पाठ्यक्रम में उल्लिखित विषयों की पारिभाषिक शब्दावलियों एवं देश-दुनिया में चर्चा में रही शब्दावलियों से परीक्षाओं में प्रश्न पूछे जाने का चलन तेजी से बढ़ा है। यह खंड वस्तुनिष्ठ और लिखित दोनों परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है। शब्दावलियों से परिचय अभ्यर्थियों को कम परिश्रम से अधिक अंक लाने में मदद करता है। इस खंड में प्रतिदिन एक महत्वपूर्ण शब्दावली से परिचय कराया जाता है।
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25-Jul-2026
गचकारी एक सजावटी निर्माण कला है, जिसमें चूना, प्लास्टर, जिप्सम या मिट्टी के मिश्रण से दीवारों, छतों, गुंबदों और भवनों की सतह पर सुंदर आकृतियाँ, फूल-पत्तियाँ तथा अलंकरण बनाए जाते हैं। इसका उपयोग भवनों को आकर्षक बनाने के साथ-साथ सतह की सुरक्षा के लिए भी किया जाता है। भारत में मुगल एवं राजपूतकालीन स्थापत्य में गचकारी का व्यापक प्रयोग हुआ।
24-Jul-2026
कुफ़ी इस्लामी कला की सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध अरबी सुलेख (कैलिग्राफी) शैलियों में से एक है। इसका विकास इराक के कूफ़ा नगर में हुआ। इसकी अक्षर-रचना सीधी, कोणीय और ज्यामितीय होती है। इसका उपयोग प्रारंभिक क़ुरआन की प्रतियों, मस्जिदों, स्मारकों, सिक्कों तथा स्थापत्य सजावट में व्यापक रूप से किया गया। यह इस्लामी कला और वास्तुकला की महत्वपूर्ण पहचान मानी जाती है।
23-Jul-2026
कलमकारी भारत की एक प्राचीन और प्रसिद्ध हस्तकला है, जिसमें सूती या रेशमी वस्त्रों पर प्राकृतिक रंगों और बाँस की कलम (ब्रश) का उपयोग करके हाथ से या ब्लॉक प्रिंटिंग द्वारा सुंदर चित्र उकेरे जाते हैं। ‘कलमकारी’ शब्द फ़ारसी भाषा के ‘कलम’ (पेन) और ‘कारी’ (कालीगरी) से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है 'कलम से किया गया कार्य'। यह कला मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश में प्रचलित है।
22-Jul-2026
भूमिछिद्र न्याय प्राचीन भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत था। इसके अनुसार जो व्यक्ति बंजर, अनुपजाऊ या बिना जोती गई भूमि को अपनी मेहनत से कृषि योग्य बना देता था, उस भूमि पर उसी का अधिकार माना जाता था। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य नई भूमि को खेती के लिए उपयोग में लाना, कृषि का विस्तार करना तथा उत्पादन और बसावट को बढ़ावा देना था।
20-Jul-2026
चक्रवर्तिन वह आदर्श, सार्वभौम और धर्मनिष्ठ सम्राट होता है, जिसका शासन अनेक राज्यों पर स्थापित हो तथा जो न्याय, धर्म, शांति और लोककल्याण के सिद्धांतों के अनुसार राज्य का संचालन करे। भारतीय परंपरा में चक्रवर्तिन को ऐसा शासक माना गया है जिसके रथ का चक्र पूरे पृथ्वी क्षेत्र में निर्बाध रूप से घूम सके, जो उसकी सार्वभौमिक सत्ता का प्रतीक है।
18-Jul-2026
प्रतीत्यसमुत्पाद बौद्ध दर्शन का मूल सिद्धांत है, जिसके अनुसार प्रत्येक वस्तु, घटना और अवस्था किसी न किसी कारण एवं परिस्थिति पर निर्भर होकर उत्पन्न होती है। कोई भी चीज़ स्वतंत्र या स्थायी नहीं होती। कारण समाप्त होने पर उसका परिणाम भी समाप्त हो जाता है। इसे ही कारण-कार्य संबंध का सिद्धांत कहा जाता है।
17-Jul-2026
परिव्राजक वह व्यक्ति होता है जो ज्ञान, सत्य, आध्यात्मिक साधना या लोककल्याण के उद्देश्य से एक स्थान से दूसरे स्थान तक भ्रमण करता है। वह किसी एक स्थान पर स्थायी रूप से नहीं रहता, बल्कि लोगों को शिक्षा, नैतिक मूल्यों और धर्म का संदेश देता है। प्राचीन भारत में बौद्ध, जैन और वैदिक परंपराओं के अनेक परिव्राजक समाज में ज्ञान के प्रसार का महत्वपूर्ण माध्यम थे।
16-Jul-2026
कीटोसिस एक सामान्य चयापचय (Metabolic) अवस्था है, जिसमें भोजन से पर्याप्त कार्बोहाइड्रेट न मिलने पर शरीर ऊर्जा प्राप्त करने के लिए ग्लूकोज के बजाय वसा का उपयोग करने लगता है। इस प्रक्रिया में यकृत (लीवर) वसा को विघटित कर कीटोन बॉडीज़ (Ketone Bodies) का निर्माण करता है, जो मस्तिष्क तथा शरीर के अन्य अंगों के लिए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत का कार्य करती हैं।
15-Jul-2026
बोधिसत्व बौद्ध धर्म में वह साधक होता है जिसने ज्ञान (बोधि) प्राप्त करने का संकल्प लिया हो, लेकिन सभी प्राणियों के दुःखों का निवारण करने और उन्हें मुक्ति (निर्वाण) का मार्ग दिखाने के लिए अपने अंतिम निर्वाण को स्थगित कर दिया हो। बोधिसत्व करुणा, मैत्री, दया और परोपकार का आदर्श प्रतीक माना जाता है तथा महायान बौद्ध परंपरा में उसे समस्त जीवों के कल्याण के लिए निरंतर कार्य करने वाला महान आध्यात्मिक व्यक्तित्व माना गया है।
14-Jul-2026
परिव्राजक वह व्यक्ति होता है जो सांसारिक मोह-माया और स्थायी निवास का त्याग कर ज्ञान, सत्य, आत्मचिंतन तथा आध्यात्मिक साधना की खोज में एक स्थान से दूसरे स्थान तक भ्रमण करता है। प्राचीन भारत में परिव्राजक विभिन्न आश्रमों, गुरुकुलों और विद्वानों से संवाद कर ज्ञान का प्रसार तथा समाज को नैतिक और आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करते थे।
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