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Final Result - UPSC CSE Result, 2025 GS Foundation (P+M) - Delhi : 1st April 2026, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 3rd April 2026, 5:30PM Final Result - UPSC CSE Result, 2025 GS Foundation (P+M) - Delhi : 1st April 2026, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 3rd April 2026, 5:30PM

IMPORTANT TERMINOLOGY

पाठ्यक्रम में उल्लिखित विषयों की पारिभाषिक शब्दावलियों एवं देश-दुनिया में चर्चा में रही शब्दावलियों से परीक्षाओं में प्रश्न पूछे जाने का चलन तेजी से बढ़ा है। यह खंड वस्तुनिष्ठ और लिखित दोनों परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है। शब्दावलियों से परिचय अभ्यर्थियों को कम परिश्रम से अधिक अंक लाने में मदद करता है। इस खंड में प्रतिदिन एक महत्वपूर्ण शब्दावली से परिचय कराया जाता है।

प्रतिदिन की सबसे महत्वपूर्ण News पढ़ने के लिए यहाँ Click करें

1. जलवायु प्रत्यास्थता (Climate Resilience)

03-Apr-2026

जलवायु प्रत्यास्थता का अर्थ है जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाली आपदाओं (जैसे भारी बारिश या गर्मी) को झेलने और उनसे जल्दी उबरने की क्षमता। यह केवल नुकसान से बचना नहीं है, बल्कि बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को इस तरह ढालना है कि भविष्य के खतरों का प्रभाव कम हो सके।

2. एआई साइकोफैंसी   (AI Sycophancy)

02-Apr-2026

AI Sycophancy वह स्थिति है जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) उपयोगकर्ता की पसंद, राय या दृष्टिकोण के अनुकूल जवाब देती है, भले ही वह तथ्य या तर्क के अनुरूप न हों। इसका उद्देश्य उपयोगकर्ता को खुश करना या उनकी राय का समर्थन करना है। यह AI की निष्पक्षता और सही जानकारी प्रदान करने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।

3. AI संरेखण समस्या (AI Alignment Problem)

01-Apr-2026

AI संरेखण समस्या वह चुनौती है जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उद्देश्यों और व्यवहार को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि वे मानव मूल्यों, नैतिकता और इच्छित परिणामों के अनुरूप हों ताकि इसके हानिकारक परिणामों से बचा जा सके।

4. डबल इफेक्ट सिद्धांत (Theory of Double Effect)

31-Mar-2026

यह नैतिक दर्शन का एक सिद्धांत है, जिसके अनुसार यदि किसी कार्य के दो परिणाम होते हैं- एक अच्छा और एक बुरा। यदि कार्य का उद्देश्य अच्छा हो, बुरा परिणाम अनिवार्य लेकिन अनिच्छित हो और अच्छा परिणाम अधिक महत्वपूर्ण हो, तो ऐसा कार्य नैतिक रूप से स्वीकार्य माना जाता है।

5. मड-पडलिंग (Mud-puddling)

30-Mar-2026

मड-पडलिंग तितलियों और कुछ अन्य कीटों का एक व्यवहार है, जिसमें वे नम मिट्टी, कीचड़ या गड्ढों के पानी से खनिज लवण (जैसे सोडियम) और पोषक तत्व ग्रहण करते हैं। यह विशेष रूप से नर तितलियों में अधिक देखा जाता है और उनके प्रजनन व शारीरिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

6. पारिस्थितिक प्रवाह (Ecological flux)

28-Mar-2026

पारिस्थितिक प्रवाह का अर्थ है किसी पारिस्थितिकी तंत्र के जैविक और अजैविक घटकों के मध्य ऊर्जा, जल और पोषक तत्वों का निरंतर होने वाला विनिमय। इसमें सूर्य की ऊर्जा खाद्य श्रृंखला के माध्यम से प्रवाहित होती है, जबकि खनिज पदार्थ (जैसे कार्बन और नाइट्रोजन) चक्रों के रूप में पर्यावरण और जीवों के बीच घूमते रहते हैं। यह प्रवाह ही प्रकृति में संतुलन बनाए रखने और जीवन के अस्तित्व के लिए अनिवार्य है।

7. एज इफेक्ट (Edge Effect)

27-Mar-2026

पारिस्थितिकी में, जब दो अलग-अलग आवास या इकोसिस्टम (जैसे जंगल और घास के मैदान) आपस में मिलते हैं, तो उनके मिलन स्थल या सीमा क्षेत्र पर संसाधनों की प्रचुरता के कारण प्रजातियों की संख्या और विविधता सामान्य से अधिक हो जाती है। इसी जैविक घटना को 'एज इफेक्ट' कहते हैं।

8. महासागरीय अम्लीकरण (Ocean Acidification)

26-Mar-2026

महासागरीय अम्लीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें वायुमंडल की कार्बन डाइऑक्साइड समुद्र के पानी में घुलकर कार्बोनिक अम्ल बनाती है, जिससे समुद्री जल का pH घटता है। इसके कारण प्रवाल, शंख-घोंघे और अन्य कैल्शियम युक्त जीवों के खोल बनने में कठिनाई होती है और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होता है।

9. ट्राइबोलॉजी  (Tribology)

25-Mar-2026

ट्राइबोलॉजी वह विज्ञान है जिसमें दो सतहों के आपसी संपर्क के दौरान उत्पन्न होने वाले घर्षण, घिसाव और स्नेहन का अध्ययन किया जाता है। यह अध्ययन मशीनों की दक्षता बढ़ाने, ऊर्जा की बचत करने और उपकरणों की आयु लंबी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

10. एंथ्रोपोसीन (Anthropocene)

23-Mar-2026

एंथ्रोपोसीन एक प्रस्तावित भूवैज्ञानिक युग है, जो पृथ्वी के इतिहास में उस दौर को दर्शाता है जब मानवीय गतिविधियों (औद्योगिक विकास, प्रदूषण, वनों की कटाई) ने ग्रह के पर्यावरण, जलवायु और पारिस्थितिक तंत्र पर गहरा और स्थायी प्रभाव डाला है। इसे अनौपचारिक रूप से 20वीं सदी के मध्य (लगभग 1950) से शुरू माना जाता है, जब प्लास्टिक, परमाणु परीक्षण और कार्बन उत्सर्जन के साक्ष्य वैश्विक स्तर पर मिलने लगे।

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