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सैटेलाइट इन्टरनेट सेवा 

( प्रारंभिक परीक्षा के लिये - सैटेलाइट इन्टरनेट सेवा, लो-अर्थ ऑर्बिट, जियो स्टेशनरी ऑर्बिट )
( मुख्य परीक्षा के लिये:सामान्य अध्ययन प्रश्नप्रत्र 3 - सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष )

सन्दर्भ 

  • हाल ही में भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने ह्यूजेस कम्युनिकेशंस इंडिया के साथ मिलकर देश में सैटेलाइट इन्टरनेट सेवा प्रदान करने की दिशा में आगे बढ़ने की घोषणा की।

सैटेलाइट इंटरनेट सेवा

  • सैटेलाइट इंटरनेट एक वायरलेस इंटरनेट सेवा है, जिसमें इन्टरनेट सेवा प्रदान करने के लिये अन्तरिक्ष स्थित उपग्रहों का प्रयोग किया जाता है। 
  • सैटेलाइट इंटरनेट सेवा में पृथ्वी की परिक्रमा करने वाले कृत्रिम सैटेलाइट के साथ संचार करने के लिए रेडियो तरंगों का प्रयोग किया जाता है। तथा डेटा को भेजने और फिर से प्राप्त करने के लिए एक विशेष संचार नेटवर्क का उपयोग किया जाता है।
  • यह सैटेलाइट टीवी की तरह कार्य करता है। उपयोगकर्ता को अपने घर में सैटेलाइट डिश स्थापित करने की आवश्यकता होगी।
  • इसमें दो तरफ़ा संचार वाले उपग्रहों का उपयोग करके इन्टरनेट सेवा प्रदाता और सैटेलाइट डिश वाले उपयोगकर्ताओं के मध्य संचार स्थापित किया जाता है। 
  • सैटेलाइट इंटरनेट भूमि आधारित इंटरनेट सेवाओं से बहुत अलग होगा, जो तारों के माध्यम से डेटा संचारित करती है। सैटेलाइट इंटरनेट सेवा में डेटा संचरण के लिये  किसी तार की आवश्यकता नहीं होगी।
  • सैटेलाइट इंटरनेट सेवा जियो स्टेशनरी ऑर्बिट (GEO) या लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) में उपस्थित सैटेलाइट का प्रयोग करती है।

लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO)

  • यह पृथ्वी की सतह के ऊपर 200 किमी. से लेकर 2,000 किमी. तक है।
  • पृथ्वी से इसकी दूरी कम होने के कारण डाटा को कम दूरी की यात्रा तय  करनी पड़ती है, जिसके कारण लेटेंसी दर कम होती है। 
  • लेकिन कम ऊंचाई के कारण पूरी पृथ्वी पर इन्टरनेट सेवा प्रदान करने के लिए 12000 से भी ज्यादा सैटेलाइट की आवश्यकता पड़ेगी।
  • स्पेसएक्स की स्टार लिंक इन्टरनेट परियोजना में सैटेलाइट को  को इसी ऑर्बिट में स्थापित किया जायेगा।

जियो स्टेशनरी ऑर्बिट (GEO)

  • यह ऑर्बिट पृथ्वी की सतह से 35,786 किमी. की उचाई पर स्थित है।
  •  इस कक्षा में सैटेलाइट उतने ही समय में पृथ्वी का एक चक्कर लगाते है, जितने समय में पृथ्वी अपने अक्ष पर एक चक्कर पूरा करती है। 
  • इसीलिये ये पृथ्वी से देखने पर स्थिर दिखाई देते है।
  • अधिक ऊंचाई के कारण ये उपग्रह एक बड़े क्षेत्र को कवर करते हैं, और कम ग्राउंड स्टेशनों की आवश्यकता होती है, जो उन्हें लक्षित कवरेज के लिए आदर्श बनाती है। 
  • अधिक ऊंचाई के कारण इनकी लेटेंसी दर ज्यादा होती है, जो कि इन्टरनेट सेवा के लिये एक नकारात्मक पक्ष है। 

सैटेलाइट इंटरनेट सेवा के लाभ

  • सैटेलाइट इंटरनेट सेवा से दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी इन्टरनेट सेवा प्रदान करने में आसानी होगी, जहां नियमित इंटरनेट सेवा नहीं पहुंच सकी है।
  • पहाड़ों एवं दुर्गम जगहों पर सेना के जवानों को सेटेलाइट इंटरनेट के जरिए जोड़ा जा सकेगा।
  • प्राकृतिक आपदाएं आने पर जब केबल इंटरनेट को गंभीर क्षति पहुँचती है, तब ऐसी परिस्थितियों में आपदा राहत कार्यों के लिये सेटेलाइट इंटरनेट सेवा वरदान साबित हो सकती है।
  • सैटेलाइट इंटरनेट सेवा डिजिटल डिवाइड को कम कर सकती है।
  • सैटेलाइट इंटरनेट सेवा में डाटा संचरण की दर नियमित इंटरनेट से तेज होने की उम्मीद है। 
  • सैटेलाइट इन्टरनेट हाई बैंड विड्थ को हैंडल कर सकता है। जिससे पीक समय पर बहुत ज्यादा यूजर होने पर भी  इन्टरनेट स्पीड पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

सैटेलाइट इंटरनेट सेवा की चुनौतियाँ 

  • मौसम उपग्रह इंटरनेट सेवा को प्रभावित कर सकता है। भारी बारिश या तेज गति वाली हवा या तूफान उपग्रह संकेत के साथ हस्तक्षेप कर सकता है।
  • सैटेलाइट इंटरनेट सेवा के लिये आसमान का साफ होना आवश्यक है। 
  • केबल इंटरनेट के मुकाबले फिलहाल सैटलाइट इंटरनेट की स्पीड कम तथा लेटेंसी ज्यादा है। 
  • इसमें डाटा कीमत भी केबल इंटरनेट से अधिक है।
  • इसके लिये अन्तरिक्ष में बहुत ज्यादा उपग्रह भेजने की आवश्यकता पड़ेगी, जिससे अन्तरिक्ष में मलबे की मात्रा में वृद्धि होगी। 
  • ये वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क(VPN) सेवाओं से सुसंगत नहीं हैं, VPN इन्टरनेट पर उपयोग की जाने वाली एक ऐसी सेवा है, जो डाटा लीक होने से बचाती है, तथा गोपनीय बने रहने की सुविधा प्रदान करती है। 


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