
  • तस्मानियाई डेविल में चेहरे का कैंसर: ऑस्ट्रेलिया के इस संकटग्रस्त मार्सुपियल जीव में मुँह और चेहरे पर विकसित होने वाला कैंसर भोजन करने में बाधा डालता है। इसके कारण जंगली आबादी में लगभग 90 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई और विलुप्ति का खतरा बढ़ गया।
  • समुद्री द्विकपाटी जीवों में कैंसर: क्लैम, मसल्स और कॉकल्स जैसे जीवों में भी संक्रामक कैंसर पाया गया है। माना जाता है कि इनकी कैंसर कोशिकाएँ समुद्री जल के माध्यम से एक जीव से दूसरे जीव तक पहुँच सकती हैं। 

प्रतिरक्षा प्रणाली और कैंसर का संबंध 

  • इस खोज का एक महत्त्वपूर्ण पहलू यह है कि संक्रमित कैटफिश की प्रतिरक्षा प्रणाली बाहरी कैंसर कोशिकाओं को प्रभावी ढंग से अस्वीकार नहीं कर रही थी। सामान्यतः प्रतिरक्षा प्रणाली शरीर की अपनी कोशिकाओं और बाहरी कोशिकाओं के बीच अंतर पहचानने का प्रयास करती है। 
  • इस घटना को समझने से वैज्ञानिकों को यह जानने में मदद मिल सकती है कि प्रतिरक्षा प्रणाली कुछ बाहरी कोशिकाओं को क्यों स्वीकार कर लेती है। यह ज्ञान भविष्य में अंग प्रत्यारोपण और प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया से जुड़े शोध के लिए उपयोगी हो सकता है। हालाँकि, इस अध्ययन से मनुष्यों में कैंसर के संक्रामक होने का कोई प्रमाण नहीं मिलता।  

निष्कर्ष 

  • कैटफिश में संक्रामक कैंसर का यह उदाहरण कैंसर को समझने की पारंपरिक अवधारणा को व्यापक बनाता है। सामान्य कैंसर में कुछ कोशिकाएँ शरीर की सहयोगात्मक व्यवस्था से अलग होकर अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं। संक्रामक कैंसर में यही कोशिकाएँ दूसरे जीवों के शरीर में पहुँचकर भी अपनी वृद्धि जारी रख सकती हैं। 
  • वैज्ञानिकों के अनुसार, कैंसर को केवल आनुवंशिक उत्परिवर्तनों के परिणाम के रूप में देखना पर्याप्त नहीं है। इसे बहुकोशिकीय जीव में कोशिकाओं के बीच सहयोग के विघटन के रूप में भी समझना आवश्यक है। यह खोज इसी विचार को मजबूती देती है और कैंसर के विकास तथा प्रसार से जुड़े नए प्रश्नों की पड़ताल का मार्ग प्रशस्त करती है। 
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