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IMPORTANT TERMINOLOGY

पाठ्यक्रम में उल्लिखित विषयों की पारिभाषिक शब्दावलियों एवं देश-दुनिया में चर्चा में रही शब्दावलियों से परीक्षाओं में प्रश्न पूछे जाने का चलन तेजी से बढ़ा है। यह खंड वस्तुनिष्ठ और लिखित दोनों परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है। शब्दावलियों से परिचय अभ्यर्थियों को कम परिश्रम से अधिक अंक लाने में मदद करता है। इस खंड में प्रतिदिन एक महत्वपूर्ण शब्दावली से परिचय कराया जाता है।

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1. कम्माल (Kammalar)

29-Jul-2026

कम्माल दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु और केरल का एक पारंपरिक शिल्पकार समुदाय है। इसमें लोहार, बढ़ई, स्वर्णकार, ताम्रकार तथा पत्थर पर नक्काशी करने वाले कारीगर शामिल होते हैं। मध्यकालीन दक्षिण भारतीय समाज में यह समुदाय कृषि, मंदिर निर्माण, धातु शिल्प और हस्तकला के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था।

2. पायरोक्यूमुलोनिम्बस (Pyrocumulonimbus)

28-Jul-2026

पायरोक्यूमुलोनिम्बस एक विशेष प्रकार का विशाल तूफानी बादल है, जो बड़े जंगलों की आग, ज्वालामुखी विस्फोट या अत्यधिक गर्मी से उठने वाले धुएँ और गर्म हवा के कारण बनता है। यह बादल तेज वर्षा, बिजली, तेज हवाएँ तथा कभी-कभी नई आग फैलाने वाली बिजली भी उत्पन्न कर सकता है।

3. कानकुत (Kanakut)

27-Jul-2026

कानकुत भूमि की उपज का अनुमान लगाकर लगान या राजस्व निर्धारित करने की एक पारंपरिक पद्धति थी। इसमें खेत की फसल का निरीक्षण कर उसकी संभावित पैदावार का आकलन किया जाता था और उसी आधार पर कर तय किया जाता था। यह व्यवस्था विशेष रूप से मध्यकालीन भारत, विशेषकर मुगल शासन में प्रचलित थी।

4. गचकारी (Stucco Work)

25-Jul-2026

गचकारी एक सजावटी निर्माण कला है, जिसमें चूना, प्लास्टर, जिप्सम या मिट्टी के मिश्रण से दीवारों, छतों, गुंबदों और भवनों की सतह पर सुंदर आकृतियाँ, फूल-पत्तियाँ तथा अलंकरण बनाए जाते हैं। इसका उपयोग भवनों को आकर्षक बनाने के साथ-साथ सतह की सुरक्षा के लिए भी किया जाता है। भारत में मुगल एवं राजपूतकालीन स्थापत्य में गचकारी का व्यापक प्रयोग हुआ।

5. कुफ़ी (Kufic)

24-Jul-2026

कुफ़ी इस्लामी कला की सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध अरबी सुलेख (कैलिग्राफी) शैलियों में से एक है। इसका विकास इराक के कूफ़ा नगर में हुआ। इसकी अक्षर-रचना सीधी, कोणीय और ज्यामितीय होती है। इसका उपयोग प्रारंभिक क़ुरआन की प्रतियों, मस्जिदों, स्मारकों, सिक्कों तथा स्थापत्य सजावट में व्यापक रूप से किया गया। यह इस्लामी कला और वास्तुकला की महत्वपूर्ण पहचान मानी जाती है।

6. कलमकारी (Kalamkari)

23-Jul-2026

कलमकारी भारत की एक प्राचीन और प्रसिद्ध हस्तकला है, जिसमें सूती या रेशमी वस्त्रों पर प्राकृतिक रंगों और बाँस की कलम (ब्रश) का उपयोग करके हाथ से या ब्लॉक प्रिंटिंग द्वारा सुंदर चित्र उकेरे जाते हैं। ‘कलमकारी’ शब्द फ़ारसी भाषा के ‘कलम’ (पेन) और ‘कारी’ (कालीगरी) से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है 'कलम से किया गया कार्य'। यह कला मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश में प्रचलित है।

7. भूमिछिद्र न्याय

22-Jul-2026

भूमिछिद्र न्याय प्राचीन भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत था। इसके अनुसार जो व्यक्ति बंजर, अनुपजाऊ या बिना जोती गई भूमि को अपनी मेहनत से कृषि योग्य बना देता था, उस भूमि पर उसी का अधिकार माना जाता था। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य नई भूमि को खेती के लिए उपयोग में लाना, कृषि का विस्तार करना तथा उत्पादन और बसावट को बढ़ावा देना था।

8. चक्रवर्तिन (Chakravartin)

20-Jul-2026

चक्रवर्तिन वह आदर्श, सार्वभौम और धर्मनिष्ठ सम्राट होता है, जिसका शासन अनेक राज्यों पर स्थापित हो तथा जो न्याय, धर्म, शांति और लोककल्याण के सिद्धांतों के अनुसार राज्य का संचालन करे। भारतीय परंपरा में चक्रवर्तिन को ऐसा शासक माना गया है जिसके रथ का चक्र पूरे पृथ्वी क्षेत्र में निर्बाध रूप से घूम सके, जो उसकी सार्वभौमिक सत्ता का प्रतीक है।

9. प्रतीत्यसमुत्पाद  (Pratityasamutpada)

18-Jul-2026

प्रतीत्यसमुत्पाद बौद्ध दर्शन का मूल सिद्धांत है, जिसके अनुसार प्रत्येक वस्तु, घटना और अवस्था किसी न किसी कारण एवं परिस्थिति पर निर्भर होकर उत्पन्न होती है। कोई भी चीज़ स्वतंत्र या स्थायी नहीं होती। कारण समाप्त होने पर उसका परिणाम भी समाप्त हो जाता है। इसे ही कारण-कार्य संबंध का सिद्धांत कहा जाता है।

10. परिव्राजक (Parivrajaka)

17-Jul-2026

परिव्राजक वह व्यक्ति होता है जो ज्ञान, सत्य, आध्यात्मिक साधना या लोककल्याण के उद्देश्य से एक स्थान से दूसरे स्थान तक भ्रमण करता है। वह किसी एक स्थान पर स्थायी रूप से नहीं रहता, बल्कि लोगों को शिक्षा, नैतिक मूल्यों और धर्म का संदेश देता है। प्राचीन भारत में बौद्ध, जैन और वैदिक परंपराओं के अनेक परिव्राजक समाज में ज्ञान के प्रसार का महत्वपूर्ण माध्यम थे।

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