
संवैधानिक प्रावधान:

- 73वां और 74वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के तहत पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) और नगरीय निकायों (ULBs) को वित्तीय स्वायत्तता प्रदान की गई।
- 11वीं और 12वीं अनुसूची में स्थानीय स्वशासन निकायों के कार्यों का उल्लेख है।
लेखा परीक्षा की जिम्मेदारी:
- भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG): पंचायती राज और नगरीय निकायों के खातों की ऑडिट।
- राज्य सरकारें: अपनी ऑडिट एजेंसियों के माध्यम से निगरानी करती हैं।
- स्थानीय निकायों के आंतरिक ऑडिट विभाग: वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करते हैं।
लेखा परीक्षा की प्रक्रिया:
- ऑडिट ऑनलाइन एप्लीकेशन (AuditOnline, 2020):
- पंचायत खातों का ऑनलाइन ऑडिट।
- धन के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए।
- WSIS पुरस्कार 2023 से सम्मानित ।
लेखा परीक्षण स्तरः
- आंतरिक लेखा परीक्षाः स्थानीय निकायों द्वारा।
- वित्तीय लेखा परीक्षाः राज्य वित्त आयोग और CAG द्वारा।
- परफॉर्मेंस ऑडिटः धन के प्रभावी उपयोग की जांच।
स्थानीय निकायों की लेखा परीक्षा से संबंधित संवैधानिक प्रावधान:
- अनुच्छेद 243G
- स्थानीय निकायों को अधिकार और जिम्मेदारियां सौंपने के लिए राज्य सरकारों को सक्षम बनाता है।
- पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) को वित्तीय और प्रशासनिक स्वायत्तता प्रदान करने का मूल सिद्धांत सुनिश्चित करता है।
- अनुच्छेद 243J:
- राज्य विधानमंडल को पंचायतों के लेखांकन और लेखा परीक्षा से संबंधित प्रावधान बनाने का अधिकार देता है।
- पंचायतों द्वारा रखे जाने वाले खातों और उनकी ऑडिट प्रक्रिया का निर्धारण करता है।
अनुच्छेद 243Z:
- नगरपालिकाओं (Urban Local Bodies - ULBs) की लेखा प्रणाली और लेखा परीक्षा के लिए राज्य विधानमंडल को कानून बनाने का अधिकार देता है।
- वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने में सहायक।
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