सेना की फ्लेर-डी-लीस बिग्रेड ने फर्स्ट-पर्सन व्यू (एफपीवी) ड्रोन का सफल परीक्षण किया।
ये कामिकाजे भूमिका वाले एंटी-टैंक हथियार से लैस हैं।
कामिकाजे ड्रोन: एक ऐतिहासिक संदर्भ
'कामिकाजे' एक जापानी शब्द है, जो द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान एक विशेष हमलावर इकाई से जुड़ा था।
उस समय पायलट लड़ाकू विमानों को क्रैश कर आत्मघाती हमले को अंजाम देते थे।
भारतीय सेना का यह नया एफपीवी ड्रोन आधुनिक तकनीक के साथ उसी आत्मघाती रणनीति को अपनाते हुए दुश्मनों पर सटीक वार करने में सक्षम होगा।
प्रमुख बिंदु:
एफपीवी ड्रोन का परीक्षण पंजाब के पठानकोट में किया गया, जहां इसने अपनी कार्यक्षमता को साबित किया।
इस ड्रोन को डीआरडीओ (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) की चंडीगढ़ स्थित टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी (टीबीआरएल) के सहयोग से विकसित किया गया है।
राइजिंग स्टार ड्रोन बैटल स्कूल में इस ड्रोन को पूरी तरह से असेंबल किया गया।
इस स्कूल ने मार्च 2025 तक 100 से अधिक ड्रोन का निर्माण किया है।
फर्स्ट-पर्सन व्यू (एफपीवी) ड्रोन की विशेषताएँ:
एफपीवी ड्रोन को कई युद्ध अभियानों के लिए बेहद सटीक बनाया गया है।
ऑपरेटर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इसमें दोहरा सुरक्षा तंत्र जोड़ा गया है, जो परिवहन, संचालन और उड़ान के दौरान किसी भी दुर्घटनावश विस्फोट को रोकता है।
प्रश्न. फर्स्ट-पर्सन व्यू (एफपीवी ड्रोन) किस भूमिका में कार्य करता है?