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IMPORTANT TERMINOLOGY

पाठ्यक्रम में उल्लिखित विषयों की पारिभाषिक शब्दावलियों एवं देश-दुनिया में चर्चा में रही शब्दावलियों से परीक्षाओं में प्रश्न पूछे जाने का चलन तेजी से बढ़ा है। यह खंड वस्तुनिष्ठ और लिखित दोनों परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है। शब्दावलियों से परिचय अभ्यर्थियों को कम परिश्रम से अधिक अंक लाने में मदद करता है। इस खंड में प्रतिदिन एक महत्वपूर्ण शब्दावली से परिचय कराया जाता है।

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1. परिव्राजक (Parivrajaka)

17-Jul-2026

परिव्राजक वह व्यक्ति होता है जो ज्ञान, सत्य, आध्यात्मिक साधना या लोककल्याण के उद्देश्य से एक स्थान से दूसरे स्थान तक भ्रमण करता है। वह किसी एक स्थान पर स्थायी रूप से नहीं रहता, बल्कि लोगों को शिक्षा, नैतिक मूल्यों और धर्म का संदेश देता है। प्राचीन भारत में बौद्ध, जैन और वैदिक परंपराओं के अनेक परिव्राजक समाज में ज्ञान के प्रसार का महत्वपूर्ण माध्यम थे।

2. कीटोसिस (Ketosis)

16-Jul-2026

कीटोसिस एक सामान्य चयापचय (Metabolic) अवस्था है, जिसमें भोजन से पर्याप्त कार्बोहाइड्रेट न मिलने पर शरीर ऊर्जा प्राप्त करने के लिए ग्लूकोज के बजाय वसा का उपयोग करने लगता है। इस प्रक्रिया में यकृत (लीवर) वसा को विघटित कर कीटोन बॉडीज़ (Ketone Bodies) का निर्माण करता है, जो मस्तिष्क तथा शरीर के अन्य अंगों के लिए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत का कार्य करती हैं।

3. बोधिसत्व (Bodhisattva)

15-Jul-2026

बोधिसत्व बौद्ध धर्म में वह साधक होता है जिसने ज्ञान (बोधि) प्राप्त करने का संकल्प लिया हो, लेकिन सभी प्राणियों के दुःखों का निवारण करने और उन्हें मुक्ति (निर्वाण) का मार्ग दिखाने के लिए अपने अंतिम निर्वाण को स्थगित कर दिया हो। बोधिसत्व करुणा, मैत्री, दया और परोपकार का आदर्श प्रतीक माना जाता है तथा महायान बौद्ध परंपरा में उसे समस्त जीवों के कल्याण के लिए निरंतर कार्य करने वाला महान आध्यात्मिक व्यक्तित्व माना गया है।

4. परिव्राजक (Parivrajaka)

14-Jul-2026

परिव्राजक वह व्यक्ति होता है जो सांसारिक मोह-माया और स्थायी निवास का त्याग कर ज्ञान, सत्य, आत्मचिंतन तथा आध्यात्मिक साधना की खोज में एक स्थान से दूसरे स्थान तक भ्रमण करता है। प्राचीन भारत में परिव्राजक विभिन्न आश्रमों, गुरुकुलों और विद्वानों से संवाद कर ज्ञान का प्रसार तथा समाज को नैतिक और आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करते थे।

5. बाउस्ट्रोफेडेन (Boustrophedon)

13-Jul-2026

बाउस्ट्रोफेडेन प्राचीन काल में लिखने की एक विशेष लिपि शैली है, जिसमें पंक्तियाँ बारी-बारी से विपरीत दिशाओं में लिखी जाती थीं। उदाहरण के लिए, यदि पहली पंक्ति बाईं से दाईं ओर लिखी जाती, तो दूसरी पंक्ति दाईं से बाईं ओर लिखी जाती थी। इसका शाब्दिक अर्थ है "बैल की तरह मुड़ना", जैसे खेत जोतते समय बैल घूमता है।

6. मेमरिस्टर (Memristor)

10-Jul-2026

मेमरिस्टर एक उन्नत इलेक्ट्रॉनिक घटक है, जो विद्युत धारा के प्रवाह का इतिहास याद रखता है। बिजली बंद होने पर भी यह अपनी प्रतिरोध की स्थिति सुरक्षित रखता है। इसी कारण इसे नॉन-वोलेटाइल मेमोरी माना जाता है। इसका उपयोग कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), न्यूरोमॉर्फिक कंप्यूटिंग, तेज़ मेमोरी चिप्स और ऊर्जा-कुशल इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के विकास में किया जा रहा है।

7. न्यूरल रेडिएंस फील्ड (NeRF)

09-Jul-2026

न्यूरल रेडिएंस फील्ड (NeRF) कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर आधारित एक उन्नत तकनीक है, जो किसी वस्तु या दृश्य की विभिन्न कोणों से ली गई 2D तस्वीरों का उपयोग करके उसका यथार्थवादी 3D मॉडल तैयार करती है। इसका उपयोग वर्चुअल रियलिटी (VR), ऑगमेंटेड रियलिटी (AR), रोबोटिक्स, गेमिंग, फिल्म निर्माण और डिजिटल ट्विन जैसी आधुनिक तकनीकों में किया जाता है।

8. प्लास्टिस्फीयर (Plastisphere)

08-Jul-2026

प्लास्टिस्फीयर वह सूक्ष्म जैविक समुदाय है जो समुद्र, नदियों या अन्य जल स्रोतों में तैरते प्लास्टिक कचरे की सतह पर विकसित होता है। इसमें बैक्टीरिया, शैवाल, कवक और अन्य सूक्ष्मजीव रहते हैं। यह समुदाय प्रदूषण, जैव विविधता, रोगजनकों के प्रसार तथा प्लास्टिक के अपघटन से जुड़े पर्यावरणीय अध्ययनों में महत्वपूर्ण माना जाता है।

9. प्रजातीकरण (Speciation)

07-Jul-2026

प्रजातीकरण वह जैविक प्रक्रिया है, जिसमें समय के साथ किसी एक पूर्वज प्रजाति से नई प्रजातियों का निर्माण होता है। यह प्रक्रिया आनुवंशिक परिवर्तन, प्राकृतिक चयन, उत्परिवर्तन तथा भौगोलिक या प्रजनन पृथक्करण के कारण होती है। प्रजातीकरण जैव विविधता के विकास और नई प्रजातियों की उत्पत्ति का प्रमुख आधार है।

10. प्रोटीओजीनोमिक्स (Proteogenomics)

06-Jul-2026

प्रोटीओजीनोमिक्स जीवविज्ञान की एक उन्नत विधा है, जिसमें जीनोमिक्स (डीएनए/जीन) और प्रोटीओमिक्स (प्रोटीन) के आँकड़ों का संयुक्त अध्ययन किया जाता है। इसका उद्देश्य यह समझना है कि जीन किस प्रकार प्रोटीन बनाते हैं और उनका शरीर में क्या कार्य है। यह तकनीक रोगों की पहचान, कैंसर अनुसंधान, नई दवाओं के विकास तथा व्यक्तिगत चिकित्सा में अत्यंत उपयोगी है।

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