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द बिग पिक्चर: हिंद महासागर द्वीपीय कूटनीति

  • 16th June, 2020

(प्रारम्भिक परीक्षा : राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ; मुख्य परीक्षा : सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 :भारत एवं इसके पड़ोसी-सम्बंध , द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह)

वर्तमान में पूरे विश्व में चल रही महामारी के कारण, पर्यटन उद्योग में भारी मंदी देखी गई है जिसके कारण द्वीपीय देशों, मॉरीशस और सेशेल्स पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है क्योंकि इन देशों की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से पर्यटन पर निर्भर है। ये दोनों द्वीपीय राष्ट्र भारत की समुद्री सुरक्षा रणनीति का एक प्रमुख हिस्सा हैं और इसलिये इनसे जुड़ी किसी भी गतिविधि को कूटनीतिक रूप से आगे विस्तार देने की आवश्यकता है। हिंद महासागर में चीन की सक्रिय भागीदारी द्वीपीय देशों के साथ भारत के सम्बंधों के लिये एक सम्भावित खतरा हो सकती है और इससे भारत की समुद्री सुरक्षा भी कमज़ोर पड़ सकती है।

मित्र देशों को सहायता देने के भारत के प्रयास :

  • भारत ने 108 देशों कोलगभग 85 मिलियन हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन (HCQ) टैबलेट और 500 मिलियन के करीब पैरासिटामोल टैबलेट की आपूर्ति की है।
    • भारतीय वायु सेना के विशेष विमानों द्वारा मॉरीशस और सेशेल्स को सहयोग के रूप में HCQ टैबलेट की खेप भेजी गई थी।
  • भारत ने हिंद महासागर क्षेत्र में स्थित देशों जैसे मालदीव, मॉरीशस, मेडागास्कर, कोमोरोस और सेशेल्स आदि को चिकित्सा टीमों, दवा आदि की आपूर्ति के लिये नौसेना के 5600 टन के लैंडिंग जहाज़ आई.एन.एस. केसरी को तैनात किया था।
  • भारत द्वारा युद्धपोत पर दो चिकित्सकीय सहायता दल मॉरीशस और कोमोरोस में तैनात किये जाने की योजना भी है।

द्वीपीय देशों का सामरिक महत्त्व:

  • भारत द्वारा इन द्वीपीय राष्ट्रों के रणनीतिक महत्त्व को उनके स्थान के अनुसार संचार की मुख्य समुद्री रेखाओं (sea lines of communication -SLOCs) द्वारा रेखांकित किया गया है।
  • ये द्वीप कूटनीतिक और व्यापारिक रूप से अतिमहत्त्वपूर्ण हैं और प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मार्गों के साथ ही नौसेना की उपस्थिति के लिये रणनीतिक स्थान भी उपलब्ध कराते हैं,जिससे नौसेना को शांति के समय में गश्त और SLOCs कीसुरक्षित निगरानी तथा संघर्ष के समय में या प्रतिकूल परिस्थितियों में हस्तक्षेप करने का एक विकल्प भी मिलता है।

भारत- श्रीलंका सम्बंध :

  • हाल ही में, श्रीलंका ने भारतीय सहायता प्राप्त विकास परियोजना में तेज़ी लाने और भारत के निजी क्षेत्रों द्वारा निवेश को बढ़ावा देने की बात पर सहमति व्यक्त की है।
  • श्रीलंका के राष्ट्रपति ने भारतीय प्रधानमंत्री को कोलम्बो बंदरगाह के पूर्वी टर्मिनल के विकास पर जल्द से जल्द निवेश करने का आग्रह किया है।
  • भारत ने पिछले कुछ सप्ताह में सद्भावना के रूप में श्रीलंका में जीवन रक्षक दवाओं और चिकित्सा आपूर्ति से जुड़ी 25 टन से ज़्यादा की चार खेप भेजी हैं।
  • हाल ही में, श्रीलंका ने कोरोनोवायरस महामारी के कारण उपजी आर्थिक मंदी के मद्देनज़र देश के गिरते विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ावा देने के लिये भारत से1.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर की एक विशेष मुद्रा विनिमय सुविधा (currency swap facility) का आग्रह किया है।
  • मुद्रा विनिमय का यह आग्रह400 मिलियन अमेरिकी डॉलर की उस राशि से अलग है, जिसे श्रीलंका ने दक्षिण एशियाई सहयोग संगठन (सार्क) के तहत भारत सरकार से माँगा था।

मुद्रा विनिमय अनुबंध (Currency Swap Agreement)

  • दो देशों के बीच मुद्रा विनिमय पूर्व निर्धारित नियमों और शर्तों के हिसाब से मुद्राओं का आदान-प्रदान करने के लिये एक प्रकार का अनुबंध है।
  • केंद्रीय बैंक और सरकारें अपनेविदेशी समकक्षों के साथ मुद्रा विनिमय करती हैं, जब तक अल्पकालिक विदेशी मुद्रा तरलता से जुड़ी आवश्यकताएँ पूरी नहीं हो जातीं या जब तक कि भुगतान संतुलन (बी.ओ.पी.) संकट से बचने के लिये पर्याप्त विदेशी मुद्रा की व्यवस्था नहीं हो जाती।

भारत- मॉरीशस सम्बंध :

  • हाल ही में, दोनों देशों ने कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की है, जिसमें वित्तीय क्षेत्र को मज़बूत करने के उपाय भी शामिल हैं।
  • भारत ने आवश्यक दवा आपूर्ति की एकखेप को नौसेना के जहाज़ आई.एन.एस. केसरी के ज़रिये मॉरीशस के पोर्ट लुई भेजा था।
  • भारत मॉरीशस का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और वर्ष2007 से मॉरीशस में वस्तुओं और सेवाओं का सबसे बड़ा निर्यातक है।
  • भारत और मॉरीशस ने कई द्विपक्षीय समझौतों और MoU पर हस्ताक्षर किये हैं:
    • आतंकवाद के खिलाफ सहयोग (2005)
    • विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग (2012)
    • MSME सेक्टर में सहयोग(2013)
    • महासागरीय अर्थव्यवस्था में सहयोग (2015)
  • भारतीय प्रधानमंत्री ने वर्ष2015 में अपनी मॉरीशस यात्रा के दौरान सागर नीति की शुरुआत की थी ।

सागर नीति-क्षेत्र में सभी के लिये सुरक्षा और विकास (Security and Growth for All in the Region-SAGAR) :

  • 2015 में नीली अर्थव्यवस्था की तरफ ध्यानाकर्षण के लियेमॉरीशस की यात्रा पर भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा इस दृष्टिकोण को नीतिगत रूप में पेश किया गया था।
  • यह नीति समुद्री सुरक्षा और सहयोग के बढ़ते महत्त्व को दर्शाती है।
  • सागर नीति के माध्यम से, भारत अपने समुद्री पड़ोसियों के साथ आर्थिक और सुरक्षा सहयोग को और विस्तार देने और उनकी समुद्री सुरक्षा क्षमताओं के निर्माण में सहायता करना चाहता है।
  • इसके लिये, भारत सूचना के आदान-प्रदान, तटीय निगरानी, ​​बुनियादी ढाँचे के निर्माण और उनकी क्षमताओं को मज़बूत करने में सहयोग करेगा।
  • सागर नीति की प्रमुख प्रासंगिकता तब ज़्यादा स्पष्ट होती है जब इसे भारत की अन्य नीतियों,जैसे कि लुक ईस्ट पालिसी, सागरमाला प्रोजेक्ट, प्रोजेक्ट मौसम आदि के साथ संयोजित रूप से जोड़ कर देखा जाता है।

नीली अर्थव्यवस्था (Blue Economy)

विश्व बैंक के अनुसार "आर्थिक विकास, बेहतर आजीविका, रोज़गार आदि के लिये महासागरीय पारिस्थितिक तंत्र का संरक्षण करते हुए, महासागरीय संसाधनों का स्थायी और संधारणीय उपयोग नीली अर्थव्यवस्था के अंतर्गत आता है।"

हिंद महासागर में चीन का प्रभुत्त्व :

  • हिंद महासागर के उत्तरी भाग में चीन की तेज़ी से बढ़ती उपस्थिति के साथ-साथ क्षेत्र में चीनी पनडुब्बियों और जहाज़ों की तैनाती भारत के लिये एक चुनौती है।
  • चीन ने जहाज़ निर्माण के क्षेत्र में किसी भीअन्य राष्ट्र की तुलना में सबसे ज़्यादा निवेश किया है।
  • चीन का जापान के साथ पूर्वी चीन सागर में समुद्री विवाद है और वह दक्षिण चीन सागर के 90 फीसदी हिस्से पर दावा भी करता है।
  • इसके अलावा, चीन ने अपनी बेल्ट और सड़क पहल (belt and road initiative) के तहत श्रीलंका जैसे द्वीप देशों में बुनियादी ढाँचे से जुड़ी परियोजनाओं को विकसित करने पर ज़ोर दिया है।

चीन की बेल्ट और रोड पहल(China’s Belt and Road Initiative) :

  • चीन की बेल्ट और सड़क पहल (BRI), जिसे कभी-कभी न्यू सिल्क रोड के रूप में भी जाना जाता है, चीन की सबसे महत्त्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक है।
  • परियोजना में दो भाग शामिल हैं-

1. सिल्क रोड आर्थिक बेल्ट: यह भूमि आधारित है और इसमें चीन को मध्य एशिया, पूर्वी यूरोप और पश्चिमी यूरोप से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित है।

2. 21वीं शताब्दी की समुद्री सिल्क रोड: यह समुद्र-आधारित है और इसमें चीन के दक्षिणी तट को भूमध्यसागर, अफ्रीका, दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य एशिया से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित है।

आगे की राह :

  • भारत शीर्ष 10 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और उन शक्तिशाली अर्थव्यवस्थाओं के पीछे वैश्विक समुद्री व्यापार एक मुख्य आधार है।
    • भारत को अपने समुद्री पड़ोसियों के साथ सम्बंध प्रगाढ़ करने की आवश्यकता है।
  • द्वीपीय राष्ट्र कोविड-19 की वजह से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, और भारत को मित्र के रूप में उनका यथा सम्भव सहयोग करना चाहिये :
    • किसी भी आवश्यकता पर त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जाय।
    • भविष्य में उनका समर्थन करने के  साथ ही सुरक्षा और सहायता प्रदान करने का भी ध्यान देना होगा।
  • चीनी सक्रियता का प्रतिकार करने के लिये:
    • ताकत और शक्ति के मामले में चीन के साथ प्रतिस्पर्धा करने के बजाय, भारत को एक कूटनीतिक और सद्भावना युक्त दृष्टिकोण बनाए रखना चाहिये और केवल इसी तरह से हिंद महासागर पर नियंत्रण हासिल किया जा सकता है।
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