प्रलय मिसाइल

चर्चा में क्यों? 

हाल ही में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने ओडिशा के तट पर स्थित चांदीपुर के एकीकृत परीक्षण रेंज (Integrated Test Range) से स्वदेशी रूप से विकसित प्रलय (Pralay) क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया। 

प्रलय मिसाइल के बारे में 

  • प्रलय एक स्वदेशी, कम दूरी की सतह से सतह पर मार करने वाली क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल है।
  • इसका निर्माण हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) द्वारा डीआरडीओ की विभिन्न प्रयोगशालाओं और भारतीय औद्योगिक भागीदारों के सहयोग से किया गया है।  
  • इसके उत्पादन और सिस्टम इंटीग्रेशन में भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) तथा भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) की महत्वपूर्ण भूमिका है। 
  • इस मिसाइल को दुश्मन के कमांड सेंटर, वायु रक्षा प्रतिष्ठानों, रसद केंद्रों (Logistics Hubs) और एयरबेस जैसे रणनीतिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। 

प्रमुख विशेषताएँ: 

  • प्रणोदन प्रणाली (Propulsion System): प्रलय मिसाइल में ठोस प्रणोदक (Solid Propellant) आधारित रॉकेट मोटर का इस्तेमाल किया गया है। इससे इसे लंबे समय तक लॉन्च के लिए तैयार रखा जा सकता है।
  • मोबाइल लॉन्चिंग क्षमता: यह मोबाइल लॉन्चिंग प्लेटफॉर्म से प्रक्षेपित की जा सकती है, जिससे इसकी तैनाती और संचालन में अधिक लचीलापन मिलता है।
  • विभिन्न प्रकार के वारहेड: यह अलग-अलग प्रकार के लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न प्रकार के वारहेड ले जाने में सक्षम है। 
  • पेलोड क्षमता (Payload Capacity): इसकी पेलोड वहन करने की क्षमता 500 से 1,000 किलोग्राम के बीच है।
  • मारक दूरी (Operational Range): यह अधिकतम 500 किलोमीटर तक की दूरी पर स्थित लक्ष्यों को भेद सकती है।
  • अधिकतम गति (Speed): मिसाइल अपने अंतिम उड़ान चरण में मैक 6.1 तक की गति हासिल कर सकती है।
  • सटीक निशाना लगाने की क्षमता (Accuracy): इसमें अत्याधुनिक मार्गदर्शन प्रणाली का उपयोग किया गया है, जिसकी सर्कुलर एरर प्रोबेबल (CEP) क्षमता 10 मीटर से कम बताई गई है।

क्वासी-बैलिस्टिक तकनीक (Quasi-Ballistic Technology): 

  • सामान्य बैलिस्टिक मिसाइलें एक निश्चित एवं अपेक्षाकृत पूर्वानुमानित प्रक्षेप पथ (Trajectory) का अनुसरण करती हैं, जबकि क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइलें अपेक्षाकृत कम ऊँचाई पर उड़ान भरने में सक्षम होती हैं। 
  • ये उड़ान के दौरान अपनी दिशा और प्रक्षेप पथ में बदलाव कर सकती हैं। 
  • उड़ान के मध्य चरण (Mid-course) तथा अंतिम चरण (Terminal Phase) में दिशा बदलने की क्षमता के कारण इन्हें दुश्मन के रडार द्वारा ट्रैक करना और मिसाइल रक्षा प्रणालियों के माध्यम से रोकना कठिन हो जाता है। 

रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) के बारे में  

  • रिसर्च सेंटर इमारत (RCI), डीआरडीओ के डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम मिसाइल कॉम्प्लेक्स की एक प्रमुख अनुसंधान प्रयोगशाला है। 
  • इसका मुख्यालय हैदराबाद में स्थित है।
  • यह रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में विभिन्न अनुप्रयोगों के लिए एवियोनिक्स प्रणालियों (Avionics Systems) के अनुसंधान एवं विकास (R&D) का कार्य करती है। 
  • आरसीआई को निम्नलिखित प्रमुख तकनीकी क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास की जिम्मेदारी सौंपी गई है: 
    • कंट्रोल इंजीनियरिंग (Control Engineering)
    • इनर्शियल नेविगेशन (Inertial Navigation)
    • इमेजिंग इन्फ्रारेड सीकर्स (Imaging Infrared Seekers)
    • आरएफ सीकर्स एवं सिस्टम (RF Seekers & Systems)
    • ऑनबोर्ड कंप्यूटर (Onboard Computers) 
    • मिशन सॉफ्टवेयर (Mission Software)   
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