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रामप्पा मंदिर के पास प्रस्तावित कोयला खदान से विरासत को खतरा

चर्चा में क्यों?

  • तेलंगाना के मुलुगु जिले के वेंकटापुर में प्रस्तावित PVNR ओपन-कास्ट कोयला खदान का विरोध तेज हो गया है। 
  • काकतीय हेरिटेज ट्रस्ट (KHT) और अन्य विरासत संरक्षण कार्यकर्ताओं का कहना है कि खनन परियोजना से यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल रामप्पा मंदिर और रामप्पा झील को दीर्घकालिक नुकसान का खतरा हो सकता है।
  • कार्यकर्ताओं ने परियोजना वापस लेने की मांग की है और दशहरा के बाद 15 गांवों के लोगों को साथ लेकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई है।

प्रस्तावित खनन परियोजना को लेकर मुख्य चिंताएँ

  • प्रस्तावित ओपन-कास्ट खदान रामप्पा झील और मंदिर से लगभग 5 किलोमीटर नीचे की ओर स्थित होगी तथा यहां लगभग 300 मीटर गहराई तक खुदाई प्रस्तावित है।
  • काकतीय हेरिटेज ट्रस्ट के अनुसार, तकनीकी रिपोर्टों में निम्नलिखित चिंताएँ सामने आई हैं-
    • रामप्पा झील का जलस्तर भूजल की गति को प्रभावित कर सकता है। 
    • क्षेत्र में मौजूद भू-वैज्ञानिक दरारें (Geological Lineaments) और भ्रंश (Faults) पानी के प्रवाह को प्रभावित कर सकते हैं। 
    • झील में कट-ऑफ ट्रेंच नहीं होने से गहरी खुदाई के कारण पानी का रिसाव बढ़ सकता है। 
    • इससे हाइड्रोलिक ग्रेडिएंट में बदलाव हो सकता है। 
    • मंदिर की सैंडबॉक्स नींव और आसपास की भू-वैज्ञानिक संरचनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। 
    • खनन के दौरान होने वाले बार-बार के कंपन से लगभग 800 वर्ष पुराने मंदिर पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है। 
    • रामप्पा मंदिर के कुछ हिस्सों में पहले से ही दरारें और असमान धंसाव जैसी समस्याएँ देखी गई हैं। 
    • खनन से क्षेत्र की जैव विविधता, स्थानीय पर्यावरण तथा झील पर निर्भर समुदायों के सामाजिक-आर्थिक हित भी प्रभावित हो सकते हैं। 

रामप्पा मंदिर के बारे में

  • रामप्पा मंदिर, जिसे काकतीय रुद्रेश्वर मंदिर भी कहा जाता है, तेलंगाना के मुलुगु जिले में स्थित एक महत्वपूर्ण काकतीयकालीन मंदिर है।
  • इसका निर्माण 1213 ईस्वी में काकतीय शासक गणपति देव के शासनकाल में उनके सेनापति रेचारला रुद्र द्वारा कराया गया था।
  • मंदिर का नाम इसके प्रमुख शिल्पकार रामप्पा के नाम पर पड़ा। इसे भारत के उन विशिष्ट मंदिरों में माना जाता है, जिसका नाम उसके वास्तुकार/मुख्य शिल्पकार के नाम पर पड़ा है।
  • 2021 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर स्थल के रूप में “काकतीय रुद्रेश्वर (रामप्पा) मंदिर, तेलंगाना” नाम से सूचीबद्ध किया।

रामप्पा मंदिर की प्रमुख स्थापत्य विशेषताएँ

  1. ताराकार मंच: -मंदिर लगभग 6 फीट ऊँचे ताराकार (Star-shaped) मंच पर निर्मित है। इसकी दीवारों, स्तंभों और छतों पर अत्यंत सूक्ष्म नक्काशी देखने को मिलती है।
  2. विशिष्ट विमान: -मंदिर का विमान (Vimana) पिरामिडनुमा और क्षैतिज रूप से क्रमशः ऊपर उठता हुआ है। इसे अपेक्षाकृत हल्की, छिद्रयुक्त ईंटों से बनाया गया है।
  3. पत्थरों की नक्काशी: -मंदिर में ग्रेनाइट और डोलराइट से निर्मित तथा अलंकृत बीम और स्तंभ इसकी प्रमुख स्थापत्य विशेषताओं में शामिल हैं।
  4. हल्की ईंटों का प्रयोग:- मंदिर के ऊपरी हिस्सों में इस्तेमाल की गई ईंटें हल्की और छिद्रयुक्त हैं। इन ईंटों को बनाने में मिट्टी, बबूल की लकड़ी, भूसा और मायरोबलन फल जैसी सामग्री के उपयोग का उल्लेख मिलता है।

सैंडबॉक्स तकनीक क्या है?

  • रामप्पा मंदिर की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में इसकी सैंडबॉक्स नींव तकनीक शामिल है।
  • इस तकनीक में मंदिर की नींव के गड्ढे को रेत, चूना, गुड़ और काले मायरोबलन फल जैसी सामग्रियों के मिश्रण से भरा गया था।
  • यह मिश्रण नींव को एक प्रकार का कुशन प्रदान करता है और भूकंपीय गतिविधियों के दौरान कंपन को अवशोषित करने में मदद कर सकता है।
  • इसी कारण रामप्पा मंदिर को भूकंपरोधी स्थापत्य का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है।

यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा

  • रामप्पा मंदिर को 2021 में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया। इसका आधिकारिक नाम काकतीय रुद्रेश्वर (रामप्पा) मंदिर, तेलंगाना है।
  • प्रस्तावित खनन परियोजना को लेकर विरासत संरक्षण कार्यकर्ताओं की मुख्य चिंता यह है कि खनन से होने वाले भूगर्भीय बदलाव, जल प्रवाह में परिवर्तन और कंपन मंदिर तथा रामप्पा झील की दीर्घकालिक स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं।

आगे की राह

  • रामप्पा मंदिर जैसे विश्व धरोहर स्थलों के आसपास किसी भी बड़ी खनन या बुनियादी ढाँचा परियोजना से पहले विस्तृत पर्यावरणीय प्रभाव आकलन, विरासत प्रभाव आकलन और भूगर्भीय अध्ययन किया जाना आवश्यक है।
  • रामप्पा झील, मंदिर की नींव, भूजल प्रणाली और स्थानीय जैव विविधता को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिक आधार पर परियोजना की समीक्षा की जानी चाहिए। विकास और विरासत संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है।

FAQs: रामप्पा मंदिर और प्रस्तावित कोयला खदान

प्रश्न 1. रामप्पा मंदिर कहाँ स्थित है?

उत्तर: रामप्पा मंदिर तेलंगाना के मुलुगु जिले में स्थित है।

प्रश्न 2. रामप्पा मंदिर का निर्माण कब हुआ था?

उत्तर: रामप्पा मंदिर का निर्माण 1213 ईस्वी में काकतीय शासक गणपति देव के शासनकाल में कराया गया था।

प्रश्न 3. रामप्पा मंदिर का निर्माण किसने कराया था?

उत्तर: इसका निर्माण काकतीय शासक गणपति देव के सेनापति रेचारला रुद्र ने कराया था।

प्रश्न 4. रामप्पा मंदिर का नाम रामप्पा क्यों पड़ा?

उत्तर: मंदिर का नाम इसके प्रमुख शिल्पकार रामप्पा के नाम पर पड़ा। यह भारत के उन विशिष्ट मंदिरों में शामिल है, जिनका नाम प्रमुख शिल्पकार के नाम पर पड़ा है।

प्रश्न 5. रामप्पा मंदिर को यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा कब मिला?

उत्तर: 2021 में रामप्पा मंदिर को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया। इसका आधिकारिक नाम काकतीय रुद्रेश्वर (रामप्पा) मंदिर, तेलंगाना है।

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