संदर्भ
हाल ही में 2026 का फिजियोलॉजी या मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार कार्ल डीसेरोथ, पीटर हेगेमैन और जॉर्ज नागल को लाइट-गेटेड आयन चैनलों और ऑप्टोजेनेटिक्स से जुड़ी उनकी खोजों के लिए प्रदान किया गया। इन खोजों ने प्रकाश की मदद से न्यूरॉन्स को बेहद सटीक तरीके से नियंत्रित करना संभव बनाया है।
फिजियोलॉजी या मेडिसिन नोबेल पुरस्कार 2026 के बारे में
- यह जैव-चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र का दुनिया का प्रमुख वैज्ञानिक सम्मान है। इसे प्रत्येक वर्ष स्वीडन के कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट की नोबेल असेंबली द्वारा उन मौलिक खोजों के लिए दिया जाता है।
लाइट-गेटेड आयन चैनल क्या है?
- लाइट-गेटेड आयन चैनल कोशिका की झिल्ली पर मौजूद बेहद छोटे प्रोटीन द्वार होते हैं। जब इन पर प्रकाश पड़ता है तो ये खुल या बंद हो सकते हैं। चैनल खुलने पर विद्युत आवेश वाले कण यानी आयन (Ions) कोशिका के भीतर या बाहर जा सकते हैं। इस प्रक्रिया से कोशिका की विद्युत गतिविधि को सक्रिय या निष्क्रिय किया जा सकता है।
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नोबेल पुरस्कार से संबंधित मुख्य बिंदु
- संस्थापक: अल्फ्रेड नोबेल (जिन्होंने डायनामाइट का आविष्कार किया था)
- प्रथम वितरण: 10 दिसंबर 1901
- कुल श्रेणियां: 6 (भौतिकी, रसायन, चिकित्सा, साहित्य, शांति और अर्थशास्त्र)
- घोषणा: प्रतिवर्ष अक्टूबर माह में
- वितरण तिथि: हर साल 10 दिसंबर (अल्फ्रेड नोबेल की पुण्यतिथि पर)
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ऑप्टोजेनेटिक्स क्या है?
- ऑप्टोजेनेटिक्स ऐसी तकनीक है, जिसमें प्रकाश और आनुवंशिक इंजीनियरिंग को मिलाकर विशिष्ट कोशिकाओं, खासकर न्यूरॉन्स, को नियंत्रित किया जाता है।
- वैज्ञानिक चुने हुए न्यूरॉन्स को प्रकाश-संवेदनशील बनाते हैं और फिर प्रकाश की मदद से उन्हें बेहद सटीक तरीके से सक्रिय या निष्क्रिय करते हैं।
प्रमुख वैज्ञानिक योगदान:
- प्रकाश-नियंत्रित चैनलरोडोप्सिन की खोज: पीटर हेगेमैन और जॉर्ज नागल ने हरे शैवाल में चैनलरोडोप्सिन की खोज की। ये ऐसे प्रोटीन हैं, जो नीली रोशनी पड़ने पर आयन चैनलों को खोलते हैं और विद्युत संकेत उत्पन्न करते हैं।
- कोशिकाओं को प्रकाश-संवेदनशील बनाना: दोनों वैज्ञानिकों ने दिखाया कि चैनलरोडोप्सिन जीन को अन्य कोशिकाओं में डालकर उन्हें सीधे प्रकाश के प्रति प्रतिक्रिया करने योग्य बनाया जा सकता है।
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नोबेल पुरस्कार विजेता:
- कार्ल डीसेरोथ: स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में H. Chen प्रोफेसर ऑफ बायोइंजीनियरिंग एंड साइकियाट्री और अमेरिका के हॉवर्ड ह्यूजेस मेडिकल इंस्टीट्यूट (HHMI) में शोधकर्ता।
- पीटर हेगेमैन: जर्मनी के बर्लिन स्थित हम्बोल्ट विश्वविद्यालय में न्यूरोसाइंस के Hertie Senior Professor।
- जॉर्ज नागल: जर्मनी के वुर्ज़बर्ग विश्वविद्यालय में आणविक पादप शरीर क्रिया विज्ञान और जैवभौतिकी के प्रोफेसर।
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वास्तविक उपयोग और चिकित्सकीय संभावनाएं:
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मस्तिष्क परिपथों का मानचित्रण: ऑप्टोजेनेटिक्स वैज्ञानिकों को उन विशिष्ट न्यूरल सर्किटों की पहचान करने में मदद करती है, जो दर्द, भूख, प्यास, पुरस्कार की अनुभूति, नींद और सामाजिक व्यवहार जैसी प्रक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं।
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दृष्टि बहाली: ऑप्टोजेनेटिक उपचारों की मदद से रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा से प्रभावित लोगों में आंशिक दृष्टि बहाल करने की संभावना पर शोध किया जा रहा है। इसमें बची हुई रेटिना कोशिकाओं को प्रकाश के प्रति संवेदनशील बनाने का प्रयास किया जाता है।
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तंत्रिका संबंधी उपचार: यह तकनीक पार्किंसंस रोग, अवसाद, मिर्गी और स्किज़ोफ्रेनिया में असामान्य तंत्रिका गतिविधियों को समझने में मदद करती है, जिससे भविष्य में अधिक सटीक उपचार विकसित किए जा सकते हैं।
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विभिन्न अंगों के बीच संकेतों का अध्ययन: ऑप्टोजेनेटिक्स की मदद से यह समझने में भी सहायता मिल रही है कि मस्तिष्क, हृदय और आंत एक-दूसरे के साथ कैसे संवाद करते हैं। इसमें हृदय की गतिविधियों और चिंता के बीच संबंध तथा आंत के न्यूरॉन्स और भोजन संबंधी पसंद जैसे विषय शामिल हैं।
खोज का महत्त्व:
- प्रकाश-नियंत्रित (लाइट-गेटेड) आयन चैनलों और ऑप्टोजेनेटिक्स ने वैज्ञानिकों को न्यूरॉन्स की गतिविधि को पहले की तुलना में कहीं अधिक सटीक तरीके से नियंत्रित करने का साधन दिया है। इससे मस्तिष्क के कामकाज को समझने के साथ-साथ कई तंत्रिका संबंधी बीमारियों के संभावित उपचारों पर शोध के नए रास्ते खुले हैं।